अंकिता हत्याकांड मे सामाजिक संगठनों की पंचायत, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे सीबीआई जांच की मांग
देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड मे सीबीआई जांच से नाखुश कई संगठनों ने आज महापंचायत का आयोजन कर सरकार पर वीआईपी को बचाने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि अंकिता के परिजनों की शिकायत को नजरंदाज कर एक ऐसे व्यक्ति की एफआईआर पर जांच की जा रही है जिसका न परिवार और न ही इस बारे मे हुए आंदोलन से दूर दूर तक तालुक् है।
राजधानी के परेड ग्राउंड के बाहर आयोजित अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के तत्वाधान मे आयोजित महापंचायत मे कांग्रेस, इंडिया गठबंधन के घटक दलों के अलावा राज्य आंदोलनकारियों समेत तमाम सामाजिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठन शामिल हुए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वर्तमान जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन इस जांच को पूरी तरह खारिज करता है। रावत ने कहा कि जन भावनाओं के अनुरूप, उच्चतम न्यायालय की देखरेख में सीबीआई जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर की जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह छलावा है।
रावत ने कहा कि इस केस में जिस शिकायतकर्ता की शिकायत को आधार बनाकर जांच की जा रही है, वह सरकार द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा की लगातार उपेक्षा तथा दुष्कर्म की घटनाओं मे वृद्धि को सरकार की नाकामी बताया।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा सरकार शुरू से वीआईपी बचाने की कोशिश करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में संदिग्ध रूप से एक व्यक्ति को शिकायतकर्ता बनाया गया है, जिसका अंकिता के परिवार से कोई संबंध नहीं, न ही वह पीड़ित या पक्षकार है। उनका कहना था कि यह पूरी कोशिश सीबीआई जांच के जरिए वीआईपी को बचाने की है।
महापंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर सत्यनारायण सचान ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अंकिता मामले की सीबीआई जांच पर्यावरणविद की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं, जबकि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर पर नहीं बल्कि अंकिता के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने कहा जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाए।
न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने कहा इस मामले में सरकार वीआईपी को बचाने का काम कर रही है और सीबीआई जांच में की गई चालाकी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। हम अंकिता को न्याय दिलाने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे।
महापंचायत मे शामिल हुए अंकिता के माता पिता ने कहा कि वह अपनी बेटी की आत्मा की शांति के लिए लड़ रहे है। वह चाहते हैं कि वीआईपी का पता लगे और सुप्रीम कोर्ट की देख रेख मे जांच हो। उन्होंने कहा सुबूत मिटाने और रिजार्ट को ध्वस्त करने के आरोपी यमकेश्वर विधायक को जांच के दायरे मे लिया जाय।
महापंचायत में राष्ट्रपति को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई और पांच प्रस्ताव पारित किए गए।
प्रस्ताव मे मांग की गयी कि अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गये पत्र को सीबीआई जांच के लिए शिकायती पत्र माना जाए और उसी के आधार पर सीबीआई जांच, उच्चतम न्यायालय की निगरानी में करवाई जाए।
सीबीआई जांच मामले से असंबद्ध व्यक्ति की एफआईआर खारिज करने और पूर्व में लक्ष्मण झूला ऋषिकेश थाने में दर्ज एफआईआर के तहत ही आरोपित वीआईपी और सबूत मिटाने वालों को केंद्र में रख कर ही आगे की जांच करवाई जाए। भाजपा के आरोपी पदाधिकारियों का नाम लोगों ने वीआईपी के तौर पर लिया है, इसलिए दोनों को तत्काल जांच के दायरे में लाया जाये और भाजपा के द्वारा इन दोनों को तत्काल इनके पदों से हटाया जाये।
आगामी 15 दिनों के भीतर इस हत्याकांड में शामिल वीआईपी के खुलासे की जो सीबीआई जांच अनिल जोशी की एफआइआर पर शुरू की जा रही है, उसको दरकिनार करते हुए सीबीआई जांच को पीड़ित पक्ष द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर ही आगे नहीं बढ़ाया जाता है तो जनता आंदोलन करेगी। महापंचायत का संचालन कमला पंत ने किया।

