Author: वीरेंद्र भारद्वाज

  • मणिमाई मंदिर के पास टकराये वाहन, 4 की मौत, 3 घायल

    मणिमाई मंदिर के पास टकराये वाहन, 4 की मौत, 3 घायल

    देहरादून। देहरादून जिले के  मणिमाई मंदिर के निकट बुधवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे मे 4 लोगों की मौत हो गयी, जबकि तीन लोग घायल हो गए। घायलों का नजदीकी अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

    जानकारी के अनुसार देहरादून की ओर से आ रही पिकअप वाहन का अचानक पिछला पहिया निकल गया और वह अनियंत्रित होकर  डिवाइडर पर चढ़ गया। तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रही इको  वैन कार सं0- एच0आर0-12-ए-8730 सीधे पिकअप में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि इको के परखच्चे उड़ गए। हादसे में इको वाहन में आगे बैठे दो व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई।

    इको में सवार अन्य 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पुलिस ने 108 की मदद से अस्पताल भेजा। अस्पताल में इलाज के दौरान दो और लोगों ने दम तोड़ दिया।

    हादसे के बाद हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर टोल के निकट भीषण जाम लग गया और करीब 1 घंटे तक यातायात बाधित रहा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने क्रेन की मदद से वाहनों को हटवाकर जाम खुलवाया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    एसआई कोतवाली नारायण व्यास ने घटना की पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि इको वाहन में 7 लोग सवार थे, जिनमें से तीन गंभीर घायलों को सीएससी डोईवाला में भर्ती किया गया, जिनमें से दो की मौत हो गई है. जबकि दो लोगों को हिमालयन हॉस्पिटल किया गया है। वहीं चार लोगों को देहरादून के कैलाश हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई।

    मृतक व्यक्ति
    1- नरेश पुत्र महावीर निवासी टिकट वाली गली रेलवे रोड रोहतक हरियाणा, उम्र 42 वर्ष
    2- विनोद, निवासी रोहतक हरियाणा

    घायल व्यक्ति:

    1- विपेंद्र सिंह पुत्र रामबरन सिंह निवासी रेलवे रोड हरियाणा, उम्र 35 वर्ष
    2- विक्की पुत्र रामभरोसे, निवासी ग्राम गिन्नौर, बदायूं, उत्तर प्रदेश।

    तीसरे घायल व्यक्ति का उपचार जॉली ग्रांट अस्पताल में चल रहा है, जिसकी पहचान के प्रयास किये जा रहे है।

  • वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं: सीएम

    वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रहरी हैं: सीएम

    इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाते हुए विकास को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता

    देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन एवं उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) श्री गुरमीत सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजुरिया, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लौंगजाम सहित भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं परिवीक्षार्थी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री ने भारतीय वन सेवा में चयनित सभी परिवीक्षार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का लगभग 70 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां के पर्वत, नदियां, वन एवं समृद्ध जैव विविधता प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा दायित्व भी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती के दौर में वन अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने परिवीक्षार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक एवं प्रशासनिक दक्षता का उपयोग करते हुए वन संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं और उन्हें अपने अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों तथा अपने ज्ञान के साथ संवेदनशीलता को भी सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में देश के सबसे बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक के माध्यम से लगभग 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। राजाजी टाइगर रिजर्व से होकर गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि वन उपज के परिवहन को सुगम बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में होने वाली जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए उत्तराखंड वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। साथ ही, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा की व्यवस्था तथा पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल तथा 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य वन संरक्षण के साथ-साथ इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका और समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारी भी इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाकर देश की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

     

