प्रवासियों ने सांसदों को सौंपे ज्ञापन
नई दिल्ली। प्रवासी उत्तराखंडी संगठनों ने उत्तराखंड सरकार द्वारा अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच की संस्तुति को एक सकारात्मक कदम बताते हुए जांच को सर्वोच्च न्यायालय के किसी सिटिंग जज की देखरेख में कराए जाने की मांग की है।
प्रवासी संगठनों कहा है कि यह मांग राज्य सरकार के इस बाबत पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए की गई है जो अपराधी को बचाने और मामले की लीपापोती करने वाला रहा है। उन्होंने दावा किया कि सभी आंदोलनकारी उत्तराखंडी इस मामले को निर्णायक नतीजे तक पहुंचाने और दोषियों को काफी से कड़ी सजा दिलाने हेतु प्रतिबद्ध हैं। इसमें ना तो कोई कोताही बरती जाएगी ना ही कसर छोड़ी जाएगी।
उन्होंने अंकिता भंडारी न्याय आंदोलन को जारी रखने का संकल्प जताया। इस सिलसिले में रविवार को आयोजित उत्तराखंड बंद का देशव्यापी बंद का प्रवासी संगठनों ने पूर्ण समर्थन करके इसे अभूतपूर्व रूप से सफल बनाने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की है।
वरिष्ठ प्रवासी संगठनों के नेता हरिपाल रावत और धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि किसी भी नकारात्मकता के प्रदर्शन किए जाने की स्थिति में उनके निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिकूल परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यद्यपि स्थानीय न्यायालय द्वारा मुख्य अभियुक्तों को आजीवन कारावास का दंड दिया गया है, तथापि इस प्रकरण से जुड़े कई गंभीर प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं। इसमें तथाकथित वीआईपी व्यक्तियों की पहचान, व्यापक साजिश की भूमिका तथा राजनीतिक प्रभाव की आशंकाएँ हैं।
मंत्रियों और सांसदों को ज्ञापन देने की शुरुआत केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा से की गई। उन्होंने मामले पर सकारात्मक रुख अपनाया। इसके अलावा सांसदों अनिल बलूनी, त्रिवेंद्र सिंह रावत और मालाराज लक्ष्मी को भी ज्ञापन दिया गया।
इस मौके पर हरिपाल रावत, धीरेन्द्र प्रताप, अनिल पंत, एस एन डंगवाल, मनोज आर्य, जगत सिंह बिष्ट,हरि सिंह राणा, सुरेंद्र हलशी, नितिन उपाध्याय मौजूद थे।
