युवा और पलायन आयोग पर कांग्रेस ने उठाये सवाल, कहा घबराहट मे है सरकार

अंकिता भंडारी को साढ़े तीन साल बाद भी न्याय नहींयुवा आयोग बनाकर डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा

देहरादून। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं संगठनात्मक बदलावों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पौड़ी गढ़वाल के छोटे से गांव की 19 वर्षीय बेटी दिवंगत अंकिता भंडारी को आज साढ़े तीन वर्ष बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है। अंकिता के माता-पिता लंबे समय से अपनी बेटी के न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा अंकिता भंडारी के माता-पिता से अपने आवास पर मुलाकात के बाद भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटाया जाना राहुल गांधी के प्रभाव को बताता है। 

गोदियाल ने उत्तराखंड में युवा आयोग के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस भाजपा सरकार ने वर्षों तक युवाओं के सवालों पर चुप्पी साधे रखी, उसी सरकार को अब युवाओं का आक्रोश दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि देहरादून के घंटाघर में अपने अधिकारों और रोजगार के लिए आवाज उठा रहे युवाओं पर लाठीचार्ज, पथराव और गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज करने वाली सरकार आज युवाओं के आक्रोश से घबराकर आयोग गठित कर रही है। यह युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि महज डैमेज कंट्रोल की कोशिश है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को पहले उन युवाओं से माफी मांगनी चाहिए, जिन पर अपने हक और रोजगार के लिए आवाज उठाने पर लाठियां बरसाई गईं और मुकदमे दर्ज किए गए।

पहले पलायन आयोग का क्या हुआ?

गोदियाल ने कहा कि भाजपा सरकार आयोग बनाने में तो बहुत विश्वास रखती है, लेकिन पुराने आयोगों का क्या हुआ, इसका जवाब देने को तैयार नहीं है।

उन्होंने सवाल किया कि पलायन की समस्या के समाधान के लिए गठित पलायन आयोग का मुख्यालय पौड़ी गढ़वाल में निर्धारित किया गया था, लेकिन बाद में आयोग ही पहाड़ से पलायन कर देहरादून आ गया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि कहीं युवा आयोग का गठन भी इसी उद्देश्य से तो नहीं किया गया कि भविष्य में किसी अपने व्यक्ति को दायित्व या लालबत्ती से नवाजा जा सके? प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो आयोग बनाने से पहले रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, नकल माफिया पर कार्रवाई, लंबित भर्तियों और बेरोजगार युवाओं पर दर्ज मुकदमों पर ठोस कार्रवाई करे।

गोदियाल ने कहा कि उत्तराखंड का युवा अब घोषणाओं और आयोगों से नहीं, रोजगार, पारदर्शी भर्ती और सम्मानजनक व्यवहार से जवाब चाहता है। भाजपा सरकार को समझ लेना चाहिए कि युवाओं के आक्रोश को किसी आयोग के गठन से दबाया नहीं जा सकता। अब उत्तराखंड का युवा सरकार से हिसाब मांग रहा है और आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब भी देगा।

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