अधीनस्थ चयन सेवा आयोग की परीक्षा सवालों के घेरे मे, बॉबी पंवार से पूछताछ – News Debate

अधीनस्थ चयन सेवा आयोग की परीक्षा सवालों के घेरे मे, बॉबी पंवार से पूछताछ

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय लिखित परीक्षा के संपन्न कराने के लिए पुख्ता तैयारियों के दावे सवालों के घेरे मे आ गए हैं।

उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बॉबी पँवार ने परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद प्रश्न पत्र आम जनता के बीच में पहुंचने का दावा करते हुए व्यवस्था पर सवाल उठाये हैं। पूछताछ के बाद बोबी को पुलिस ने छोड़ दिया।

देहरादून पुलिस और एसटीएफ ने शनिवार को राज्य में कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह और उसके एक अन्य साथी को निरोधात्मक कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया था। रविवार को जैसे ही परीक्षा शुरू हुई, उसके कुछ ही देर बाद उत्तराखंड बेरोजगार संघ के पदाधिकारियों ने सामने आकर परीक्षा केंद्रों से प्रश्न पत्र बाहर आने के सबूत दे दिए। हालांकि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया ने स्वीकार किया कि तीन पन्ने बाहर आये हैं, लेकिन इसे पेपर लीक नही कहा जा सकता है। परीक्षा केंद्रो के आसपास जैमर लगे है और इसे कहीं और फॉरवर्ड नही किया जा सकता है।

मामले मे पुलिस ने बॉबी पँवार से पूछताछ की है। पुलिस मामले की तह तक जाने की कोशिश मे है, क्योंकि कड़ी व्यवस्था के बाद भी पेपर के तीन पन्ने बाहर आ गए।

इधर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इस मामले को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाला एक बार फिर से उत्तराखंड की फिजाओं में गूंज रहा है और यह घटना भाजपा के शासन में दोबारा हुई है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह और उसके एक अन्य साथी को एक बार फिर से गिरफ्तार किया गया है.

माहरा ने कहा कि, यह वो हाकम सिंह है, जो 2021 में यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले का मुख्य आरोपी रहा, लेकिन 13 महीने की जेल काटने के बाद हाकम सिंह छूट गया. अगर सरकार ने समय रहते नकल माफिया को दंडित किया होता तो निश्चित रूप से आज दोबारा उसमें ऐसी हरकत करने की हिम्मत नहीं होती। रविवार को जैसे ही लिखित परीक्षा शुरू हुई, तभी एक युवा वर्ग ने सामने आकर प्रश्न पत्र केंद्रों से बाहर आने के सबूत पेश कर दिए. इससे सरकार सदमे में है.

माहरा ने कहा कि इस समय पूरे उत्तराखंड आपदा की चपेट में है. राज्य में आई आपदा को देखते हुए युवा वर्ग और सभी संगठन पेपर निरस्त या रद्द करने की मांग कर रहे थे. उसके बावजूद सरकार ने हठधर्मिता अपनाते हुए परीक्षाएं आयोजित करा दी। माहरा ने आरोप लगाया कि जिस तरह 2021 के घटनाक्रम के बाद एक बार फिर से हाकम सिंह ने अपने पैर पसारे, वो सरकार के संरक्षण में ही हो सकता है।

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