धामी ने दिया भरोसा, किरण को न्याय दिलाने की होगी हर कोशिश

देहरादून। दिल्ली के छावला मे गैंग रेप और हत्या के आरोपियों के सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषमुक्त करार देने के बाद जहाँ राज्य मे उबाल है तो वहीं सीएम पुष्कर सिंह धामी ने किरण को न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।

सीएम ने कहा कि उन्होंने इस मामले को उच्चतम न्यायालय में देख रही वकील चारू खन्ना और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से भी बात की है। किरण हमारे प्रदेश की, देश की बेटी है, उसको न्याय दिलाने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे

दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उत्तराखंड की बेटी के साथ छावला दिल्ली में हुए जघन्य अपराध पर आये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को स्तब्ध करने वाला बताया है । उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाजपा, उत्तराखंड सरकार और प्रदेशवासियों की संवेदना पीड़ित परिवार के साथ है और किसी भी तरह इस प्रकरण में अन्याय नही होने दिया जाएगा । इस संबंध में सीएम श्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय राज्य मंत्री श्र किरण रिजिजू व सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाली वकील से बात कर उचित कानूनी कदम उठाने की अपील भी की है ।

प्रदेश अध्यक्ष श्री भट्ट ने अपने बयान में 2012 में राज्य की बेटी के साथ हुई सामूहिक बलात्कार व हत्या प्रकरण पर आये उच्चतम न्यायालय के निर्णय को समस्त पीड़ित उत्तराखंड वासियों के लिए आहत करने वाला बताया। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही केंद्रीय गृह मंत्रालय व उनकी सुप्रीम कोर्ट की लीगल टीम मामले की गंभीरता के मद्देनजर उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुशार आगे की अपील करेगी ।

10 साल बाद आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

गौरतलब है कि दिल्ली के छावला में एक 19 साल की लड़की का अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप करने और फिर बेहद क्रूरता से हत्या कर देने वाले 3 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया। दिल्ली की निचली अदालत और हाईकोर्ट ने दोनों ही अदालतों ने दोषियों को मौत की सजा देने का आदेश दिया था।

मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी की रहने वाली ‘अनामिका’ दिल्ली के छावला के कुतुब विहार में रहती थी। 9 फरवरी 2012 की रात नौकरी से लौटते समय राहुल, रवि और विनोद नाम के आरोपियों ने उसे अगवा कर लिया था। 14 फरवरी को ‘अनामिका’ की लाश बहुत बुरी हालत में हरियाणा के रेवाड़ी के एक खेत में मिली थी। गैंगरेप के अलावा ‘अनामिका’ को असहनीय यातनाएं दी गई थीं. उसे कार में मौजूद औजारों से बुरी तरह पीटा गया था. साथ ही शरीर को सिगरेट और गर्म लोहे से दागा दिया गया था। गैंगरेप के बाद ‘अनामिका’ के चेहरे और आंख में तेजाब डाला गया था।

सामाजिक संगठनों और पर्वतीय मूल के लोगों के आंदोलन के बाद हरकत मे आयी पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। लड़की के अपहरण के समय के चश्मदीदों के बयान के आधार पर पुलिस ने लाल इंडिका गाड़ी की तलाश की। कुछ दिनों बाद उसी गाड़ी में घूमता राहुल पुलिस के हाथ लगा। उसने अपना गुनाह कबूल किया और अपने दोनों साथियों रवि और विनोद के बारे में भी जानकारी दी। तीनों की निशानदेही पर ही पीड़िता की लाश बरामद हुई थी। डीएनए रिपोर्ट और दूसरे तमाम सबूतों से निचली अदालत में तीनों के खिलाफ केस निर्विवाद तरीके से साबित हुआ। 2014 में पहले निचली अदालत ने मामले को ‘दुर्लभतम’ की श्रेणी का मानते हुए तीनों को फांसी की सजा दी. बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।

जस्टिस यू यू ललित, एस रविन्द्र भट्ट और बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने दोषियों की अपील पर इस साल 6 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रखा था। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने फांसी की सजा की पुष्टि की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पीड़िता के साथ अकल्पनीय दरिंदगी हुई। इस तरह के शैतानों के चलते ही परिवारों को अपनी लड़कियों के बाहर जा कर पढ़ाई करने या काम करने पर रोक लगानी पड़ती है। वहीं मामले में एमिकस क्यूरी बनाई गई वरिष्ठ वकील सोनिया माथुर ने जजों से अनुरोध किया था कि वह इन दोषियों में सुधार आने की संभावना पर विचार करें। उन्होंने कहा था कि दोषियों में से एक ‘विनोद’ बौद्धिक अक्षमता से पीड़ित है. वह ठीक ढंग से सोच-विचार नहीं कर पाता।

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