दिल्ली। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास क्षेत्र को अब आधिकारिक रूप से ‘कर्तव्य भवन क्षेत्र’ या ‘कर्तव्य भवन परिसर’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में ‘सेंट्रल विस्टा’ नाम का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान को स्वीकार किया जाए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि सभी सरकारी दस्तावेजों और संवाद में अब ‘कर्तव्य भवन क्षेत्र’ या ‘कर्तव्य भवन परिसर’ का ही उल्लेख करें। मंत्री ने कहा कि अब तक लोग बार-बार इसे सेंट्रल विस्टा कहते रहे हैं, लेकिन अब इसका नाम बदल दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे क्षेत्र में स्थित सभी कर्तव्य भवन, कर्तव्य पथ तथा भविष्य में बनने वाली सरकारी इमारतें कर्तव्य भवन क्षेत्र का हिस्सा होंगी। सरकार सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत मंत्रालयों को एक ही परिसर में लाने की दिशा में काम कर रही है।
इस योजना के अंतर्गत साझा केंद्रीय सचिवालय के रूप में कुल 10 आधुनिक इमारतों का निर्माण किया जाना है। इनमें से तीन इमारतों का निर्माण पहले ही पूरा किया जा चुका है। परियोजना का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एकीकृत परिसर में स्थापित कर प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और सुगम बनाना है। इससे सरकारी कामकाज में बेहतर समन्वय और संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक जाने वाले लगभग दो किलोमीटर लंबे राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ कर दिया था। इसके बाद इस मार्ग के किनारे बने नए सरकारी कार्यालयों को ‘कर्तव्य भवन’ नाम दिया गया। अब उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए पूरे सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास क्षेत्र का नाम ‘कर्तव्य भवन क्षेत्र’ रखने की घोषणा की गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में कर्तव्य और उत्तरदायित्व की भावना को प्रमुखता देने का प्रतीक भी है। मंत्री ने कहा कि भविष्य में इस क्षेत्र का उल्लेख केवल नए नाम से ही किया जाना चाहिए।