समीपवर्ती राज्यों से अधिक है उतराखंड मे न्यूनतम वेतन
भाजपा का संवाद पर भरोसा, न्यूनतम वेतन वृद्धि और श्रम कानून के प्रति प्रतिबद्ध
देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और उनकी समस्याओं मे अधिकतर का निवारण हो चुका है। कांग्रेस श्रमिकों को लेकर भ्रामक जानकारी मुहैया करा रही है।
कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि अप्रैल माह मे इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए न्यूनतम वेतन घोषित हो चुका है। वहीं नोन इंजीनियरिंग उधोगों के लिए महंगाई भत्ता, एरियर के निर्देश उद्योगों को दिये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा नेशनल फ्लोर लेबल न्यूनतम वेतन घोषित किया जाना है। इस घोषणा के बाद राज्य सरकार द्वारा राज्य के लागू वेतन पर समीक्षा की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य मे समीपवर्ती राज्यों से अधिक न्यूनतम वेतन निर्धारित है। वहीं प्रधानमंत्री अथवा किसी अन्य सक्षम अधिकारी द्वारा भी 781 की कोई घोषणा नही की गयी है। केंद्र सरकार अपने अंतर्गत आने वाले उद्योगों का न्यूनतम वेतन निर्धारित कर सकती है राज्य के अधीन आने वाले उधोगों का नही। केंद्रीय उपक्रमों के लिए 781 प्रतिदिन राज्य के उद्योगों पर लागू नही होगा। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की समस्याओं को लेकर जानकारी या निदान के लिए श्रम कार्यालय हल्द्वानी मे कंट्रोल रूम बनाया गया है।
चौहान ने कहा कि कांग्रेस की मजदूरों की चिंता केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित दिखाई देती है। वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने श्रमिकों के हित में कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई। आज जब प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार श्रमिकों के कल्याण, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है, तब कांग्रेस केवल भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
प्रदेश सरकार समय-समय पर श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि कर रही है और श्रमिकों की सुरक्षा, महिला कर्मचारियों के सम्मान तथा श्रम कानूनों के पालन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए भी सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिक औद्योगिक विकास की रीढ़ हैं और उनके हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में कितने उद्योग बंद हुए और कितने युवाओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा।
भाजपा विकास और संवाद की राजनीति में विश्वास रखती है, जबकि कांग्रेस केवल आंदोलन और भ्रम की राजनीति कर रही है। कांग्रेस की उद्योग और श्रमिकों को लेकर कोई भी षड्यंत्र पूरा नही होगा यह जनता भली भाँति वाक़िफ़ है।