देहरादून। वर्ष 2003 मे राज्य की राजनीति मे भू चाल लाने वाले जैनी प्रकरण की शनिवार को राजधानी मे गूंज सुनाई दी।
असम की युवती इंदिरा देवड़ी उर्फ जैनी ने उसके मामले मे दोबारा अपने बेटे का डीएनए टेस्ट और सीबीआई जांच की मांग की है। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि वह पहले भी आना चाहती थीं, लेकिन डर के कारण नहीं आ सकीं। लेकिन जब मुख्यमंत्री ने उनका नाम लिया, तब उन्हें हिम्मत मिली।
जैनी ने कहा कि वह अपनी बात रखने के लिए देहरादून आई है और इसके बाद असम वापस लौट जायेगी। लेकिन जब तक मेरे बेटे को इंसाफ नहीं मिलता है, तब तक मैं उत्तराखंड आती रहूंगी।
उन्होंने सीएम धामी से मांग की कि जिस तरह से अंकिता भंडारी को उन्होंने न्याय दिलाया, इस तरह से मुझे भी न्याय दिलाएं, क्योंकि सीएम धामी के भरोसे पर ही मैं उत्तराखंड आई हूं। प्रकरण के दौरान उसे सख्त हिदायत दी गई थी कि उत्तराखंड में कदम न रखे।
जैनी ने कहा कि साल 2003 में वह मात्र 16 साल की थी। उस दौरान तत्कालीन कांग्रेस के मंत्री हरक सिंह रावत ने उसका रेप किया था और उसे पागल खाने में भी रखा गया था। यही नहीं, जब मैं गर्भवती थी, उस दौरान भी मुझे काफी अधिक टॉर्चर किया गया। तत्कालीन कैबिनेट मंत्री के यहां पर करीब डेढ़ महीने रही थी। मैंने हरक सिंह रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया तो उस दौरान भी मेरे साथ हरक सिंह ने जबरदस्ती की थी। हालांकि, उस दौरान सीबीआई जांच हुई थी, लेकिन वो जांच मुझे समझ नहीं आयी, क्योंकि मेरे पास एक कागज लाया गया, जिस पर सिर्फ साइन कराया गया। उसके बाद सीबीआई की कोई भी टीम ने मुझसे मुलाकात नहीं की।
जैनी ने कहा कि अब उसका बेटा 23 साल का हो गया है और वह अपने पिता के बारे मे पूछता है। वह बच्चे के लिए पिता का नाम चाहती है। इसके लिए उन्होंने केश की जांच दोबारा शुरू करने की मांग की है।