देहरादून। जोशीमठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की मेडिकल टीम और एसडीआरएफ के जवानों ने दुर्गम पैंका गांव में गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराकर मानवता और सेवाभाव की मिसाल पेश की। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रात के अंधेरे के बीच चलाए गए इस अभियान में जच्चा और बच्चा दोनों को सुरक्षित रखा गया।
करीब 8 बजे पैंका गांव निवासी उषा, पत्नी हरीश राणा, के प्रसव पीड़ा में होने की सूचना सीएचसी अधीक्षक डॉ. गौतम को मिली। सूचना मिलते ही उन्होंने उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ के समन्वय से एसडीआरएफ के चार जवानों और स्वास्थ्य कर्मियों की संयुक्त टीम का गठन किया। मेडिकल टीम बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित पैंका पुल तक वाहन से पहुंची। इसके बाद टीम ने घने अंधेरे और दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर करीब चार किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पैदल तय की और रात 12 बजे पैंका गांव पहुंची।
गांव पहुंचने के बाद स्वास्थ्य टीम ने तत्काल महिला का परीक्षण किया और सुरक्षित प्रसव कराया। रात करीब 2:32 बजे तक चले इस अभियान के बाद जच्चा और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित पाए गए। इस सफल अभियान में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंदाकिनी, लक्ष्मी कुंवर, रीना नंबूरी और मोहित शाह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नर्सिंग एवं प्रशासनिक सहयोग में आशा कार्यकर्ता प्रियंका और बीपीएम नितिन भी पूरी रात टीम के साथ डटे रहे। वहीं एसडीआरएफ के चार जवानों ने कठिन मार्ग में मेडिकल टीम को सुरक्षित गांव तक पहुंचाने और अभियान को सफल बनाने में अहम योगदान दिया। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और एसडीआरएफ की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।