Author: वीरेंद्र भारद्वाज

  • नेपाल में आपदा की स्थिति के बाद उत्तराखंड शासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

    नेपाल में आपदा की स्थिति के बाद उत्तराखंड शासन ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

    नागरिकों से अपील: हेल्पलाइन पर साझा करें आवश्यक जानकारी, हर संभव सहायता के लिए करें संपर्क

    देहरादून। नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ से हुई जन-धन की क्षति के दृष्टिगत उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा उत्तराखण्ड के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

    यदि उत्तराखण्ड का कोई नागरिक नेपाल के प्रभावित क्षेत्र में फंसा हुआ है अथवा कोई व्यक्ति किसी नागरिक के संबंध में जानकारी साझा करना चाहता है, तो राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

    प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि नेपाल के प्रभावित क्षेत्र से संबंधित कोई भी आवश्यक जानकारी होने पर उसे उपरोक्त हेल्पलाइन नंबरों पर तत्काल साझा करें। प्रभावित क्षेत्र में फंसे उत्तराखण्ड के नागरिक भी इन नंबरों पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

    हेल्पलाइन नंबर

    0135-2710334 | 0135-2710335

    0135-2664314 | 0135-2664315 | 0135-2664316

    मोबाइल: 8218867005

    टोल फ्री: 1070

    जनपद देहरादून की हेल्पलाइन

    0135-2726066 | 0135-2626066

    मोबाइल: 7534826066

    टोल फ्री: 1077

    नागरिक नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में फंसे उत्तराखण्ड के नागरिकों अथवा अन्य संबंधित व्यक्तियों के संबंध में उपरोक्त राज्य एवं जनपद स्तरीय हेल्पलाइन नंबरों पर आवश्यक जानकारी साझा कर सकते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।

  • ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक सिस्टम होंगे स्थापित

    ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक सिस्टम होंगे स्थापित

    ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक सिस्टम होंगे स्थापित

    जल्द होगा केदारताल और सरस्वती ताल का सर्वे

    देहरादून। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा उनकी निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ग्लेशियर झीलों की नियमित एवं वैज्ञानिक निगरानी के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तथा आवश्यकतानुसार इनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में स्थित संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक सर्वे एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। झीलों की स्थिति, जलस्तर, आकार में होने वाले परिवर्तन, आसपास के भू-भाग की स्थिति तथा संभावित जोखिम क्षेत्रों का नियमित आकलन किया जाए। संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण, संचार प्रणाली एवं अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

    उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि केवल अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने तक सीमित न रहते हुए ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपदा की स्थिति में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था, स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र तथा राहत एवं बचाव की तैयारियों को मजबूत किया जाए।

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग विनय रुहेला तथा ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त) द्वारा नेपाल में घटित आपदा के उपरांत उत्तराखण्ड में ऐसी संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को लेकर सभी जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा की गई।

    बैठक में विशेष रूप से ग्लेशियर झीलों, नदियों के जलस्तर, संवेदनशील स्थलों की निगरानी, अर्ली वार्निंग सिस्टम, संचार व्यवस्था, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि अपने-अपने जनपदों में संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें तथा किसी भी असामान्य गतिविधि की सूचना तत्काल उच्च स्तर पर उपलब्ध कराई जाए।

    सचिव आपदा प्रबंधन ने बताया कि उत्तराखण्ड में कुल 13 ग्लेशियर झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित की गई हैं। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। शेष संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही चमोली जनपद स्थित सरस्वती ताल तथा उत्तरकाशी जनपद स्थित केदारताल का सर्वेक्षण करने के लिए विशेषज्ञ दल रवाना किया जाएगा। सर्वेक्षण के दौरान झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।

    बैठक में एसीईओ प्रशासन श्री प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा आदि उपस्थित रहे।

     

  • एसआईआर संवैधानिक प्रक्रिया, तुष्टिकरण को छोड़ जिम्मेदाराना रुख दिखाये कांग्रेस: चौहान

    एसआईआर संवैधानिक प्रक्रिया, तुष्टिकरण को छोड़ जिम्मेदाराना रुख दिखाये कांग्रेस: चौहान