  • उत्तराखंड बोर्ड ने घोषित किया परीक्षाफल सुधार परीक्षा का रिजल्ट

    उत्तराखंड बोर्ड ने घोषित किया परीक्षाफल सुधार परीक्षा का रिजल्ट

    हाईस्कूल का कुल परीक्षाफल 92 से बढ़कर हुआ 96 फसदी

    इण्टरमीडिएट में 85 से 91 फीसदी हुई उत्तीण छात्रों की संख्या

    रामनगर/देहरादून। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद् ने हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परिषदीय परीक्षाफल सुधार परीक्षा 2026 का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिये है। परीक्षाफल सुधार परीक्षा-2026 के तहत हाईस्कूल का कुल परीक्षा परिणाम 83.13 फीसदी रहा जबकि इण्टरमीडिएट में परीक्षा परिणाम 73.35 फीसदी रहा। इसके साथ ही अब बोर्ड परीक्षा के कुल परीक्षा परिणामों के आंकड़ों में भी वृद्धि हुई है।

    उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सभापति व निदेशक माध्यमिक शिक्षा वी.पी. सिमल्टी ने बताया कि बोर्ड ने हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट परिषदीय परीक्षाफल सुधार परीक्षा 2026 (प्रथम) एवं परीक्षाफल सुधार परीक्षा 2025 (तृतीय) का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षाफल सुधार परीक्षा 2026 (प्रथम) के तहत हाईस्कूल का कुल परीक्षाफल 83.13 फीसदी रहा। जिसमें बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत 82.61 प्रतिशत तथा बालिकाओं का 84.34 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार इण्टरमीडिएट में कुल परीक्षाफल 73.35 फसदी रहा। जिसमें बालकों का उत्तीण प्रतिशत 71.20 प्रतिशत तथा बालिकाओं का 76.07 प्रतिशत रहा। उन्होंने बताया कि परीक्षाफल सुधार परीक्षा के उपरांत बोर्ड परीक्षा के कुल परीक्षा परिणामों के आंकड़ों में भी वृद्धि हुई है। जिसके तहत हाईस्कूल का कुल परीक्षाफल 92.10 फीसदी से बढ़कर 96.07 फीसदी हो गया है, जिसमें 93.94 फीसदी बालक व 98.14 फीसदी बालिकाएं हैं। इसी प्रकार इण्टरमीडिएट में भी उत्तीर्ण प्रतिशत में जबरदस्त उछाल आया है। पहले जहां 85.11 फीसदी छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुई अब इनकी संख्या बढ़कर 91.80 फीसदी हो गई है। जिसमें 89.26 फीसदी बालक और 94.16 फीसदी बालिकाएं शामिल हैं।

    परिसद के सभापति वी.पी. सिमल्टी ने बताया कि बोर्ड ने परीक्षाफल सुधार परीक्षा 2025 (तृतीय) के परीक्षा परिणाम भी घोषित कर दिये हैं। जिसमें हाईस्कूल का कुल परीक्षा परिणाम 66.67 फीसदी रहा। जिसमें बालकों का परीक्षाफल 71.88 फीसदी तथा बालिकाओं का 57.89 फीसदी रहा। इसी प्रकार इण्टरमीडिएट का कुल परीक्षा परिणाम 58.70 फीसदी रहा। जिसमें बालकों का उत्तीर्ण प्रतिशत 61.54 तथा बालिकाओं का 55.00 फीसदी रहा।

     

     

  • मजबूत पैरवी से अंकिता हत्याकांड के सभी आरोपियों की जमानत याचिका फिर खारिज

    मजबूत पैरवी से अंकिता हत्याकांड के सभी आरोपियों की जमानत याचिका फिर खारिज

    मजबूत पैरवी के चलते दोषियों को नहीं मिली राहत, 

     अंतिम फैसले तक नहीं मिल सकी जमानत

    SIT जांच, 500 पन्नों की चार्जशीट और करीब 100 गवाहों के आधार पर हुई मजबूत पैरवी

    परिजनों की मांग पर तीन बार बदले गए सरकारी वकील, माता-पिता की मांग पर CBI जांच के भी दिए गए आदेश

    देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में आज एक बार फिर सभी आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी। प्रदेश सरकार की ओर से की गई मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते आरोपियों को कोई राहत नहीं मिल सकी। यह एक बार फिर स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटी अंकिता को न्याय दिलाने और दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा सुनिश्चित करने के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है।

