न मैदानी न पहाड़ी, बस सपना एक समृद्ध उत्तराखंडी: अग्रवाल – News Debate

न मैदानी न पहाड़ी, बस सपना एक समृद्ध उत्तराखंडी: अग्रवाल

पहाड़ों से निकलती नदियाँ जब मैदान मे प्रवेश करती है तो अपनी मिठास नही खोती। क्योंकि उसमे सौहार्द छिपा होता है। वह न केवल पानी का स्रोत होती हैं, बल्कि उनमें जीवनदायिनी ऊर्जा, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भूमिका और प्रकृति व इंसानों के बीच एक सौहार्दपूर्ण रिश्ता भी छिपा होता है। क्योंकि वे अपने प्रवाह से भूमि को सींचती हैं, जैव विविधता को पोषित करती हैं और लोगों को जीवन और आजीविका प्रदान करती हैं। प्रकृति हमे मिलजुलकर रहने की सीख देती है जो कि प्रमाणिक है, लेकिन जब भूमि के टुकड़े स्वार्थों के खातिर बंटने लगे तो यह मानव निर्मित भेदभाव पहाड़ मैदान के रूप मे सामने आता है। हमे इस नैसर्गिक अधिकार को बांटने का हक तो नही मिला है जो कि तुच्छ भाव उत्पन्न करे। मिल जुलकर आगे बढ़ने और समृद्ध उत्तराखंडवासी होने का गौरव हमको मिले उसके लिए अलख जगनी भी जरूरी है और राज्य की सीमा मे रह रहे हर व्यक्ति का यह दायित्व भी है।

यह कहना है वरिष्ठ समाजसेवी और भाजपा नेता पी के अग्रवाल का। अग्रवाल 40 वर्षों से विभिन्न राजनैतिक दलों, सामाजिक संगठनों मे सक्रिय हैं और उन्होंने अब पर्वतीय- मैदानी एकता समिति गठित की है। अग्रवाल कहते हैं कि कुछ समय से वह शोसल मीडिया या अन्य माध्यम से यदा कदा सुनते रहे हैं कि देव भूमि मे मैदानी मूल के लोग उपेक्षित हो रहे हैं। यह पूरा सच नही, लेकिन कुछ लोग सदियों के भाई चारे को पहाड़ मैदान के बीच बाँटने की कोशिश कर रहे हैं तो इसे असफल करना होगा और एक जन जागृति को लेकर समाज के बीच तो जाना ही होगा। अग्रवाल का कहना है कि इसी सामाजिक सौहार्द की खातिर उन्होंने यह मंच बनाया है।

बकौल अग्रवाल राजनैतिक क्षेत्र की बात करें तो संयुक्त उत्तर प्रदेश मे कभी यह बात नही आयी जिसमे क्षेत्रवाद को लेकर बात हुई हो। हेमवती नंदन बहुगुणा की कर्म भूमि इलाहबाद रही और पूरे प्रदेश और देश ने न केवल उन्हे नेता माना, बल्कि स्वीकारा। पण्डित नारायण दत्त तिवारी, गोविंद बल्लभ पंत और वर्तमान मे योगी आदित्य नाथ दोनों ही प्रदेशों मे लोकप्रिय हैं। सामाजिक सदभाव पर तुच्छ राजनैतिक नारे चोट करे यह अस्वीकार्य है।

अग्रवाल का कहना है कि गैर राजनैतिक स्वार्थ के पर्वतीय मैदानी एकता समिति गंगा जमुनी तहजीव को आगे बढ़ाने की दिशा मे निरंतर आगे बढ़ेगी और दिलों मे नफरत के मैल को गंगा के अविरल धारा से धोने का संदेश देगी। सामाजिक एकता से ही एक संपन्न और आदर्श उत्तराखंड का निर्माण होगा और इसके लिए वह राजनैतिक दल मे भूमिका के साथ गैर राजनैतिक संगठन के द्वारा भी कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एकता की इस मशाल को लेकर वह राज्य भर मे जा रहे हैं। सभी जिलों से इसे लेकर सकारात्मक और उत्साहबर्धक प्रतिक्रिया आ रही हैं। राज्य आपदाग्रस्त है और अभी फोकस पीड़ितों तक पहुँचने और उन्हे राहत मुहैया कराने का है। वह आशावान हैं और मिल जुलकर देवभूमि उत्तराखंड को सुखी, संपन्न तथा देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनेगा।

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