धामी: साधारण कार्यकर्ता से शख्सियत तक

देहरादून। एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर शख्सियत बने पुष्कर सिंह धामी का राजनैतिक सफर दिलचस्प रहा है। धामी दो बार के विधायक जरूर थे, लेकिन जुलाई 2021 से पहले उत्तराखंड की इस मजबूत शख्सियत को बहुत कम लोग जानते थे। 45 वर्षीय धामी को अचानक भाजपा ने प्रदेश का 11वां मुख्यमंत्री घोषित किया था और खुद धामी भी इस घोषणा से आश्चर्यचकित हो गये। अब विधानसभा-2022 के हुए चुनाव के बाद आज विधानमंडल दल की बैठक में उन्हें दोबारा से मुख्यमंत्री चुन लिया गया। इस तरह वे प्रदेश के 12वें मुख्यमंत्री होंगे।

धामी कई बार सार्वजनिक तौर पर कहते रहे हैं कि ‘मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता ने कभी सोचा भी नहीं था कि पार्टी मेरे कंधों पर इतनी बड़ी जिम्मेदारी डालेगी। भारतीय जनता पार्टी की यही खूबसूरती है कि यहां पार्टी का छोटे से छोटे कार्यकर्ता भी शीर्ष पदों पर पहुंच जाता है। 3 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री की शपथ लेते ही धामी के नाम एक रिकॉर्ड और दर्ज हो गया। वह उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने और विधायक के बाद सीधे मुख्यमंत्री बनाए गए थे’।

धामी का सियासी सफर:

पुष्कर सिंह धामी बहुत ही साधारण सैन्य परिवार से हैं। उनके पिता सैनिक थे। धामी का सफर उत्तराखंड की राजनीति में  2001 में प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री बने और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के ओएसडी के रूप में शुरू हुआ। छात्र राजनीति के अलावा उन्होंने भगत दा के सानिध्य मे राजनीति के गुर सीखे।

धामी का जन्म 16 सितंबर 1975 को पिथौरागढ़ जनपद के डीडीहाट तहसील के टुंडी गांव में हुआ। शुरुआती शिक्षा गांव के ही स्कूल में हुई। जन्म के कुछ समय बाद परिवार खटीमा आ गया था। 12वीं तक की पढ़ाई खटीमा में ही की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए धामी लखनऊ चले गए और  लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए से स्नातक और एलएलबी किया। इसके अलावा डिप्लोमा इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन भी किया है। धामी ने मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में स्नाकोत्तर किया है। लखनऊ विश्वविद्यालय में धामी ने एबीवीपी के जरिये छात्र राजनीति में कदम रखा। छात्र राजनीति मे सक्रिय धामी एबीवीपी के राष्ट्रीय संयोजक भी रहे। धामी उत्तराखंड आंदोलन में भी सक्रिय रहे।

पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड भाजपा युवा मोर्चा के दो बार (2002 से 2008 तक) अध्यक्ष भी रहे हैं। युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहते युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए खासे सक्रिय रहे। 2007 में भाजपा की सरकार  बनी तो धामी को शहरी अनुश्रवण समिति का उपाध्यक्ष बनाया गया।

धामी ने पहला विधानसभा चुनाव उधमसिंह नगर के खटीमा से लड़ा था। इन्हें पहले चुनाव में ही बड़ी जीत मिली थी। खटीमा विधानसभा सीट 2012 से पहले अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थी। जब 2012 में इस सीट को सामान्य किया गया तो धामी टिकट पाने में कामयाब हुए। यह कामयाबी इन्होंने चुनाव में भी दिखाया। 2012 में इन्होंने 20,586 मतों के अंतर से कांग्रेस के उम्मीदवार देवेंद्र चंद को हराया था।

इसके अगले चुनाव यानी 2017 में इन्होंने कांग्रेस के भुवन चंद्र कापड़ी को 2709 मतों के अंतर से हराया।  2017 में भाजपा को प्रदेश में ऐतिहासिक जीत मिली। त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया। धामी को कैबिनेट में जगह नहीं मिली। शायद, भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। भाजपा हाईकमान ने इस कार्यकाल में दो मुख्यमंत्री बदले। लेकिन तीसरी बार में हाईकमान की खोज पुष्कर सिंह धामी पर आकर खत्म हुई।

पार्टी हाईकमान ने जुलाई 2021 को इन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। इन्होंने हाईकमान को निराश भी नहीं किया। उनके मुख्यमंत्रित्व काल में भाजपा ने फिर से प्रदेश में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बेशक धामी अपना चुनाव हार गए, लेकिन पार्टी को दो तिहाई बहुमत से पुनः सत्ता में वापसी कराने में नायक बनकर उभरे। पार्टी ने इसका उनको इनाम भी दिया और आज उनको 12वें मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी गई।

 

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