विचार के प्रचार का स्थायी और सस्ता माध्यम है पुस्तके:डॉ संजय

देहरादून।  संजय आर्थोपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर एवं सेवा सोसाइटी के तत्वावधान में विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर आयोजित व्याख्यान में पद्मश्री डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था जिस तरह पौधे को पानी की जरूरत पड़ती है उसी तरह एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत पड़ती है वरना दोनों मर जाते हैं। पुस्तकें किसी भी विचार के प्रचार-प्रसार का अच्छा, सस्ता और स्थायी माध्यम हैं।हजारों साल पहले सिखाने का अधिकार गुरू का था। जिससे ज्ञान का प्रचार और प्रसार सीमित था। पुस्तकें किसी भी विचार के प्रचार-प्रसार का अच्छा, सस्ता और स्थायी माध्यम हैं। लेखक लिखने के बाद मर जाते हैं पर पुस्तकें अमर रहती हैं जैसे हमारे ग्रंथ रामायण, महाभारत, कुरान, बाइबल, गुरु ग्रंथ साहब, आगाम और पिटिक इत्यादि। जब हम कोई पुस्तक पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है मेरा लेखक से सीधा साक्षात्कार हो रहा है और यही भावना उसमें लेखकों की लेखन के साथ अमर बनाती हैं।

पुस्तकें ऐसी दोस्त हैं कि जब भी आप उनका साथ चाहते हो वह आपके साथ हो जाती हैं और अपने पूरे कर्तव्य और जिम्मेदारी निभाती हैं। उनके लिए समय और परिस्थितियों की बाधता नहीं होती है जैसे कि व्यक्तियों के साथ होती है। पुस्तकें दोस्त ही नहीं, हम सबके जीवन में शिक्षकों, गुरुओं या फिर मार्गदर्शकों का कार्य करती हैं। बचपन से ही जिन बच्चों को किताब पढ़ने की आदत होती है वही बच्चे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रगति करते हैं और उन्नति करते हैं क्योंकि उनको बनाने में उनकी पुस्तकों और शिक्षकों का ही योगदान होता है। जब पुस्तक दिवस मनाने का आप एक आदत डाल लेंगे तो यह आदत आपमें ही नहीं आपके आने वाली पीढ़ियों में भी आ जाएगी। मेरी तो इच्छा है कि यह दिवस अपने देश में दीवाली और ईद की तरह मनाया जाना चाहिए।

इससे पहले मुख्य अतिथि  सुनील उनियाल गामा महापौर, नगर निगम, देहरादून के द्वारा अन्य अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सभी अतिथिगणों ने पुस्तकों के महत्व के ऊपर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन के दौरान सभी नागरिकों से अपील की कि शहर को स्वच्छ और हरा-भरा रखने के लिए यह एक संयुक्त प्रयास होना चाहिए ताकि हम शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार कर सकें। डॉ. सुधा रानी पांडेय पूर्व कुलपति ने आयोजक व अतिथियों को सुझाव दिया कि युवा पीढ़ी के हित के लिए भविष्य में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जाए।

कार्यक्रम में अति विशिष्ठ अतिथि पद्मश्री से सम्मानित डॉ. माधुरी बर्थवाल, प्रो. जे. पी. पचौरी कुलपति, विशिष्ठ अतिथि श्री असीम शुक्ला,  पारितोष किमोथी, अतिथि वक्ता डॉ. राम विनय सिंह, जसवीर सिंह हलधर, श्रीमती डौली डबराल, श्री शादाब अली, श्री विश्वम्बर नाथ बजाज, श्रीमती सविता मोहन, श्री भगीरथ शर्मा, डॉ. सुजाता संजय, डॉ. गौरव संजय, एवं कार्यक्रम की अध्यक्षा डॉ. सुधा रानी तथा आर्युवेद कॉलेज के छात्र मौजूद रहे।

 

 

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