राज्य मे भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और दिशाहीन बजट चिंताजनक: आर्य – News Debate

राज्य मे भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और दिशाहीन बजट चिंताजनक: आर्य

देहरादून। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राज्य के बजट को लेकर सरकार पर कड़े प्रहार करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में शासन-प्रशासन की स्थिति अत्यंत चिंताजनक होती जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं बल्कि शिष्टाचार बनता जा रहा है। सरकार भले ही “जीरो करप्शन” का नारा देती हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि भर्ती, ठेकों, योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानांतरण तक हर स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में शिकायतें मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के बावजूद समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, जिससे जनता के बीच यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को संरक्षण मिल रहा है।

उन्होंने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (ब्।ळ) की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच विभिन्न योजनाओं में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले सामने आए हैं। देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना, बिजली व्यवस्था, खनन और अन्य विभागों में वित्तीय कुप्रबंधन के उदाहरण राज्य की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।

आर्य ने राज्य की कानून व्यवस्था पर भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2022 के बाद अपराधों की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजधानी देहरादून में अल्प समय के भीतर कई हत्याओं की घटनाएँ होना अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि जब राजधानी में ही अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हों, तो प्रदेश की जनता में असुरक्षा की भावना स्वाभाविक है। महिला अपराधों, साइबर अपराधों और गंभीर आपराधिक घटनाओं के बढ़ते आंकड़ों पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में पीड़ित न्याय के लिए भटकते रहते हैं और पुलिस की निष्पक्षता व प्रशासनिक जवाबदेही पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में ईमानदार अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर नहीं मिल रहा, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।

विधानसभा में बजट पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ने वाला बजट है। इसमें न तो आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने की स्पष्ट योजना दिखाई देती है और न ही बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का कोई ठोस खाका है। उन्होंने कहा कि राज्य पर बढ़ते कर्ज, हजारों रिक्त सरकारी पदों, पलायन, किसानों की समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों की चुनौतियों पर बजट में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गैरसैंण के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय बढ़ाने और पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस नीति और बजटीय प्रावधानों की आवश्यकता है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और आर्थिक प्रबंधन से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और प्रदेश की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि शासन व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण है।
प्रेस वार्ता में प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन, विक्रम सिंह नेगी,  लखपत सिंह बुटोला भी उपस्थित रहे।

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