    अंकिता हत्याकांड के दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने दो दिन चली लंबी सुनवाई के बाद तीनों अभियुक्तों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।

    अंकिता के दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना इस बात को पुख्ता करती है कि प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण में पहले दिन से लेकर न्यायालय के अंतिम फैसले तक अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी गंभीरता और मजबूती से कार्य किया।

    24 घण्टे मे जेल और 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट

    घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई।

    जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान सहित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार मजबूती से पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुईं और वे मुकदमे के दौरान सलाखों के पीछे रहे। मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप अंततः अंकिता के कातिलों को उम्रकैद की सजा मिली।

    3 बार बदले गए वकील और सीबीआई जांच के निर्देश

    प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया के दौरान अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिजनों की मांग के अनुरूप तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। इतना ही नहीं, अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए।

    सरकार ने परिवार को संबल प्रदान करने के लिए ₹25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के भाई और उनके पिता को नौकरी प्रदान कर परिवार के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा किया।

    इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाकर कठोरतम सजा दिलाई जाएगी। जांच को लेकर उठाए गए सवालों के बीच न्यायिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया और मजबूत अभियोजन के परिणामस्वरूप दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया।

    वहीं तथाकथित ‘VIP’ के नाम पर कांग्रेस और अन्य संगठन के लोगों द्वारा भी लगातार सवाल उठाकर माहौल गरमा दिया। यदि इस संबंध में किसी के पास कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य था, तो उसे जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए था। अदालत के बाहर राजनीतिक लाभ के लिए आरोप लगाना और जनता को भ्रमित करना न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि बेटी अंकिता से जुड़े अत्यंत संवेदनशील प्रकरण का राजनीतिक इस्तेमाल है। भाजपा विपक्ष पर यह आरोप लगाती रही है।

    मुख्यमंत्री  ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि बेटी अंकिता को न्याय दिलाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, मजबूत चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, आरोपियों को जमानत न मिलने देना, परिवार की मांग के अनुसार अभियोजन व्यवस्था में बदलाव, आर्थिक सहायता और रोजगार से लेकर माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश तक—सरकार ने हर स्तर पर संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ निर्णय लिए।

    अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में धामी सरकार केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कार्रवाई, मजबूत पैरवी और निर्णायक परिणाम के साथ परिवार के साथ खड़ी रही।

  • मुख्य सचिव ने दिये सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण के निर्देश

    मुख्य सचिव ने दिये सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक परीक्षण के निर्देश

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा को लेकर गठित अनुश्रवण समिति की बैठक

    मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के दिए निर्देश

     देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक ढंग से विश्लेषण किया जाए। उन्होंने सड़क की डिजाइन, रोड ज्योमेट्रिक्स तथा अन्य तकनीकी कमियों पर विशेष ध्यान दिए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर सड़क की स्थिति अथवा डिजाइन के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ रही है, वहां सम्बन्धित अधिकारियों से समन्वय कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव ने रोड सेफ्टी ऑडिट को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही। कहा कि बस अड्डों का भी टीम गठित कर नियमित ऑडिट कराया जाए। बात ही, ऑडिट में प्राप्त सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सुधारात्मक उपायों को लागू किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि मा. उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, उन्होंने दो पहिया वाहन चालकों एवं सवारियों के लिए हेलमेट के अनिवार्य उपयोग को प्रभावी रूप से सुनिश्चित करने तथा यातायात नियमों का पालन न करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिवहन एवं पुलिस विभाग को नियमित रूप से प्रवर्तन सम्बन्धी कार्रवाई की समीक्षा करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा की दृष्टि से बांस के वृक्षों तथा क्रैश बैरियर/पैराफिट आदि के सम्बन्ध में पूर्व में वन एवं लोक निर्माण विभाग को दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी ली, साथ ही अन्य राज्यों में अपनाई जा रही बेहतर सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें उत्तराखंड में लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने ब्लैक स्पॉट तथा दुर्घटना संभावित स्थलों का रोड सेफ्टी एवं थर्ड पार्टी ऑडिट कराने तथा ऑडिट के सुझावों के आधार पर सुधारात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने जनपद स्तरीय सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें निर्धारित समय पर नियमित रूप से आयोजित की जाने के निर्देश दिए। कहा कि प्रत्येक बैठक का कार्यवृत्त सम्बन्धित पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाए। उन्होंने सचिव परिवहन को सड़क सुरक्षा से संबंधित नियमित एवं रूटीन कार्यों की लगातार निगरानी करने तथा आवश्यकतानुसार सम्बन्धित विभागों से समन्वय करते हुए कार्रवाई सुनिश्चित कराये जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए सेंसिटाइजेशन कैंप आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद रेस्क्यू आदि कार्यों के सेंसिटाइज़ेशन के लिए पुलिस, स्वास्थ्य एवं परिवहन विभाग की संयुक्त वर्कशॉप आयोजित की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए प्रत्येक दो-तीन माह में अभियान मोड में व्यापक स्तर पर संचालित किया जाए। इसके लिए प्रचार-प्रसार का वार्षिक प्लान तैयार किया जाए।