    हल्द्वानी प्रकरण को जातीय रंग देने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण
    देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस को प्रदेश मे चल रही त्रुटिहीन मतदाता सूची के लिए चल रही एसआईआर की प्रक्रिया मे सहयोग करना चाहिए, न बल्कि इसमें तुष्टिकरण का भाव देखकर विरोध करे। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी प्रकरण मे कांग्रेस जातीय समीकरण तलाश रही है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
    चौहान ने कहा कि निर्वाचन आयोग को दिये गए शिकायती पत्र मे कांग्रेस ने एसआईआर मे महज धर्म विशेष के लोगों को प्रताड़ित करने की बात की है और यह उसके पुराने स्वभाव तुष्टिकरण से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग और जाति से भी लोग प्रक्रिया मे सहयोग कर रहे हैं और उनको भी नोटिस मिल रहे हैं, अथवा वह नाम काटे जाने की आशंका जताते रहे हैं। हालांकि बिना सुनवाई के किसी का नाम काटा जाना संभव नही है, लेकिन कांग्रेस महज एक पक्षीय बात कर रही है और इससे साफ है कि उसकी मंशा मे खोट है। महज कुछ विधान सभा क्षेत्र और वर्ग विशेष की बात कर कांग्रेस अपने इरादों को ही जाहिर कर रही है।
    उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एसआईआर प्रक्रिया में दर्ज आपत्तियों में शिकायत के बजाय उनके निस्तारण में सहयोग की करने की जरूरत है। त्रुटिहीन मतदाता सूची निर्माण सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, लिहाजा भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह उन्हें भी मतदाताओं एवं संवैधानिक संस्थाओं की मदद करनी चाहिए।    कांग्रेस हमेशा की तरह इस बार भी एसआईआर पर दोहरा रुख अपना रही है, एक तरफ त्रुटिहीन मतदाता सूची की वकालत करती है, दूसरी तरफ अनमेप्ड और आपत्तियों पर झूठे आरोप लगाती हैं। न तो कांग्रेस पार्टी की मंशा है सफल एसआईआर की और न ही उनके पास प्रक्रिया में शामिल होने के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता हैं।
    कांग्रेस जानती है कि देश की तरह प्रदेश में भी वोटरों का एक बड़ा तबका है जो अवैध तरीके से मतदाता सूची में प्रवेश कर गया था। अब ऐसे नाम हट रहे हैं या उनपर आपत्तियां लग रही हैं और कांग्रेस को परेशानी हो रही है, जो कहीं न कहीं दर्शाता है कि ये सभी कांग्रेस पार्टी को अपने समर्थक लगते हैं। अगर, आपत्तियों पर उन्हें कोई समस्या है तो उन्हें जमीन पर निस्तारण के लिए उतरना चाहिए। भाजपा की तरह उनके नेताओं कार्यकर्ताओं को मतदाताओं को जागरूक कर, उनके कागजात पूरे करवाकर और अन्य तरीकों से सहयोग कर आपत्तियों का निस्तारण करवाना चाहिए।
    उन्होंने कहा कि हल्द्वानी प्रकरण मे कांग्रेस जातीय कार्ड खेलने की कोशिश कर रही है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैदान मे सफाई कार्य करने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि उसका भाजपा से कोई लेना देना नही है और भाजपा ने भी इसका समर्थन नही किया। हालांकि मैदान मे लगने वाले समुदाय विशेष के नारों से व्यथित संस्था ने इसी कारण कुछ सफाई का कार्य किया हो।
    चौहान ने कहा कि कांग्रेस धर्म और जातीय कार्ड खेलकर वातावरण को दूषित करने की कोशिश कर रही है और जनता उसकी मंशा को भली भाँति जानती है। भाजपा का मत सबका साथ सबका विकास है और कांग्रेस की कांग्रेस जाति और धर्म आधारित बांटने की कोशिश का जनता करारा जवाब देगी।
  • एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने की साजिश: धस्माना

    एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मुस्लिम मतदाताओं के नाम काटने की साजिश: धस्माना

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी से हस्तक्षेप की मांग, निर्वाचन आयोग से मिले कांग्रेसी

    देहरादून। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में हो रही गंभीर अनियमितताओं पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

