देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही विद्युत वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने और दूरस्थ गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 19 वाइब्रेंट गांवों को ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकृत किया जा रहा है। इस परियोजना की स्वीकृत लागत 12.89 करोड़ रुपये है।
निगम के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने शनिवार को ऊर्जा भवन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उपभोक्ता हित, बेहतर विद्युत सेवाएं और कार्मिक कल्याण निगम की प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्मार्ट मीटर, रूफटॉप सोलर और विद्युत वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण पर जोर दिया जा रहा है।
उन्हाेंनेे बताया कि पुराने मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलने के लिए उपभोक्ताओं से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। स्मार्ट एवं प्रीपेड मीटर का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को निर्धारित छूट का लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर से उपभोक्ताओं को बिजली खपत और भुगतान की जानकारी अधिक सुविधाजनक एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने बताया कि संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इससे उपभोक्ताओं को बिजली खपत और भुगतान की जानकारी अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक तरीके से मिल सकेगी तथा वे अपनी खपत पर बेहतर निगरानी रख सकेंगे।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब तक एक लाख से अधिक उपभोक्ताओं के घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इससे उपभोक्ताओं को स्वच्छ ऊर्जा के साथ बिजली बिल में राहत मिल रही है और कई परिवारों का बिल शून्य तक हुआ है।
ध्यानी ने कहा कि आरडीएसएस के तहत बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने के कार्य किए जा रहे हैं। यूपीसीएल के सभी 12 मंडलों में बिजली हानि कम करने और प्रणाली सुदृढ़ीकरण के 60 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरे हो चुके हैं। इन कार्यों को नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। योजना की स्वीकृत लागत 1,262.38 करोड़ रुपये है और अब तक 656.60 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रगति हुई है।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के अंतर्गत बुक्सा और वनराजी जनजातियों के 669 चिन्हित संयोजन जारी किए जा चुके हैं। वहीं, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 169 लाभार्थियों को विद्युत संयोजन देकर कार्य पूरा कर लिया गया है।
रीवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने के लिए यूपीसीएल 19 वाइब्रेंट गांवों को ग्रिड के माध्यम से विद्युतीकृत कर रहा है। इसके अलावा आरडीएसएस के तहत 43 दूरस्थ सीमावर्ती चौकियों को ग्रिड से जोड़ने का काम जारी है। इस परियोजना की स्वीकृत लागत 327.51 करोड़ रुपये है और 45.19 करोड़ रुपये की वित्तीय प्रगति हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य केवल विद्युत ढांचे का विस्तार करना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, निर्बाध और पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराना है। कर्मचारी हितों से जुड़े एसीपी, पदोन्नति, पेंशन, नियमितीकरण और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामलों का भी समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है।
कुंभ-2027 के मद्देनजर ऋषिकेश के गंगा कॉरिडोर क्षेत्र में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण और विद्युत प्रणाली को स्काडा आधारित बनाने का कार्य जारी है। परियोजना की स्वीकृत लागत 547.83 करोड़ रुपये है।
देहरादून में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) वित्त पोषित परियोजना के तहत हाईटेंशन और लो टेंशन लाइनों के भूमिगतकरण का करीब 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसकी स्वीकृत लागत 977.03 करोड़ रुपये है। परियोजना से शहर की विद्युत व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और निर्बाध बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यूपीसीएल उपभोक्ता सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ईआरपी और आईटी प्रणाली को मजबूत कर रहा है। आरडीएसएस वित्त पोषण के तहत इसका 70 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है और इसे इसी वर्ष पूरा करने का लक्ष्य है। रियल टाइम डेटा एक्विजिशन सिस्टम (आरटी-डीएएस) के माध्यम से बिजली आपूर्ति बाधित होने की सूचना वास्तविक समय में नेशनल पावर पोर्टल तक भेजी जा रही है। यूपीसीएल मुख्यालय स्थित नियंत्रण कक्ष से विद्युत आउटेज की निगरानी की जा रही है।
केदारनाथ-बदरीनाथ समेत कई क्षेत्रों में नए उपकेंद्र-
भविष्य की विद्युत मांग को देखते हुए यूपीसीएल ने केदारनाथ और बदरीनाथ धाम समेत कई क्षेत्रों में नए 33/11 केवी उपकेंद्र और विद्युत लाइनों के निर्माण की परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं। इनमें काठगोदाम आईटीआई परिसर एवं जयपुर पाडली, केदारनाथ धाम, बदरीनाथ धाम, बसवाड़ा-उखीमठ, मदमहेश्वर-गुप्तकाशी, सारा-देहरादून और पाखी-चमोली शामिल हैं।
काठगोदाम आईटीआई परिसर स्थित उपकेंद्र का निर्माण पूरा कर लोड कनेक्ट किया जा चुका है, जबकि जयपुर पाडली में कार्य जारी है। केदारनाथ और बदरीनाथ क्षेत्र की परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। हरिद्वार, देहरादून, रुड़की, मसूरी, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और बागेश्वर में भी नए 33/11 केवी उपकेंद्र प्रस्तावित हैं।