    उन्होंने राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्हें परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि हिट एंड रन के लंबित मामलों की सूची सम्बन्धित जिलाधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अपने जनपद में लंबित मामलों की स्वयं भी समीक्षा कर शीघ्र से शीघ्र निस्तारित करें। मुख्य सचिव ने सड़क सुरक्षा जागरूकता फिल्मों का स्थानीय सिनेमाघरों में प्रदर्शन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता गतिविधियों के लिए विभागों द्वारा वर्षभर का समेकित प्रचार-प्रसार कैलेंडर तैयार किया जाए, ताकि अलग-अलग समय पर लक्षित समूहों के बीच सड़क सुरक्षा संबंधी संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके। मुख्य सचिव ने ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्यों में तेजी लाते हुए निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने शेष ब्लैक स्पॉट पर भी ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

    मुख्य सचिव ने शिक्षा विभाग एवं परिवहन विभाग के समन्वय से विद्यालयों में सड़क सुरक्षा क्लबों की स्थापना एवं उन्हें सक्रिय रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में विभागीय समन्वय, नियमित अनुश्रवण और एक्शन टेकन रिपोर्ट की नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केवल प्रवर्तन ही नहीं, बल्कि सड़क की इंजीनियरिंग, वाहन एवं चालक व्यवहार, जन-जागरूकता और त्वरित उपचारकृसभी पहलुओं पर एक साथ काम किया जाना आवश्यक है। इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं डॉ. रणवीर सिंह चौहान सहित तमाम अ​धिकारी मौजूद थे।

  • भारी बारिश से ढहा मकान, मासूम सहित तीन लोगों की दबकर मौत

    भारी बारिश से ढहा मकान, मासूम सहित तीन लोगों की दबकर मौत

    सतपुली। प्रदेश मे बारिश का कहर जारी है। मंगलवार को जनपद पौड़ी के सतपुली स्थित मेहर गांव में एक मकान ढह गया। हादसे मे मासूम सहित 3 लोगों की दबकर मौत हो गयी। रेस्क्यू टीम ने तीनो शव मलवे से बरामद किये हैं।

    घटना मंगलवार सुबह की है। बताया जाता है कि भूस्खलन के चलते मालवा मकान के उपर आ गया और मकान जमींदोज हो गया। उस समय घर मे 4 लोग थे और सभी मलवे मे दब गए। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचकर SDRF टीम ने जिला पुलिस, तहसील प्रशासन एवं स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए सघन राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

    SDRF जवानों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मलबे को व्यवस्थित तरीके से हटाते हुए संभावित स्थानों पर लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। अभियान के दौरान मलबे में दबे तीनों व्यक्तियों के शव एक-एक कर बरामद कर लिए गए वहीं महिला को बचा लिया गया। और हंस फाउंडेशन सतपुली मे उसका उपचार चल रहा है।

