बाघ की दहशत से गाँवों मे सन्नाटा, खूंटे से बंधे हैं मवेशी

देहरादून/रिखणीखाल। पौड़ी जिले के रिखणीखाल ब्लॉक मे सक्रिय बाघो की दहशत इस कदर है कि गाँवों मे सन्नाटा पसरा है और पशु भूखे खूंटे से बंधे है। डला गाँव मे राज मिस्त्री की को निवाला बनाने के बाद बाघ ने नैनीडाँडा के सिमली मे रिटायर्ड शिक्षक को निवाला बना दिया। हालात यह है कि जिन गाँवों मे बाघ ने बारदात को अंजाम दिया वह अभी भी गाँवों के आसपास मंडरा रहे है।

हालांकि इस दौरान बाघ पालतू मवेशियों को भी निवाला बना रहा है। बाघ ने रिखणीखाल के निकट भंगल्वाण मे एक दुधारू गाय को दिन दहाड़े निवाला बनाया तो आज ग्राम पंचायत नावेतल्ली के गाँव में लोगों की मौजूदगी मे बाघ ने बकरी को निवाला बनाया। बाघ हमले के दौरान डर नही रहे हैं और किसी शोर शराबे का उस पर असर नही हो रहा है।

ग्राम पंचायत नावेतल्ली के प्रधान महिपाल सिंह रावत ने जानकारी बताया कि कल दिन में एक छोटे से गांव टान्डियू में बाघ ने बकरी चुगाते समय पंकज सिंह पुत्र त्रिलोक सिंह रावत की बकरियों के झुंड पर धावा बोल दिया,तथा एक बड़ी बकरी को अपने जबड़े में दबा लिया। पंकज सिंह बकरी छुड़वाने बाघ की तरफ भागा तो वह आक्रामक हो गया। शोरगुल के बीच बड़ी मुश्किल से बकरी का मृत शव खींचा। पंकज बाल बाल बाघ के हमले से बचा।गांव के लोग अपने पालतू पशुओं को बाहर चुगाने से घबरा रहे हैं। अब पशुओं की बिना घास व चुगान से भूखे मरने की स्थिति आ गई है। पशु खूँटे पर बंधे बंधे रह रहे हैं।

ग्राम द्वारी के वन पंचायत सरपंच विनोद मैन्दोला का कहना है कि पूरे ग्राम पंचायत के गांव घने जंगलों के बीच में स्थित हैं।  ग्राम पंचायत में खेतों में व रास्तों पर कंटीली झाड़ियां उगी हुई है। जिनमें जानवर दिन रात छुपे रहकर घात लगाये बैठे रहते हैं।इन गाँवो में सिर्फ दो दो सोलर पावर लाइट लगे हुए हैं जो कि नाकाफी है। रात में गांव के चारों तरफ अंधेरा पसरा रहता है।लोग भी घरों के आगे लाइट खुला नहीं रखते। आजकल रात में भी बिजली कटौती हो रही है। गांवों में रात्रि में रोशनी के लिए अतिरिक्त सोलर पावर लाइट की आवश्यकता महसूस की जा रही है। महिलाओ,वृद्ध बच्चो को रात में मूत्र त्याग करने बाहर आने में बिना रोशनी के परेशानी है,कभी भी कोई अनहोनी की आशंका है।

लोग कुछ देर समूह मे पशुओं को चुगाने ले जा रहे थे, लेकिन बाघ के मूवमेंट से उन्होंने पशुओं को भी खूंटे से बांध दिया। वन विभाग ने पिंजरे और घटना स्थल के आसपास कर्मियों की तैनाती तो की है, लेकिन कहीं भी बाघ पिंजरे के आसपास नही दिख रहा है। शाम हो या सुबह गाँवों मे कर्फ्यू का माहौल है। दर्जनों गाँव हैं जहाँ लोग बाघ के मूवमेंट पर नजर रख रहे है तो साथ ही खुद और मवेशियों को लेकर परेशान हैं।

 

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