लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग की जगी उम्मीदें, कोर्ट ने हटाया स्टे – News Debate

लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग की जगी उम्मीदें, कोर्ट ने हटाया स्टे

देहरादून। लंबे समय से निर्माण कार्य की बाट जो रही उत्तराखंड की लाइफ लाइन मानी जाने वाली लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के निर्माण को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस सड़क निर्माण पर लगी रोक को हटा दी है। आज कोर्ट मे हुई सुनवाई अदालत ने स्टे हटा दिया है। मामले मे गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन दायर कर पक्ष रखा। वहीं दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज ने उनके वकील के रूप में अदालत में पैरवी की।

गौरतलब है कि करीब 11.5 किलोमीटर लंबे इस मोटर मार्ग  का 4.7 किलोमीटर हिस्सा सेंट्रल फॉरेस्ट एरिया से होकर गुजरता है। इसी वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्से को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृतियों और आपत्तियों के कारण निर्माण कार्य लंबे समय से बाधित था। यह सड़क कोटद्वार क्षेत्र को सीधे लालढांग से जोड़ती है, जो हरिद्वार व मैदानी इलाकों तक आवाजाही को सुगम बनाती है। वर्तमान में लोगों को नजीबाबाद के रास्ते आवाजाही करनी पड़ती है और इससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है। बरसात के मौसम में वैकल्पिक मार्गों पर भूस्खलन और जलभराव से आवाजाही अधिक विकट हो जाती है।

इस मार्ग को लेकर 6 माह से अधिक समय से लोग चिल्लरखाल बैरियर पर धरने पर बैठे हैं। वहीं कई बार लोग रैली और प्रदर्शन कर चुके हैं। आंदोलनरत लोगों का कहना है कि सड़क के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच मुश्किल हो रही है। वहीं आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में वाया नजीबाबाद जाना पड़ता है।

पैरवी के दौरान पक्ष रखते हुए कहा गया कि यह सड़क केवल परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की लाइफ लाइन है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्टे को समाप्त कर दिया। जिससे निर्माण कार्य फिर से शुरू होने का मार्ग खुल गया है। इस मार्ग के बनने से 18 गांवों के 40 हजार से ज्यादा की आबादी को लाभ मिलेगा। वहीं क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन की संभावना के साथ ही  छात्रों को स्कूल और कॉलेज तक नियमित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग राजनैतिक दृष्टि से भी अहम रहा है। हर विधान सभा चुनाव के वक्त यह मार्ग चुनावी एजेंडे मे रहा है। 2017 के विधान सभा चुनाव मे केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कोटद्वार मे आयोजित रैली मे इस मार्ग को हर हाल मे बनाने का वायदा किया था। हालांकि मार्ग पर कुछ कार्य भी हुआ, लेकिन फिर निर्माण कार्य पर रोक लग गयी। जन भावनाओं से जुड़े इस मार्ग को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन अब वन स्वीकृतियों से जुड़े बाकी प्रक्रियात्मक पहलुओं को जल्द पूरा कर निर्माण कार्य को गति देने की तैयारी में हैं।

वहीं कोटद्वार विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने कहा कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कोटद्वार और आसपास के समस्त ग्रामीण अंचलों के लिए जीवन रेखा है. पिछले चार सालों से वो लगातार इसे लेकर प्रयासरत थीं। इसके लिए उन्होंने शासन स्तर पर लगातार संवाद किया। साथ ही संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया।

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