    इसके पश्चात SDRF टीम द्वारा घटनास्थल के सभी संभावित स्थानों की गहन जांच एवं सर्चिंग की गई। किसी अन्य व्यक्ति के मलबे में दबे होने की संभावना न रहने पर रेस्क्यू अभियान समाप्त किया गया।

    मृतकों का विवरण

    1. मथुरा देवी, उम्र 80 वर्ष, पत्नी स्वर्गीय प्रताप सिंह, निवासी मेहर गांव।
    2. धीरेंद्र सिंह, उम्र 44 वर्ष, पुत्र स्वर्गीय प्रताप सिंह
    3. 5 वर्षीय बालक रुद्राक्ष

  • युवा आयोग सर्वांगीण विकास का एक मंच, राजनीति से बाज आये कांग्रेस: चौहान

    युवा आयोग सर्वांगीण विकास का एक मंच, राजनीति से बाज आये कांग्रेस: चौहान

    पहाड़ मे उधोग लगाने की योजना से पलायन से निपटना सरकार की मंशा

    अंकिता हत्याकांड पर बार बार मुँह की खा चुकी है कांग्रेस

    देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि राज्य मे युवा आयोग का गठन युवाओं के सर्वांगीण विकास का एक मंच है और कांग्रेस युवाओं के मुद्दे पर राजनीति से बाज आये।

    कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए चौहान ने कहा कि आयोग युवाओं की शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़ी समस्याओं और सुझावों को सरकार तक पहुंचाने का एक स्थायी मंच होगा। सरकार ने युवाओं के भविष्य और प्रदेश के समग्र विकास को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है। यह आयोग युवाओं की समस्याओं, सुझावों और प्राथमिकताओं को सरकार तक पहुंचाने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा और क्षमता को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगा। पहली बार युवाओं की आवाज को संस्थागत मंच देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

    चौहान ने कहा कि भाजपा की सोच स्पष्ट है कि पलायन का समाधान पहाड़ों में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करके किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से पौड़ी, चमोली और अल्मोड़ा में तीन नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के अवसरों में प्राथमिकता मिलेगी, जिससे पहाड़ों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने के साथ युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ के तहत सरकारी स्कूलों की 11वीं और 12वीं कक्षा के 10 हजार मेधावी छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए ₹7 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी बेहतर तैयारी और बड़े सपनों को साकार करने का अवसर मिलेगा। युवाओं को केवल नौकरी के अवसरों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। 18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के तहत IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण तथा नया उद्यम शुरू करने के लिए बैंक ऋण पर 30 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। यानी प्रशिक्षण से लेकर कारोबार शुरू करने तक सरकार युवाओं के साथ खड़ी है।

    उन्होंने कहा कि आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं कि धामी सरकार मे 50 हजार के लगभग सरकारी नौकरी और लाखों युवा और आम जन स्वरोजगार की योजनाओं से लाभांवित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को देखते हुए कड़ा नकल कानून बना तो युवाओं की मांग पर सरकार ने भर्ती घोटालों की कड़ी जांच कर आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा।

    चौहान ने कहा कि पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी जैसी संवेदनशील घटना को राजनीतिक आरोपों का माध्यम बनाना कांग्रेस की अवसरवादी राजनीति को दर्शाता है। कांग्रेस को भावनात्मक बयानबाजी के बजाय यह बताना चाहिए कि मामले में अब तक हुई कानूनी और न्यायिक कार्रवाई के बाद वह नया क्या करना चाहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी शुरुआत से ही अंकिता के परिवार के साथ खड़े रहे और उनकी मांगों को गंभीरता से लिया। जब परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की, तो राज्य सरकार ने उसे नजरअंदाज नहीं किया, बल्कि सीबीआई जांच की सिफारिश कर परिवार की चिंता को जांच के दायरे में लाने का निर्णय लिया। यह सरकार की संवेदनशीलता और पारदर्शिता का प्रमाण है।

