45 साल से खनन कारोबार मे जुटे व्यवसायी परेशान, सर्वाधिक राजस्व देने वाला जिला है बागेश्वर
बागेश्वर (गोविंद मेहता) रूस यूक्रेन युद्ध की मार अब सफेद सोना खाड़िया उद्योग पर भी पड़ी है। दामों मे गिरावट के कारण मंदी झेल रहे उद्योग को घाटे से उबारने के लिए कारोबारियों ने सीएम से गुहार लगाई है।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व कांग्रेस नेता हरीश ऐठानी ने मुख्यमंत्री से जिले की घाटे में चल रही खड़िया उद्योग को पुनः घाटे के बजाय मुनाफे में लाने का प्रयास करने की मांग की है। बागेश्वर जिला खनन से सबसे अधिक राजस्व प्राप्त करने वाला जिला है। उन्होंने कहा कि 45 साल से लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।खड़िया खनन से प्रतिवर्ष हजारों लोगों को रोजगार मिलता है,वही खनन राजस्व से जिले की आर्थिक व्यवस्था मजबूत हुई है, लेकिन रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद खड़िया कारोबार पर खड़िया के अंतराष्ट्रीय दामों में गिरावट आने से खड़िया खनन प्रभावित हुआ है। उन्होंने खड़िया कारोबारियों के कारोबार को पुनः गति दिलाने के लिए स्थानीय स्तर पर स्थानियों को रोजगार दिलाने के लिए प्रदेश सरकार से विशेष प्रयास करने की अपील की।
एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने खड़िया खनन कारोबार को उभारने के लिए लोगों के हितकारक बनाने की मांग रखी है। ऐठानी ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड में उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार पहल कर रही है, लेकिन गांव-गांव के लोगों को रोजगार देने वाले खड़िया उद्योग घाटे में चल रहा है। जिले को खड़िया खदान का हब कहा जाता है, जिले में खड़िया खनन से बाहरी प्रदेशो के खड़िया व्यवसाई भी यहाँ खनन कार्य कर जिले के राजस्व में वृद्धि करते हैं। ऐसे में जिले की 138 खड़िया खानों में इसका सीधा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। जो स्थानीय स्तर पर वृहद रोजगार का प्रमुख साधन है।
इस उद्योग से स्थानीय मजदूर, भू-स्वामी, भवन स्वामी, स्थानीय ट्रासंपोर्ट,व्यवसाइयों, को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है, साथ ही उनकी आर्थिकी भी मजबूत होती हैं। इसके अलावा बाहर से भी लोग अपना रोजगार करने यहां आते हैं। लगभग 1300 हेक्टेयर भू-भाग पर खड़िया खनन किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में 320000 टन उत्पादन हुआ। 2021-22 में तीन लाख 38 हजार, जबकि 23-24 में चार लाख, 80 हजार खनिज उत्पादन हुआ।वही खड़िया खनन से निकलने वाली खड़िया को मशीनों द्वारा जिले में ही पिसाई के लिए उद्योग लगाए जाने से भी अधिकांश लोगों को रोजगार मिलने की बात कही। यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खड़िया के गिरते भाव से इसका असर खनन कारोबार पर भी पड़ने लगा है। बड़े बाजार में खड़िया की मांग घटने, दाम पर असर पड़ने से खड़िया बाजार के शेयर गिरने लगे है। उन्होंने कहा कि 45 साल से राज्य को राजस्व देने में खड़िया उद्योग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।जिले में खनन कार्य शुरू हो गया है पर अभी तक अधिकांश खदानों में कार्य शुरू नही हो पाया है, अन्य सालों में एक अक्टूबर से कारोबार शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार नवंबर शुरू हो गया है, कारोबार शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने प्रदेश सरकार से खड़िया खनन के शुरू नही होने के वास्तविक कारणों की जांच कर खनन व्यवसाय को पुनः पटरी पर लाने के लिए विशेष प्रयास करने,और खड़िया कारोबार से पुनः लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। इस दौरान जिपं सदस्य सुरेंद्र खेतवाल आदि मौजूद रहे।