बद्रीनाथ मे भाजपा को झटका,कार्यकर्ताओं का असंतोष भांप नही पाया मैनेजमेंट – News Debate

बद्रीनाथ मे भाजपा को झटका,कार्यकर्ताओं का असंतोष भांप नही पाया मैनेजमेंट

भंडारी की जल्दबाजी मे ताजपोशी पड़ी भारी

उप चुनाव मे कांग्रेस ने लहराया परचम, मंगलौर मे रिकाउंटिंग

देहरादून। लोक सभा चुनाव मे मिली हार के बाद कांग्रेस को विधान सभा उप चुनाव मे संजीवनी मिली है। मंगलौर और बद्रीनाथ उप चुनाव मे कांग्रेस को जीत हासिल हुई है। कांग्रेस के काजी निजामुद्दीन ने मंगलौर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। हालांकि मंगलौर सीट पर भाजपा की मांग के बाद रिकाउंटिंग चल रही है।


सत्ताधारी बीजेपी के प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना बहुत कम वोट से चुनाव जीतते जीतते रह गए। भड़ाना को कुल 31,261 वोट हासिल हुए जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 31,710 वोट हासिल हुए हैं। इसी के साथ कांग्रेस उम्मीदवार काजी निजामुद्दीन 449 वोटों से विजयी घोषित हुए।

मंगलौर सीट पर आज सुबह जब मतगणना शुरू हुई तो कांग्रेस प्रत्याशी काजी निजामुद्दीन ने पहले राउंड से ही अपनी बढ़त बना ली थी। जैसे ही पहले राउंड के वोटों की गिनती के आंकड़े सामने आए, बीजेपी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर नजर आया। बसपा प्रत्याशी उबुर्रहमान पहले राउंड में थोड़ा बहुत मुकाबला करते दिखे। बाद के राउंड की गिनती में वो भी काजी निजामुद्दीन से पिछड़ते चले गए थे।

मंगलौर के बाद बदरीनाथ विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस का कब्जा हो गया है। भाजपा के लखपत सिंह बुटोला ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के राजेंद्र सिंह भंडारी को 5095 मतों से पराजित किया। बुटोला को 27696 और भंडारी को 22601 मत मिले।

कार्यकर्ताओं का असंतोष भांप नही पाया भाजपा मैनेजमेंट

भंडारी के भाजपा मे शामिल होने के नफा नुकसान को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है। भंडारी को भाजपा मे शामिल करने को लेकर हुई जल्दबाजी से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं मे शुरू से ही खासा रोष था। कार्यकर्ता भंडारी को पचा नही पा रहे थे। लोक सभा चुनाव मे तो किसी तरह मोदी का हवाला देकर कार्यकर्ता चुप रहे, लेकिन उप चुनाव मे उन्होंने सबक सिखा दिया। भंडारी को भाजपा मे लेने को लेकर पार्टी मे भी बड़े स्तर पर भी असंतोष रहा। कहा तो यहां तक जा रहा है कि गुपचुप तरीके से दिल्ली मे माला पहनने की भनक सीएम धामी और प्रदेश अध्यक्ष भट्ट को भी नही थी। वहीं कांग्रेस ने खुद को पीड़ित और प्रताड़ित दिखाकर आक्रामक प्रचार किया। दल बदल के खिलाफ जो माहौल बना उसे भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं का साथ मिला और कांग्रेस को एक बड़ी जीत नसीब हुई। हालांकि भाजपा मैनेजमेंट इतनी बड़ी हार को भांप नही पाया।

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