    उन्होंने कहा युवाओं पर राजनीति कर कांग्रेस को कुछ हासिल नही होने वाला है। वहीं अंकिता प्रकरण पर अवसरवादी राजनीति कर वह मुँह की खा चुकी है। कांग्रेस आरोप और दुष्प्रचार के जरिये सत्ता का जो ख्वाब बुन रही है वह साकार नही होने वाला है।

     

     

  • युवा और पलायन आयोग पर कांग्रेस ने उठाये सवाल, कहा घबराहट मे है सरकार

    युवा और पलायन आयोग पर कांग्रेस ने उठाये सवाल, कहा घबराहट मे है सरकार

    अंकिता भंडारी को साढ़े तीन साल बाद भी न्याय नहींयुवा आयोग बनाकर डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा

    देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं संगठनात्मक बदलावों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पौड़ी गढ़वाल के छोटे से गांव की 19 वर्षीय बेटी दिवंगत अंकिता भंडारी को आज साढ़े तीन वर्ष बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है। अंकिता के माता-पिता लंबे समय से अपनी बेटी के न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा अंकिता भंडारी के माता-पिता से अपने आवास पर मुलाकात के बाद भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटाया जाना राहुल गांधी के प्रभाव को बताता है। 

    गोदियाल ने उत्तराखंड में युवा आयोग के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस भाजपा सरकार ने वर्षों तक युवाओं के सवालों पर चुप्पी साधे रखी, उसी सरकार को अब युवाओं का आक्रोश दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि देहरादून के घंटाघर में अपने अधिकारों और रोजगार के लिए आवाज उठा रहे युवाओं पर लाठीचार्ज, पथराव और गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज करने वाली सरकार आज युवाओं के आक्रोश से घबराकर आयोग गठित कर रही है। यह युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि महज डैमेज कंट्रोल की कोशिश है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को पहले उन युवाओं से माफी मांगनी चाहिए, जिन पर अपने हक और रोजगार के लिए आवाज उठाने पर लाठियां बरसाई गईं और मुकदमे दर्ज किए गए।

    पहले पलायन आयोग का क्या हुआ?

    गोदियाल ने कहा कि भाजपा सरकार आयोग बनाने में तो बहुत विश्वास रखती है, लेकिन पुराने आयोगों का क्या हुआ, इसका जवाब देने को तैयार नहीं है।

    उन्होंने सवाल किया कि पलायन की समस्या के समाधान के लिए गठित पलायन आयोग का मुख्यालय पौड़ी गढ़वाल में निर्धारित किया गया था, लेकिन बाद में आयोग ही पहाड़ से पलायन कर देहरादून आ गया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कहीं युवा आयोग का गठन भी इसी उद्देश्य से तो नहीं किया गया कि भविष्य में किसी अपने व्यक्ति को दायित्व या लालबत्ती से नवाजा जा सके? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो आयोग बनाने से पहले रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, नकल माफिया पर कार्रवाई, लंबित भर्तियों और बेरोजगार युवाओं पर दर्ज मुकदमों पर ठोस कार्रवाई करे।

    गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड का युवा अब घोषणाओं और आयोगों से नहीं, रोजगार, पारदर्शी भर्ती और सम्मानजनक व्यवहार से जवाब चाहता है। भाजपा सरकार को समझ लेना चाहिए कि युवाओं के आक्रोश को किसी आयोग के गठन से दबाया नहीं जा सकता। अब उत्तराखंड का युवा सरकार से हिसाब मांग रहा है और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब भी देगा।

  • रिश्वत लेते युवा कल्याण अधिकारी को विजिलेंस ने किया गिरफ्तार

    हरिद्वार। विजिलेंस ने मंगलवार को दो रिश्वतखोर अधिकारियों को रंगे हाथ दबोच कर गिरफ्तार कर लिया। पहले कृषि यंत्र सब्सिडी की फाइल आगे बढाने मे रिश्वत की मांग कर रहे सहायक कृषि अधिकारी को रंगे हाथ दबोचा गया और उसके बाद फूलों की खेती के लिए लगी फाइल को आगे बढाने के एवज मे रिश्वत की मांग कर रहा ब्लॉक के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी विजिलेंस के हत्थे चढ़ गया।

