जिला योजना में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बर्दाश्त नही, सूची निरस्त करने की मांग
जन प्रतिनिधियों के प्रस्ताव दरकिनार कर आवंटित कर दिये गये 75 करोड़
बाहरी और गैर निर्वाचित व्यक्ति के प्रस्ताव जिला योजना मे शामिल
देहरादून। उत्तरकाशी की जिला योजना में अनियमितता का आरोप लगाते हुए यमुनोत्री के विधायक संजय डोभाल ने शासन और प्रशासन से संशोधन की मांग करते हुए कहा कि अगर 10 दिन के भीतर कार्यवाही नही की जाती है तो वह जिलाधिकारी और प्रभारी मंत्री के आवास का घेराव तथा धरना देंगे।
पत्रकारों से वार्ता करते हुए विधायक डोभाल ने कहा कि सरकार और ब्यूरोकेसी दोनों मिलकर जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों, जनहित से जुड़े प्रस्तावों और मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस बार की जिला योजना है। उन्होंने कहा कि जिला योजना के अंतर्गत प्रभारी मंत्री जनपद उत्तरकाशी व जिलाधिकारी उत्तरकाशी की मॉजूदगी में तकरबन 75 करोड़ रूपये विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवंटित किए गये। पूर्व में जिला योजना में जनपद के तीनों विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्ष, प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी सहित जनप्रतिनिधियों द्वारा दिये गये जनहित के प्रस्तावों के आधार पर योजनाओं की स्वीकृति दी जाती रही है। लेकिन इस वार जिस तरह से जिला योजना में प्रस्तावों को शामिल नही किया गया है, उससे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र से प्रभारी मंत्री द्वारा विकास योजनाओं के प्रस्ताव मांगे गये। उनके द्वारा भेजे गये प्रस्तावों में से कुछं चुनिंदा योजनाओं को ही सूची में शामिल किया गया है जबकि बडी संख्या में विभिन विकास योजनाओं को दरनिकार कर दिया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि ऐसे व्यक्ति/ प्रतिनिधि द्वारा दिए गए प्रस्तावों को बड़ी संख्या में जिला योजना में शामिल किया गया है जो विधानसभा क्षेत्र यमुनोत्री से निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी नही है और दूसरी विधानसभा से आते है। इस स्थिति से यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि विधानसभा क्षेत्र से जनता के द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गये जनहित के प्रस्तावों को जिला योजना की अंतिम सूची में शामिल क्यों नही किया गया यदि प्रस्ताव में कोई कमी थी अथवा बजट का प्रावधान नही था तो इसकी जानकारी पूर्व में जनप्रतिनिधियों को क्यों नही दी गई।
डोभाल ने प्रभारी मंत्री से सवाल किया कि यदि उनकी विधानसभा क्षेत्र से मेरे प्रस्तावों को जिला योजना में सामिल नही किया गया है तो आखिर वो प्रस्ताव किसने दिये किसके आधार पर उन्हें जिला योजना में शामिल किया गया और किसकी संस्तुति पर उन्हे स्वीकृति मिली ? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिला योजना में जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों की अनदेखी कर यदि मनमाने तरीके से योजनाएं शामिल की जाती है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था ओर जनता के अधिकारों का अपमान है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा पूर्व में इस विषय पर शिकायत भी की गई।इसमें आरोप था कि जिला योजना में विभिन्न कार्यों को स्वीकृत दिलाने के नाम पर ग्रामीणों से धनराशि एकत्रित की गई जो कि गंभीर भ्रष्टचार की और संकेत करता है। जिस तरह से विधायकों के प्रस्तावो को हटाया गया है और कुछ चुनिंदा लोगों की योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है। मामला केवल किसी एक राजनीतिक दल य विधायक का नही है बल्कि पूरी जिला योजना की प्रक्रिया और उसमें अपनाई गई कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
डोभाल ने मांग की कि सरकार और जिला प्रशासन की जिला योजना की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष सनीक्षा की जाय प्रत्येक स्वीकृत योजना का प्रस्ताव किस जनप्रतिनिधि द्वारा दियेगये है, उसकी संस्तुति किस स्तर से हुई और उसे किस आधार पर स्वीकृति मिली-इसकी पूरी जनकारी सार्वजनिक की जाय। यदि जिला योजना की वर्तमान सूची निरस्त य उसमें जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव को सामिल नही किया जाता है तो में जिला मुख्यालय और मंत्री निवास का घेराव कर धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।