सुबह शाम आपदा स्थल पहुंचकर टकटकी बनी परिजनों की दिनचर्या
उत्तरकाशी। धराली आपदा के सैलाव मे बहे लोगों की खोजबींन मे रेस्क्यू एजेंसिया दिन रात जुटे हैं। वहीं आपदा स्थल से दूर टकटकी लगाए परिजन भी सुबह से शाम तक इस उम्मीद मे बैठे हैं कि क्या पता कोई चमत्कार हो। सुबह आना और शाम को जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
5 अगस्त को आये सैलाव मे होटल मकान जमींदोज हुए तो साथ मे कई लोग भी लापता हो गए और उनके मलवे मे दबे होने की आशंका है। मलवे से कितने नीचे होटल, मकान दबे हैं इसे लेकर तमाम तरह की आशंकाए रही है। लेकिन एनडीआरएफ की ओर से प्रयोग की गई ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) मे मिली जानकारी के अनुसार पानी के साथ बह कर आए मलबे में आठ से दस फीट नीचे तक होटल और लोग दबे हुए हैं।इसके प्रयोग से मिलने वाले तत्वों के आधार पर ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ धराली में मलबे के ऊपर खुदाई कर रही है।
एनडीआरएफ की ओर से धराली में मलबे में दबे लोगों को ढूंढने के लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार का प्रयोग किया जा रहा है। इससे इलेक्टि्रकल डिटेक्टर वेब किसी मलबे में करीब 40 मीटर नीचे तक दबे किसी भी तत्व की जानकारी बताता है।
एनडीआरएफ के अनुसार इसकी मदद से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उससे यह जानकारी मिली है कि धराली में आपदा प्रभावित क्षेत्र में करीब आठ से 10 फीट नीचे होटल और लोग दबे हुए हैं। कुछ स्थानों पर जीपीआर से मिले संकेतों पर खुदाई की जा रही है। आपदा प्रभावित क्षेत्र को चार सेक्टर में बांट कर मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है। इसमें दो सेक्टर में एनडीआरएफ और दो में एसडीआरएफ की ओर से कार्य किया जा रहा है। रेस्क्यू अभियान अब दो चिनूक और एक एमआई हेलिकाप्टर धरासू व चिन्यालीसौड़ में तैनात करने का फैसला लिया गया है।