    युवा मंगल कल्याण दल के प्रमुख एक व्यक्ति ने फूलों की खेती के लिए मिलने वाली सरकारी अनुदान राशि की फाइल आगे बढ़ाने की एवज में नारसन ब्लॉक के क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी कुलदीप कुमार ने उनसे 35 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की शिकायत की थी।

    शिकायत के परीक्षण के बाद विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और लक्सर के रहने वाले कुलदीप कुमार को 35,000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

     

  • जिला एवं बड़े उपजिला अस्पताल 31 मार्च तक कराएं एनएबीएच प्रत्यायन, सीएस ने दिए निर्देश

    जिला एवं बड़े उपजिला अस्पताल 31 मार्च तक कराएं एनएबीएच प्रत्यायन, सीएस ने दिए निर्देश

    देहरादून। मुख्य सचिव आनंदबर्धन ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की समीक्षा बैठक मे स्वास्थ्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रदेश के सभी चिकित्सालयों को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) से प्रत्यायन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों एवं बड़े उप जिला अस्पतालों का 31 मार्च तक एनएबीएच प्रत्यायन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पतालों को निर्धारित मानकों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एनएबीएच के माध्यम से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी की जा सकती है।

    स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण एवं ई-हॉस्पिटल पर जोर

    मुख्य सचिव ने प्रदेश के अस्पतालों को डिजिटाइज करते हुए ई-हॉस्पिटल की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने एकीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणाली को प्रदेश में तत्काल लागू करने को कहा। उन्होंने प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग तथा वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

    रिक्त चिकित्सकीय पदों को शीघ्र भरने पर दिया जोर

    मुख्य सचिव ने चिकित्सकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के साथ ही गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे चिकित्सक जो सेवानिवृत्ति के बाद भी सेवाएं देने के इच्छुक हों, उनके संबंध में सेवानिवृत्ति से पूर्व ही आवश्यक औपचारिकताएं एवं पेपर वर्क पूरा किया जाए, ताकि पद रिक्त होने की स्थिति में उन्हें उनकी इच्छानुसार स्थान पर सेवाएं देने का अवसर दिया जा सके। इसके साथ ही निजी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को विजिटिंग डॉक्टर के रूप में जोड़ने की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा।

    डायलिसिस सुविधा 24×7 एवं किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शीघ्र शुरू करने के निर्देश

    मुख्य सचिव ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वर्तमान में संचालित डायलिसिस सुविधा को 24×7 संचालित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा भी शीघ्र शुरू करने को कहा। बैठक में बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार कर लिया गया है तथा विशेषज्ञ की व्यवस्था भी कर ली गई है। इस पर मुख्य सचिव ने अगले तीन माह के भीतर किडनी ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए।

    जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश

    मुख्य सचिव ने आमजन को जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र सहजता से उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए माता-पिता को अस्पताल, नगर निगम अथवा अन्य कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसके माध्यम से माता-पिता को जन्म प्रमाण पत्र स्वतः उपलब्ध हो सके। इसी प्रकार मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए भी मृतक के परिजनों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। उन्होंने प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को चिह्नित कर उनका तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिक से अधिक जनसेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लाए जाने पर भी जोर दिया।

    मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी एवं सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश

    मुख्य सचिव ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के वार्डों की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास करने को कहा।

    उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में इवनिंग ओपीडी शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।

    बैठक में सचिव विनय शंकर पाण्डेय, सीईओ स्टेट हेल्थ अथॉरिटी श्रीमती रीना जोशी, अपर सचिव रोहित मीणा, सौरभ गहरवार एवं महानिदेशक स्वास्थ्य श्रीमती सुनीता टम्टा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।