हल्द्वानी मे युवक की गोली मारकर हत्या, हिरासत मे पार्षद – News Debate

हल्द्वानी मे युवक की गोली मारकर हत्या, हिरासत मे पार्षद

हल्द्वानी। हल्द्वानी में एक युवक नितिन लोहनी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी। हत्या का आरोप भाजपा के पार्षद पर लगा है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और पुलिस घटना की जांच में जुटी है। वहीं आरोपी को हिरासत में ले लिया है और घटना के बारे में पूछताछ कर रही है।

मृतक के साथी ने बताया कि बीती देर रात्रि मृतक नितिन लोहनी और वह गौलापार गए हुए थे। जब वह अपने घर हल्द्वानी लौट रहे थे तभी नितिन ने बीजेपी पार्षद अमित बिष्ट उर्फ चिंटू से मिलने की बात कही और वह दोनों पार्षद के घर चले गए। जिसके बाद उन्होंने गेट पर घंटी बजाई कुछ देर बाद पार्षद अमित बिष्ट असलहा के साथ गेट पर पहुंचा और दोनों पर तान दिया। पार्षद ने पहला फायर जमीन में किया। डर से नितिन मौके से भागने लगा तो आरोपी पार्षद द्वारा उस पर गोली चला दी। गोली लगने से नितिन नाली में जा गिरा, जब वह उसे उठाने के लिए पहुंचा तो और लोग भी हथियारों के साथ वहा पर पहुंच गए। इस दौरान वह जान बचा कर मौके से भाग गया। कोतवाली पुलिस ने आरोपी पार्षद को हिरासत में लेते हुए पूछताछ शुरू कर दी है।

हत्या भाजपा शासन मे पनप रही आपराधिक सरंचना का उदाहरण: कांग्रेस

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि हल्द्वानी में 23 वर्षीय युवक नितिन लोहनी की गोली मारकर हत्या कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि भाजपा शासन में पनप रही उस आपराधिक संरचना का भयावह उदाहरण है, जहाँ सत्ता का संरक्षण अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। जिस व्यक्ति पर हत्या का आरोप है, वह कोई आम नागरिक नहीं बल्कि भाजपा का पार्षद और मंडल उपाध्यक्ष है और यही सच्चाई इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना देती है।

यह पहला मौका नहीं है जब इस आरोपी पर सवाल उठे हों। कुछ महीने पहले जब पुलिस ने उस पर कार्यवाही करने की कोशिश की, तब कालाढूंगी से भाजपा विधायक बंशीधर भगत खुलेआम कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए थे और एसएसपी को धमकाते हुए कह रहे थे-“इसे पहचान लो।” यह वाक्य सिर्फ एक धमकी नहीं था, बल्कि उत्तराखंड की कानून व्यवस्था के मुँह पर मारा गया तमाचा था। सवाल है कि जब सत्ता खुद अपराधियों की ढाल बन जाए, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
आज उत्तराखंड में अपराधियों को यह भरोसा कौन दे रहा है कि वे गोली चला सकते हैं और फिर भी सुरक्षित रहेंगे? क्या यही ‘डबल इंजन सरकार’ का असली चेहरा है, जहाँ भाजपा का झंडा थाम लेने से कानून बौना हो जाता है? अगर समय रहते सख़्त कार्यवाही होती, अगर सत्ता पुलिस को डराने के बजाय उसका साथ देती, तो शायद आज नितिन लोहनी ज़िंदा होता।
यह केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता की पीड़ा और आक्रोश की आवाज़ है। यह आवाज़ पूछ रही है कि क्या भाजपा सरकार बताएगी कि उसने अब तक आरोपी और उसे संरक्षण देने वालों पर क्या ठोस कार्यवाही की? या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी समय के अंधेरे में दफन कर दिया जाएगा?
मैं मांग करता हूँ कि इस हत्याकांड की निष्पक्ष, तेज़ और उच्चस्तरीय जांच हो, आरोपी को किसी भी राजनीतिक संरक्षण के बिना कड़ी से कड़ी सज़ा मिले और यह तय किया जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। नितिन लोहनी को न्याय चाहिए, और उत्तराखंड की जनता अब और चुप नहीं रहेगी।

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