    धस्माना ने बताया कि देहरादून के टर्नर रोड निवासी मोहम्मद अलीम और उनकी पत्नी खशीन फारूकी, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में भी है और जो विभाजन-पूर्व से देहरादून में बसे प्रतिष्ठित परिवारों से हैं, के आवेदन बार-बार खारिज किए जा रहे हैं। अलीम हिमालयन वेलनेस के डॉ. एस. फारूक के चचेरे भाई हैं और श्रीमती फारूकी प्रसिद्ध हकीम रफत हुसैन फारूकी जी की पोती हैं, जो विभाजन-पूर्व से देहरादून के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं। वे केवल C-26 से C-24 लेन में उसी विधानसभा क्षेत्र के भीतर शिफ्ट हुए हैं।

    धस्माना ने कहा कि यह मामला अकेला नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार ऊधमसिंह नगर जिले की 5 विधानसभाओं किच्छा, गदरपुर, खटीमा, नानकमत्ता और रुद्रपुर में सिर्फ 5 व्यक्तियों ने लगभग 6,500 फॉर्म-7 (नाम काटने की आपत्तियां) दाखिल की हैं और रिपोर्ट के अनुसार इन सभी का निशाना मुस्लिम मतदाता हैं। इनमे

    किच्छा में 4,857 में से 4,855 आपत्तियां एक ही व्यक्ति राजेश तिवारी (भाजपा BLA) द्वारा डाली गयी है। इसके अलावा गदरपुर में 670 आपत्तियां एक व्यक्ति द्वारा, जो कुल का 49% , खटीमा में 394 में से 392 आपत्तियां अमित कुमार पांडे द्वारा, नानकमत्ता में 391 में से 353 आपत्तियां किशोर जोशी द्वारा तथा रुद्रपुर में 230 आपत्तियां सनी पासवान द्वारा। रिपोर्ट के अनुसार ये सभी भाजपा से जुड़े हैं।

    धस्माना ने मांग की कि मोहम्मद अलीम दंपति के मामले की नए सिरे से पारदर्शी जांच हो। 5 विधानसभाओं में थोक में दाखिल 6,500 आपत्तियों की स्वतंत्र समीक्षा हो, बिना BLO की फील्ड जांच, बिना दस्तावेजी सबूत और बिना मतदाता को नोटिस व सुनवाई का मौका दिए कोई नाम न काटा जाए। इसके अलावा यह जांच की जाए कि क्या मुस्लिम मतदाताओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और SIR को गैर-पक्षपातपूर्ण व धर्म-निरपेक्ष बनाया जाए।

    उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है और किसी भी पात्र नागरिक को मताधिकार से वंचित करना असंवैधानिक है।

  • मुख्य सचिव से विश्व बैंक के एमडी एवं प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

    देहरादून, 27 अगस्त(नवोदय टाइम्स) मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन के साथ विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई एवं उनकी टीम ने गुरुवार को सचिवालय में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन तथा राज्य की उत्तराखण्ड@2047 की विकास रणनीति सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

    मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध, टिकाऊ और आपदा- प्रतिरोधी राज्य के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नदियों के पुनर्जीवन एवं जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास के लिए जल, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बनने जा रहा है, इसलिए राज्य में वर्षा जल के संरक्षण एवं अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विश्व बैंक के साथ वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

    मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के पर्याप्त अवसर सृजित कर पलायन को नियंत्रित करने तथा आवश्यकतानुसार रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिगत राज्य के दीर्घकालिक विकास पर फोकस किया जा रहा है।

    शिक्षा क्षेत्र में भी विश्व बैंक के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में सुधार तथा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ही आजीविका एवं पलायन के क्षेत्र में भी विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। बैठक में विभागीय अधिकारियों द्वारा राज्य के ऊर्जा, वित्त एवं पेयजल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए भविष्य में रणनीतिक एवं फ्लैगशिप परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। विश्व बैंक की ओर से उत्तराखंड के विकास के लिए दीर्घकालिक सहयोग एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। बैठक में ‘विजन उत्तराखंड@2047’ के तहत राज्य की रणनीतिक विकास प्राथमिकताओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य की शहरी आवश्यकताओं, आधारभूत सुविधाओं तथा सतत एवं सुनियोजित शहरी विकास पर भी चर्चा हुई। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य की विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

    इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विश्व बैंक से जोहांस जट्ट, सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव श्री नरेंद्र सिंह भंडारी, रोहित मीणा एवं नवनीत पाण्डे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे ।

  • माँ की निर्मम हत्या कर फरार आरोपी पुत्र जंगल से गिरफ्तार

    माँ की निर्मम हत्या कर फरार आरोपी पुत्र जंगल से गिरफ्तार

    हत्या के बाद से लगातार घने जंगल में ठिकाने बदलकर छिप रहा था आरोपी

    नई टिहरी। कोतवाली नई टिहरी क्षेत्र में अपनी मां की निर्मम हत्या कर फरार चल रहे आरोपी को पुलिस की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है।

    एसएसपी श्वेता चौबे ने बताया कि जाखणीधार ब्लॉक के ग्राम कोटी खास निवासी बुग्गा देवी पत्नी स्व. गुलाब सिंह की उनके पुत्र अजय सजवाण ने घर पर ही मार दिया था। मृतका के भतीजे कृष्णा सजवाण की तहरीर के आधार पर थाना नई टिहरी में केस दर्ज किया गया था। एसएसपी चौबे के निर्देशन में आरोपी की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें गठित की गई। पुलिस टीमों ने आरोपी के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी।पुलिस टीमों ने स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय करते हुए संभावित स्थानों पर सघन तलाशी एवं कॉम्बिंग अभियान चलाया गया। विवेचना एवं लगातार कार्रवाई के दौरान प्रथम दृष्टया सामने आया कि आरोपी अजय गिरफ्तारी से बचने के लिए जाखणीधार क्षेत्र के घने जंगलों में छिपा हुआ था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। पुलिस टीमों की लगातार कॉम्बिंग, सघन खोजबीन एवं निगरानी के चलते बुधवार देर शाम को आरोपी अजय सजवाण को जाखणीधार के निकट जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। घटना के बाद से ही नई टिहरी पुलिस द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। घने जंगल एवं कठिन पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पुलिस टीमों ने लगातार कॉम्बिंग एवं सघन तलाशी अभियान चलाकर आरोपी को गिरफ्तार किया।

    पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक ऐश्वर्या पाल, एसएसआई पवन डिमरी, एसआई शांति प्रसाद चमोली, हेड कांस्टेबल सुनील, मुकेश, अरविन्द सेमवाल, अभिनव गुसाईं, कुलदीप, शेर सिंह शामिल थे

  • कांग्रेस के महंगे बिजली करार के जवाब मे धामी सरकार ने किया सस्ता इंतजाम: भट्ट

    कांग्रेस के महंगे बिजली करार के जवाब मे धामी सरकार ने किया सस्ता इंतजाम: भट्ट

    कांग्रेस ने 11.26 रुपए, भाजपा ने किया 5.74 रुपए प्रति यूनिट का करार

    थर्मल पावर पर भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष आर्य को दिखाया आईंना

    ऊर्जा प्रदेश बनाने को चार साल में हुए ऐतिहासिक काम, हाइड्रो, स्माल हाइड्रो, सोलर, थर्मल, जियो थर्मल, पंप स्टोरेज पावर प्लांट से बढ़ेगा बिजली उत्पादन

    देहरादून। अडाणी पावर के साथ 1320 मेगावाट थर्मल पावर के करार पर विपक्ष के उठाए सवालों पर भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को  कांग्रेस सरकार में 2016 में हुए महंगे गैस पावर सौदे की याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस के करार के कारण आज गैस पावर का 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ता है। इसमें कई बार बिना बिजली का उत्पादन हुए भी फिक्स चार्ज का करोड़ों का हर महीने अलग भुगतान करना होता है। वहीं भाजपा ने 5.74 रुपए प्रति यूनिट का थर्मल पावर का करार अगले 25 साल के लिए किया है।

