जिला प्रशासन को गुमराह कर रहा है रेलवे: कुलविंदर

कहा, स्टे खारिज हुआ, केश मे सुनवाई जारी

देहरादून। दून टैक्सी ऑनर्स एसोशिएसन रेलवे रोड देहरादून के सचिव कुलविंदर सिंह ने कहा कि दून टैक्सी ऑनर्स एसो.की जिस जमीन को लेकर अदालत के स्टे खारिज करने के बात रेलवे कर रहा है वह निराधार है और रेलवे द्वारा प्रशासन को गुमराह कर टैक्सी रोजगार से आजीविका चला रहे लोगो के पेट पर लात मारने की साजिश कर रहा है।

प्रेस को जारी विज्ञाप्ति में टैक्सी एसो के सचिव ने कहा कि उक्त टैक्सी एसो० लगभग 60 वर्ष पूर्व से इसी रेलवे स्टेशन परिसर से संचालित हो रही है। एसो के कार्यालय का टेलीफोन न. भी देहरादून रेलवे स्टेशन के पते पर ही है। 2015 में रेलवे द्वारा एक बूथ की अनुमति मिली। जिसमें 5 टैक्सियों के चलाने की अनुमति थी। यह समझौता जिला प्रशासन की अध्यक्षता में हुआ था। सन् 2019 में टैक्सी एसोसिएशन को रेलवे से अनुमानित 6 लाख 10 हजार का नोटिस दिया गया जिसका की भुगतान टैक्सी एसो० के द्वारा किया गया। वर्ष 2023 में रेलवे में पार्किंग के टेंडर निकाल दिये और टेंडर की शर्तों में 40 लाख की टर्नओवर तय कर दी। चूँकि टैक्सी एसो० बिना लाम हानि के चलती है। इसीलिए टैक्सी एसो० इस टेंडर में भागीदारी नहीं कर पायी। तो रेलवे द्वारा यह पार्किंग अपने किसी निजी व्यक्ति को आवंटित कर दी गयी। जबकी टैक्सी एसो० पार्किंग रेट पर ही शुल्क अदा कर रही थी। इससे रेलवे को कोई लाभ नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में टैक्सी एसो० का मुकदमा हाई कोर्ट में चल रहा है। एसो० के द्वारा टैक्सी संचालन रोकने के विरोध में वर्ष 2023 में नैनीताल हाई कोर्ट ने स्टे आर्डर पास किया था। वर्तमान में रेलवे के द्वारा जिला प्रशासन को मुकदमा खारिज करने के विषय में जानकारी देकर टैक्सी स्टैंड को हटाने की बात की गई है। जबकि सच्चाई यह है कि हाई कोर्ट से केस खारिज नहीं हुआ है। केस नियमित सुनवाई में है। वही समाचार पत्रों से जानकारी मिली कि हाई कोर्ट को टैक्सी एसो० द्वारा गुमराह किया गया जबकि रेलवे के द्वारा जिला प्रशासन को गुमराह किया गया है। रेलवे के द्वारा एसो० के खिलाफ भ्रामक जानकारी देने के विषय में प्रयुक्त शब्दावली का टैक्सी एसो० विधिक राय ले रही है और अदालत को सही जानकारी मुहैया करायेगी।

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