देहरादून। त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले को राज्य सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि इस तरह की कोई भी घटना प्रदेश में स्वीकार्य नहीं है। सरकार अराजक तत्वों से सख्ती से निबटेगी। इस तरह की घटनाओं में संलिप्त रहने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
त्रिपुरा के उनकोटी जिले के नंदानगर निवासी छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले में पांच आरोपितों को अभी तक पकड़ा जा चुका है। इनमें से दो आरोपित नाबालिग हैं, जिन्हें बाल सुधार गृह भेजा गया है। एक फरार आरोपित की धर-पकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। उस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया है। पुलिस की एक टीम को उसकी तलाश में नेपाल भेजा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फरार आरोपित की जल्द से जल्द गिरफ्तारी के लिए पुलिस को निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि फरार आरोपित बहुत जल्द पुलिस के शिकंजे में होगा। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले सरकार से रहम की उम्मीद न रखें। ऐसे अराजक तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। राज्य सरकार उत्तराखंड में रह रहे हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने त्रिपुरा के मृतक छात्र के प्रति शोक प्रकट किया है।
नस्लीय हिंसा के शिकार हुए थे एंजेल चकमा,
देहरादून में नस्लीय हिंसा का शिकार हुए त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र अंजेल चकमा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. 14 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अंजेल ने दम तोड़ दिया. यह वही छात्र था, जो हमले के वक्त बार-बार कह रहा था, ‘मैं भारतीय हूं.’
घटना 9 दिसंबर की है. अंजेल चकमा अपने छोटे भाई माइकल चकमा के साथ देहरादून के सेलाकुई (सलेकी) बाजार स्थित एक शराब के ठेके पर गया था. इसी दौरान वहां मौजूद कुछ स्थानीय लोगों से कहासुनी हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपियों ने दोनों भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां कीं और उन्हें ‘चीनी’ कहकर पुकारा। दोनों भाई खुद को भारतीय बताते रहे, लेकिन विवाद बढ़ता चला गया।
इसी दौरान आरोपियों ने माइकल और अंजेल के साथ मारपीट शुरू कर दी. आरोप है कि झगड़े के बीच अंजेल चकमा की गर्दन पर किसी नुकीली धारदार चीज से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
गंभीर हालत में अंजेल को देहरादून के ग्राफिक एरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे 14 दिनों तक जिंदगी की जंग लड़ते रहे। आखिरकार इलाज के दौरान आखिरकार अंजेल चकमा की मौत हो गई।