    महेंद्र भट्ट कहा कि कांग्रेस राज में पावर सेक्टर में सिर्फ लूट हुई, जबकि धामी सरकार में 25 साल के लिए न सिर्फ सस्ती बिजली का इंतजाम हुआ, बल्कि उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने को असल मायनों में काम हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज में काशीपुर के गैस पावर प्लांटों से 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से महंगी बिजली का करार हुआ, जो आज तक राज्य के लिए मुसीबत बना हुआ है। बाजार में गैस के दाम महंगे होने पर इन पावर प्लांट को चलाना मुश्किल होता है। इसके बावजूद उन्हें हर महीने फिक्स चार्ज का करोड़ों का भुगतान करना होता है। कांग्रेस के करार के कारण आज राज्य को 11.26 रुपए प्रति यूनिट की दर से करार किया, वहीं भाजपा की धामी सरकार ने सबसे विश्वसनीय मानी जानी वाली थर्मल पावर का करार सिर्फ 5.74 रुपए प्रति यूनिट में किया। इसमें यदि ट्रांसमिशन चार्ज भी जोड़ दिए जाएं, तो भी ये कीमत छह रुपए से अधिक नहीं है। सरकार के इस कदम से उत्तराखंड ने अपनी भविष्य की बिजली जरूरतों को भी सुरक्षित किया है। ये करार अभी तक देश में हुए थर्मल पावर के सभी करारों में सबसे सस्ता करार है।

    भट्ट ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को अपनी जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए। अडानी पावर को फ्री में कोल ब्लॉक नहीं मिला है। केंद्र सरकार के उत्तराखंड को आवंटित कोल ब्लॉक का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में होगा। केंद्र सरकार को इस कोल ब्लॉक का भुगतान होगा। इससे पैदा होने वाली बिजली उत्तराखंड को सस्ती दरों पर मिलेगी। यदि यह पावर प्लांट उत्तराखंड में लगाया जाता तो छत्तीसगढ़ से कोयला उत्तराखंड लाने में कोयला परिवहन का खर्चा बढ़ जाता ।धामी सरकार ने स्मार्ट निर्णय लिया और सस्ती बिजली का इंतजाम किया।

    भट्ट ने कहा कि मानसून, आपदा के दौरान सोलर और हाइड्रो से बिजली उत्पादन प्रभावित होता है। युद्ध के समय गैस विदेशों से आना बंद हो जाती है। उस दौरान गैस महंगी होने के कारण गैस पावर चल नहीं पाते। ऐसे में थर्मल पावर को सबसे विश्वसनीय बिजली माना जाता है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी सरकार के समय की बिजली कटौती याद रखनी चाहिए। किस तरह 10 घंटे से अधिक बिजली कटौती होती थी। आज धामी सरकार में 24 घंटे बिजली की सप्लाई हो रही है। किसानों को सस्ती बिजली मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासन में कभी भी उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने की दिशा में कोई काम नहीं किया। जबकि धामी सरकार ने न सिर्फ पुराने रुकी हुई परियोजनाओं पर काम शुरू किया, बल्कि ऊर्जा के हर क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ाने को जमीनी काम किया। आज उत्तराखंड में एक हजार मेगावाट से अधिक सोलर पावर उत्पादन हो रहा है। जो कांग्रेस राज में सिर्फ एक सपना था। दशकों से रुकी हुई लघु जल विद्युत परियोजनाओं का पारदर्शी तरीके से आवंटन कर काम शुरू कराया।

    भट्ट ने कहा कि 300 मेगावाट की लखवाड़, 660 मेगावाट किसाऊ, त्यूणी प्लासू, सरकारी भ्योल रसियाबगड़ जैसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा कर एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन के रास्ते तैयार किए। वहीं स्मॉल हाइड्रो, सोलर पावर, जियो थर्मल, पंप स्टोरेज पावर प्लांट से आने वाले सालों में उत्तराखंड पावर सेक्टर में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा होगा।

    इन योजनाओं से उत्तराखंड सिर्फ अपनी बिजली जरूरतों को ही पूरा नहीं करेगा, बल्कि देश की बिजली जरूरतों को पूरा करने में भी सहयोग देगा। इससे आने वाले वर्षों में बिजली उत्पादन राज्य के राजस्व का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। लाखों की संख्या में रोजगार, स्वरोजगार बढ़ेगा। इन बिजली योजनाओं से मिलने वाले लोकल एरिया डेवपलमेंट फंड से राज्य के दुरुस्थ और परियोजना क्षेत्रों में विकास कार्य होंगे।

