भाजपा की चुनावी हैट्रिक से एसआईआर पर कांग्रेसी झूठ का गुब्बारा फटना तय
देहरादून। भाजपा ने कहा कि एसआईआर पर झूठी शिकायतों का हो हल्ला मचाकर, ड्रामेबाजी से भ्रम फैलाने में जुटी है। बिहार, आसाम, बंगाल में एसआईआर का विषय विपक्ष ने चुनाव पूर्व उठाया था, लेकिन जनादेश देखकर वहां ये मुद्दा हवा हो गया है। ठीक ऐसा ही उत्तराखंड में भी भाजपा की चुनावी हैट्रिक के साथ ही झूठ और भ्रम की इस कांग्रेसी पटकथा का पटाक्षेप होगा। भाजपा का मत स्पष्ट है कि उत्तराखंड का मतदाता ही अपनी सरकार का चुनाव करेगा।
पार्टी मुख्यालय में कांग्रेस के आरोपों के जवाब में मीडिया को ब्रीफ करते हुए प्रदेश महामंत्री एवं एसआईआर विषय को लेकर प्रदेश प्रभारी तरुण बंसल ने कहा कि यह संवैधानिक प्रक्रिया कोई पहली बार उत्तराखंड में नहीं हो रही है। ये बात और है कि पूर्व में हमेशा से यह कांग्रेस के शासनकाल में ही हुई है, शायद गड़बड़ी करने को लेकर इनके अनुभव रहे होंगे। उसी आधार पर उन्हें इस पारदर्शी प्रक्रिया पर भी शंका हो रही है। जबकि भाजपा सरकार में प्रथम बार SIR किया जा रहा है और यह संवैधानिक प्रक्रिया पूरे तय प्रोटोकॉल के साथ की जा रही है। इसकी एक निर्धारित नियमावली है, पहले प्री-SIR हुआ, जिनकी मैपिंग होनी थी उनकी मैपिंग हुई, जो अनमैप्ड रह गए वे अनमैप्ड रह गए। उसके बाद अब जिनकी मैपिंग हो गई, उनके बाद भी उनके नोटिस आए हैं। अब नोटिस यह देख के तो नहीं आए हैं कि यह किसका है, यह किसका नहीं है, किसी पार्टी या खास वर्ग का है। एक-एक विधानसभा में 30, 40 हजार तक नोटिस आए हैं, असंगति या मानवीय त्रुटियों के चलते।
उन्होंने प्रश्न किया कि क्या कांग्रेस चाहती है, एक व्यक्ति के वोट दो जगह रहें या कोई इस दुनिया में नहीं हो उसका नाम न हटे या किसी ने गलत जानकारी से वोट बनाया हो वो सरकार का चयन करे? फिर भी कांग्रेस को किसी आपत्ति पर भी आपत्ति हो तो इसके लिए इतने हो हल्ले की जरूरत नहीं है। यदि किसी को लेकर गलत आपत्ति होगी तो चुनाव आयोग उसे परखेगा और फिर भी शंका हो तो संबंधित कागजात जमा करने की प्रक्रिया है। जिनके पास नोटिस आए हैं उनके समाधान निश्चित रूप से होंगे होगा। और लोग अपने-अपने स्तर पर BLA-2 के माध्यम से, BLO के माध्यम से उन्हें दुरुस्त करवा सकते हैं।
उन्होंने मीडिया द्वारा बड़ी संख्या में वोटर के नाम हटने पर पूछे सवाल के जवाब में कहा कि ये 8 लाख 33 हजार की संख्या नाम कटने वालों की नहीं, बल्कि उन लोगों की है जो मैप नहीं हो पाए हैं। जिसमें कुछ दिवंगत हो गए, कुछ शिफ्ट हो गए, कुछ के दो जगह नाम होने से एसआईआर वाले राज्यों में पहले जुडऩे के बाद राज्य में कट गया। एसआईआर वोट सूची शुद्धिकरण की संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें सभी पात्र लोगों का मताधिकार मिलेगा। जिसको लेकर फार्म 6 की भूमिका अंतिम समय तक चलने वाली है।
उन्होंने विपक्ष के इस आरोप कि कांग्रेस के मजबूत बूथों पर ही एसआईआर के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं को बेबुनियाद और अनर्गल बताया। कांग्रेस को अपने सांगठनिक ढांचे को देखना चाहिए, जबकि भाजपा के शानदार व्यवस्था है पार्टी संगठन की, बूथ पन्ना स्तर की इकाई है। हमारे बूथ स्तर के कार्यकर्ता संकल्पबद्ध है कि एक भी पात्र मतदाता छूटना नहीं चाहिए।