रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुए जुड़वां गज शिशुओं की सुरक्षा को लेकर वन्यजीव प्रेमी खासे चिंतित हैं। वन्य जीव प्रेमियों की चिंता इस बात को लेकर है कि इन बच्चों को खतरा बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक तौर पर प्राकृतिक परिस्थितियों का है।
गौरतलब है कि अभी कुछ समय पूर्व ही कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में एक मादा हथिनी के साथ दो नवजात शिशु देखे गए थे। इन बच्चों के जन्म का कोई प्रत्यक्ष रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के बाद भी एक ही हथिनी के इर्द गिर्द रहने के कारण इन गज शिशुओं को जुड़वां माना जा रहा है। हाथियों में जुड़वां गर्भधारण अत्यंत दुर्लभ होता है। यदि ऐसा हो भी जाए तो अक्सर एक बच्चे का जीवित न रहना अथवा मां के लिए गंभीर जटिलताओं का मामला बनता है। दोनों बच्चों का एक ही हथिनी के इर्द गिर्द रहना व उसी से दूध पीने का प्रयास करने जैसे व्यवहार के कारण वन्यजीव प्रेमी अंतिम वैज्ञानिक प्रमाण न होने के बाद भी इसे जुड़वां बच्चों का मामला मान रहे हैं।
प्रसिद्ध वन्य जीव फोटोग्राफर के मुताबिक यदि यह वास्तव में जुड़वां हैं तो यह अपने आप में असाधारण घटना होने के साथ ही कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अनुकूल प्राकृतिक आवास व संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक संकेत है। इन गजशिशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित रजवार का कहना है कि इन नन्हे बच्चों के लिए अभी सबसे बड़ा खतरा बाघ जैसे शीर्ष शिकारी से हैं। हाथियों के इसी झुंड के पीछे उन्हें आज बाघ के ताज़ा पदचिह्न भी मिले हैं। बच्चों के प्रति यह चिंता इसलिए भी वास्तविक है क्योंकि कुछ महीने पहले इसी कोसी नदी क्षेत्र में एक नवजात हाथी बाघ का शिकार बन चुका है। हालांकि हाथियों की सबसे बड़ी ताकत उनका परिवार है। पूरा झुंड मिलकर बच्चों की सुरक्षा करता है। सामूहिक संरक्षण उनके जीवित रहने की सबसे बड़ी ढाल बनता है। बहरहाल, अभी तक दोनों नन्हे बच्चों को स्वस्थ, सुरक्षित और अपने परिवार के बीच देखकर वन्यजीव प्रेमियों में संतोष है। उनकी कामना है कि बच्चे अपने प्राकृतिक वातावरण में शिकारी वन्य जीव से सुरक्षित रह सकें।