  • अपने संसाधनों के बावजूद 25 साल तक अडाणी से महंगी बिजली क्यों खरीदेगी सरकार: आर्य

    अपने संसाधनों के बावजूद 25 साल तक अडाणी से महंगी बिजली क्यों खरीदेगी सरकार: आर्य

    अडानी पावर से बिजली ख़रीद पर कांग्रेस ने उठाये सवाल

    देहरादून। कांग्रेस ने अडानी पावर को 25 वर्ष के लिए विजली खरीद पर सवाल उठाते हुए कहा कि धामी कैबिनेट का फैसला उत्तराखंड के हितों के लिए अत्यंत गंभीर है। आर्य ने कहा कि उत्तराखंड की नदियां, जल और प्राकृतिक संसाधन यहां की जनता की धरोहर हैं। जिस प्रदेश की पहचान जल विद्युत और प्राकृतिक ऊर्जा संसाधनों से है, उसी प्रदेश को 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी से कोयला आधारित बिजली खरीदने के लिए बाध्य होना सरकार की ऊर्जा नीति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    उन्होंने पूछा कि प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि 25 साल के लिए अदाणी पावर से ₹5.746 प्रति यूनिट की दर पर 1,320 मेगावाट बिजली खरीदने का फैसला करना पड़ा? 25 वर्षों की अवधि वाला बिजली खरीद समझौता कोई सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं है। यह प्रदेश की आने वाली कई पीढ़ियों पर आर्थिक प्रभाव डालने वाला फैसला है।

    सरकार को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि इस करार के तहत 25 वर्षों में उत्तराखंड पर कुल कितनी वित्तीय देनदारी आएगी, टैरिफ में भविष्य में किस प्रकार के संशोधन होंगे, बिजली की वास्तविक आपूर्ति लागत क्या होगी और इस समझौते में प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए कौन-कौन सी शर्तें रखी गई हैं।

    बड़े बांधों और जलविद्युत परियोजनाओं के कारण हजारों परिवारों का विस्थापन हुआ, पर्यावरणीय प्रभाव झेला गया और उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा का उपयोग राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों के लिए किया गया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब नदियां हमारी हैं, जल हमारा है, पहाड़ हमारे हैं, तो उत्तराखंड की ऊर्जा नीति का लाभ उत्तराखंड की जनता को क्यों नहीं मिलना चाहिए? सरकार को पहले यह जवाब देना चाहिए कि प्रदेश की अपनी जलविद्युत क्षमता का पूरा उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा है और राज्य को लगातार बाहर से बिजली खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास जलविद्युत के साथ-साथ सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों की भी संभावनाएं हैं। सरकार को यह बताना चाहिए कि इन विकल्पों को प्राथमिकता देने के बजाय इतने लंबे समय के लिए कोयला आधारित बिजली खरीदने का निर्णय क्यों लिया गया।

    सरकार को बताना चाहिए कि 25 वर्षों में इस समझौते की अनुमानित कुल वित्तीय लागत कितनी होगी? ₹5.746 प्रति यूनिट की दर में कौन-कौन से शुल्क और समायोजन शामिल हैं? क्या भविष्य में इस दर में वृद्धि या अन्य वित्तीय भार की संभावना है? करार समाप्त करने अथवा पुनरीक्षण की क्या शर्तें हैं? उत्तराखंड की अपनी जलविद्युत क्षमता का वर्तमान उपयोग कितना है? राज्य को प्रतिवर्ष कितनी बिजली बाहर से खरीदनी पड़ती है? कोयला आधारित बिजली खरीद के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किस आधार पर किया गया है?

