बद्रीनाथ मंदिर मे चढ़ावा मामला: विधायक रखा मौन व्रत, उच्च स्तरीय जांच की मांग

जोशीमठ। ​बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान-पात्र के लेन-देन में हुई कथित गड़बड़ी का मामला अब और गरमा गया है। मंगलवार को बदरीनाथ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक लखपत सिंह बुटोला ने दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ बद्रीनाथ मंदिर परिसर में बैठकर एक घंटे का मौन व्रत रखा। इस अनोखे प्रदर्शन के जरिए उन्होंने सरकार और मंदिर समिति के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

मीडिया से बातचीत में विधायक बुटोला ने कहा कि बद्रीनाथ धाम में बीते दिनों हुई गड़बड़ी, दान चोरी और चढ़ावे के हेरफेर से देश-विदेश के तमाम सनातन धर्मी बेहद आहत हैं और श्रद्धालुओं के दिलों को गहरी ठेस पहुंची है। ​विधायक बुटोला ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बद्रीनाथ धाम देश के सर्वोच्च और सबसे पवित्र तीर्थों में से एक है, लेकिन भगवान नारायण की इस पावन भूमि पर इस तरह के पाप और घोटाले हो रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। विधायक और उनके कार्यकर्ताओं ने इस मौन उपवास के माध्यम से उत्तराखंड सरकार से एक सुर में मांग की है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मसले की तत्काल किसी उच्च स्तरीय एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच सबके सामने आ सके। इस अवसर पर जोशीमठ विकासखंड के ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष प्रकाश नेगी, ब्लॉक अध्यक्ष दिगंबर सिंह, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता कमल रतूडी, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष विक्रम फर्स्वाण कांग्रेस के प्रदेश आईटी सेल महासचिव सतीश डिमरी सुरेंद्र दीक्षित दिनेश पोखरियाल सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

क्या है मामला

2 जुलाई को सुबह आठ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक बदरीनाथ धाम के परिक्रमा स्थल स्थित सभागार में दान-चढ़ावे की गिनती हुई थी। उस दिन 16 लाख से अधिक की धनराशि पांच दान पात्रों से मिली। बताया गया कि दान-चढ़ावे की गिनती के दौरान वहां मंदिर समिति के चार कर्मचारी तैनात थे। गिनती में श्रद्धालु भी शामिल थे। धाम में गिनती के वक्त श्रद्धालुओं को भी शामिल करने की व्यवस्था है। इस मौके पर एक अधिकारी मोबाइल के नीचे नोटों की गड्डियां ले जाते हुए देखा गया, जिसका वहां मौजूद साधु ने विरोध भी किया। इसी के बाद यह मामला उछल गया।

मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया कि मंदिर में पांच दान पात्र हैं, जिनमें दो गर्भगृह व तीन मंदिर परिक्रमा स्थल पर हैं। इन्हें ‘थाली भेंट’ नाम से जाना जाता है। दान पात्रों को एक-एक कर खाली किया जाता है और फिर गिनती होती है।

 

 

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