देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बात कर, एंजेल की हत्या पर दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि, इस मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जबकि एक अन्य आरोपी के नेपाल भागने की आशंका है, ईनाम घोषित करते हुए उसे भी गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना पर वो व्यक्तिगत तौर पर दु:खी हैं। इस स्थिति में परिवार के दु:ख को समझ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार दोषियों को कड़ी सजा दिलाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कभी भी इस तरह का माहौल नहीं रहा है, यहां देश- विदेश के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। इसलिए यह घटना हम सबके लिए भी कष्टपूर्ण है। सरकार ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करेगी। उन्होने कहा कि घटना के बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी उनकी बात हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। परिवार की सहायता के लिए वो त्रिपुरा के मुख्यमंत्री से भी बात करेंगे, साथ ही उत्तराखंड सरकार भी परिवार की हर संभव सहायता की जायेगी।
पीट पीट कर हुई एंजेल चकमा की हत्या
गौरतलब है कि हिंसा का शिकार हुए त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र अंजेल चकमा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. 14 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अंजेल ने दम तोड़ दिया. यह वही छात्र था, जो हमले के वक्त बार-बार कह रहा था, ‘मैं भारतीय हूं.’
घटना 9 दिसंबर की है जब अंजेल चकमा अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ देहरादून के सेलाकुई (सलेकी) बाजार स्थित एक शराब के ठेके पर गया था। इसी दौरान उसकी वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों से कहासुनी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपियों ने दोनों भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां कीं और उन्हें ‘चीनी’ कहकर पुकारा। दोनों भाई खुद को भारतीय बताते रहे, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया।
इसी दौरान आरोपियों ने माइकल और अंजेल के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि झगड़े के बीच अंजेल चकमा की गर्दन पर किसी नुकीली धारदार चीज से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
गंभीर हालत में अंजेल को देहरादून के ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे 14 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ते रहे। आखिरकार इलाज के दौरान आखिरकार अंजेल चकमा की मौत हो गई।