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पास देश को ऊर्जा देने की क्षमता है। लेकिन विडंबना यह है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद प्रदेश को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए बाहर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। धामी सरकार को अदाणी पावर के साथ 25 साल के इस करार पर प्रदेश की जनता को पूरा सच और पूरा हिसाब देना होगा।

     

     

     

  • रक्षाबंधन पर्व पर बड़कोट मे उमड़ा बहनों का सैलाब, मनवीर चौहान को बांधी राखी

    रक्षाबंधन पर्व पर बड़कोट मे उमड़ा बहनों का सैलाब, मनवीर चौहान को बांधी राखी

    लोक गायिका मीना राणा और स्थानीय महिला संगीत मंडलियों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, गंगा-यमुना घाटी से पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं

    बड़कोट/देहरादून। नगर पालिका बड़कोट में भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान की अगुवाई में रक्षाबंधन पर्व धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र की गंगा और यमुना घाटी सहित दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। महिलाओं ने मनवीर सिंह चौहान की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

    कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस दौरान स्थानीय महिला संगीत मंडलियों और लोक कलाकारों ने भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोक गायिका मीना राणा ने अपनी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी, जिस पर कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं और पुरुषों ने जमकर नृत्य किया।

    रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी देखने को मिली। कार्यक्रम में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं के एकजुट होने से आयोजन में उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा।

    इस अवसर पर मनवीर सिंह चौहान ने कार्यक्रम में पहुंचीं सभी बहनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बहनों का यह प्रेम और स्नेह हिंदू संस्कृति एवं सनातन परंपरा की पहचान है। उन्होंने कहा कि इस परंपरा और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को संजोए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों के आशीर्वाद से भविष्य में यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र में मूलभूत एवं आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर हजारों बहनों का यह संगम हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। इस तरह के आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और एकजुटता को मजबूती मिलती है।

    कार्यक्रम में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अतोल रावत, अनुपमा रावत, भाजपा जिला महामंत्री परशुराम जुगड़ी, मंडल अध्यक्ष अमित रावत, शैलेंद्र कोहली, हरिमोहन चंद, तरवीन सिंह राणा सहित भाजपा कार्यकर्ता, स्थानीय लोग और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम का संचालन तरवीन सिंह राणा ने किया।

  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, मौजा सेंट्रल होप टाउन की खतौनी ऑनलाइन जारी

    उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, मौजा सेंट्रल होप टाउन की खतौनी ऑनलाइन जारी

    मुख्यमंत्री ने लिया था प्रकरण का संज्ञान

    देहरादून। सेलाकुई क्षेत्र के मौजा सेंट्रल होप टाउन के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। लगभग 8-10 वर्षों से बंदोबस्ती प्रक्रिया के कारण बंद पड़ी खतौनी आखिरकार ऑनलाइन भूलेख पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिए गए निर्देशों के महज 45 दिनों के भीतर शासन-प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 1,188 खातों को ऑनलाइन जारी कर दिया है। सरकार के इस कदम से क्षेत्र की लगभग 25 से 30 हजार आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।

    गौरतलब है कि बीते 11 जुलाई 2026 को आयोजित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय जनता ने मुख्यमंत्री धामी से खतौनी ऑनलाइन न होने की गंभीर समस्या साझा की थी। ऑनलाइन रिकॉर्ड न होने के कारण आम जनमानस को दाखिल-खारिज (Mutations), बैंक ऋण, विरासत दर्ज कराने, स्थायी निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

    जनता की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को दो माह के भीतर हर हाल में ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री के स्पष्ट और त्वरित निर्देशों का ही परिणाम है कि निर्धारित समयावधि से पूर्व ही 25 अगस्त 2026 को भूलेख पोर्टल पर खतौनी सार्वजनिक कर दी गई।

    मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद इस दीर्घकालिक समस्या का समाधान हो गया है। विगत 8–10 वर्षों से लंबित बंदोबस्ती प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत संबंधित अभिलेखों को डिजिटल रूप से पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया है। मौजा सेंट्रल होप टाउन के कुल 1,188 खातों को ऑनलाइन भूलेख प्रणाली से जोड़ दिया गया है। इससे सीधे तौर पर लगभग 25–30 हजार नागरिक लाभान्वित होंगे। सेलाकुई क्षेत्र की बड़ी आबादी को अब प्रमाण-पत्र, बैंक ऋण तथा भूमि संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से वर्षों से रुकी हुई विकास योजनाएं और व्यक्तिगत राजस्व कार्य अब सुगमता से पूरे हो सकेंगे। अब आवेदक घर बैठे ही पोर्टल के माध्यम से अपनी ऑनलाइन खतौनी प्राप्त कर सकते हैं।