सास को परिवार का हिस्सा न मानने वाले विभागीय दावे पर उठे सवाल

हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका के बाद मिला प्रत्यावेदन का अवसर

देहरादून। पशुपालन विभाग के प्रभारी निदेशक डॉ. उदय शंकर आर्या द्वारा उच्च न्यायालय में दाखिल काउंटर एफिडेविट को लेकर नया विवाद सामने आया है। अधिवक्ता आई.डी. पालीवाल ने दावा किया है कि विभाग की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया यह पक्ष तथ्यात्मक रूप से गलत था, जिसके चलते उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पुनर्विचार याचिका के माध्यम से वास्तविक स्थिति रखी।

मामला पशुपालन विभाग में कार्यरत डॉ. छवि चौधरी के स्थानांतरण से जुड़ा है। डॉ. चौधरी ने स्थानांतरण में छूट की मांग करते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि उनकी सास गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, इसलिए उन्हें स्थानांतरण नीति के तहत राहत प्रदान की जाए।

बताया गया कि विभाग की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट में यह कहा गया कि सास परिवार का हिस्सा नहीं होती हैं तथा डॉ. छवि चौधरी ने न्यायालय को भ्रमित करने के उद्देश्य से अपनी सास को परिजन के रूप में प्रस्तुत किया है।


अधिवक्ता आई.डी. पालीवाल ने पुनर्विचार याचिका में मुख्य न्यायाधीश को अवगत कराया कि स्थानांतरण नीति में माता एवं सास, दोनों के गंभीर बीमारी से पीड़ित होने की स्थिति में स्थानांतरण से छूट का प्रावधान मौजूद है। उनके अनुसार विभाग द्वारा प्रस्तुत पक्ष नीति के अनुरूप नहीं था।


पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. छवि चौधरी को अपनी विषम परिस्थितियों का विस्तृत प्रत्यावेदन विभाग के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता प्रदान की है। अब विभागीय स्तर पर इस प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लिया जाना शेष है।

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