बरसात मे कैंसे बचाये पत्तेदार हरी सब्जियों को: विशेषज्ञों ने दिये टिप्स

पंत नगर कृषि विवि मे आयोजित सेमिनार मे महिलाओं ने सीखे फूड प्रोसेसिंग के गुरु

पंतनगर। पंडित गोबिंद बल्लभ पंत कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित सेमिनार में किसानों को महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। इसके साथ ही महिलाओं को फूड प्रोसेसिंग के बारे में बताया गया। सीनियर साइंटिस्ट डॉ किरण पंत ने कहा कि बरसात का मौसम अपने साथ हरियाली और ताजगी लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में फल एवं सब्जियां जल्दी खराब होने की समस्या भी काफी बढ़ जाती है। अधिक नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और सूक्ष्मजीवों की सक्रियता के कारण इस मौसम में खाद्य पदार्थों का सुरक्षित रख-रखाव एक बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने कहा कि विशेषकर पालक, मेथी, धनिया और सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां पानी की अधिक मात्रा होने के कारण जल्दी पीली पड़ने लगती हैं और उन पर फफूंदी (फंगस) का प्रकोप बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि भंडारण से पहले फल और सब्जियां खरीदते समय हमेशा उनकी गुणवत्ता पर ध्यान दें। हमेशा ताजे, बिना कटे-फटे और बेदाग उत्पाद ही चुनें। घर लाने के बाद इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि सतह पर मौजूद गंदगी और जीवाणु हट सकें, लेकिन भंडारण (स्टोरेज) से पहले इन्हें पूरी तरह सुखाना बेहद आवश्यक है। डॉ. किरण पंत ने कहा कि फल-सब्जियों को सुरक्षित रखने की 4 मुख्य तकनीक मे ठंडा भंडारण (रेफ्रिजरेशन): सेब, नाशपाती, प्लम और अंगूर जैसे फलों को फ्रिज में रखने से उनकी शेल्फ लाइफ काफी बढ़ जाती है। सुखाकर रखना (डिहाइड्रेशन): कद्दू, सेम, मेथी और पुदीना जैसी सब्जियों को काटकर धूप में सुखाया जा सकता है। उत्तराखंड के जौनसार-बावर और गढ़वाल क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से सूखी सब्जी बनाने की यह परंपरा आज भी काफी लोकप्रिय है। अचार एवं मुरब्बा बनाना: कच्चे आम, नींबू, हरी मिर्च और करेले का अचार डालकर तथा खुमानी, सेब और आम का मुरब्बा बनाकर इन्हें महीनों तक खराब होने से बचाया जा सकता है। फ्रीजिंग तकनीक: मटर और बीन्स जैसी सब्जियों को ‘ब्लांचिंग’ (हल्का उबालने) के बाद फ्रीजर में स्टोर किया जा सकता है, जिससे उनका पोषण तत्व सुरक्षित रहता है।

अलग-अलग सब्जियों के लिए खास स्टोरेज टिप्स
जड़ वाली सब्जियां (आलू, प्याज, लहसुन): आलू और प्याज को कभी भी एक साथ न रखें, क्योंकि आलू की नमी से प्याज जल्दी सड़ सकता है। इन्हें फ्रिज में रखने के बजाय घर के किसी सूखे, ठंडे और हवादार स्थान पर प्लास्टिक की थैलियों के बजाय खुली या बांस की जालीदार टोकरियों में रखें।

हरी पत्तेदार सब्जियां: बरसात में इन्हें धोकर सीधे स्टोर न करें। पहले इन्हें अच्छी तरह सुखा लें, फिर एक एयरटाइट डिब्बे में नीचे टिश्यू पेपर बिछाकर रखें। टिश्यू पेपर अतिरिक्त नमी सोख लेता है और पत्तियां हरी बनी रहती हैं। भिंडी और टमाटर: भिंडी नमी के संपर्क में आते ही चिपचिपी हो जाती है, इसलिए इसे धोकर फ्रिज में न रखें; बल्कि पेपर बैग या सूती कपड़े में लपेटकर रखें। टमाटर पर नमी के कारण काले धब्बे पड़ सकते हैं, इसलिए केवल पूरी तरह पके टमाटर ही फ्रिज में रखें और कच्चे टमाटरों को कमरे के तापमान पर ही पकने दें। खीरा और ककड़ी: इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है जिससे ये जल्दी गलने लगते हैं। इन्हें सूखे कपड़े से पोंछकर फ्रिज के निचले हिस्से (क्रिस्पर ड्रॉअर) में रखना चाहिए। फूलगोभी, पत्तागोभी और मशरूम: गोभी की परतों के बीच नमी जमा होने से फफूंदी लग सकती है। इसलिए इन्हें बिना धोए छेद वाले बैग (वेंटिलेटेड बैग) में रखें। मशरूम को प्लास्टिक कंटेनर के बजाय पेपर बैग में रखना बेहतर होता है।

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