देहरादून। लोक सभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए सब कुछ ठीक नही चल रहा है। नेताओं का पार्टी छोड़ने या भाजपा की ओर रुख करने का सिलसिला जारी है। आज पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष खंडूरी ने भाजपा ज्वाइन कर ली तो वहीं रुद्रप्रयाग की पूर्व जिप अध्यक्ष लक्ष्मी राणा ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है।
लक्ष्मी राणा पूर्व मंत्री हरक सिंह की करीबी है और ईडी पाखरो टाइगर सफ़ारी घोटाले के मामले मे उनके आवास पर छापे की कार्यवाही कर चुकी है। उनके लॉकर से ईडी को 48 लाख की ज्वेलरी और संपत्ति के दस्तावेज मिले थे, जिसे लेकर उनसे पूछताछ के लिए बुलाया गया है। राणा ने इस्तीफे की वजह पार्टी द्वारा बुरे समय मे उनका साथ न देने की बात कही है।
लक्ष्मी राणा ने लिखा है कि हाल ही मेरे घर और प्रतिष्ठान पर राजनीतिक द्वेष के चलते ईडी की छापेमारी की कार्रवाई हुई। हालांकि मैं जानती हूं कि ये कानूनी प्रक्रिया है, किंतु पार्टी की तरफ से मेरे खिलाफ इस राजनीतिक द्वेष के बारे में न कोई प्रतिक्रिया आई न ही किसी ने इस दुख की घड़ी में मुझे ढांढ़स बंधाया।
वह रुद्रप्रयाग में राजनीतिक रूप से सक्रिय रहीं हैं। वो तकरीबन तीन दशको से राजनीति में हैं। अविभाजित यूपी में 1998 में युवा कांग्रेस की महामंत्री रहीं। 1997 से 2001 तक जखोली की ब्लाक प्रमुख रहीं। 2002 से 2007 तक दर्जाधारी रहीं। 2014 से 2019 तक रुद्रप्रयाग की जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। लक्ष्मी राणा ने 2017 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा। मौजूदा वक्त में वो कांग्रेस की महामंत्री के पद भी थीं।
राणा ने अभी पार्टी से इस्तीफे के बाद किसी दूसरे दल मे ज्वाइन के संकेत नही दिये है।
