देहरादून। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हुए अवैध पेड़ कटान और निर्माण मामले में सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन के लिए शासन से अनुमति मांगी है। मामले मे सीबीआई ने जांच रिपोर्ट कोर्ट मे दाखिल कर दी है।
सुर्खियों मे रहे कार्बेट सफ़ारी प्रकरण मे सीबीआई तत्कालीन वन मंत्री हरक सिंह रावत से भी पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई शासन से लेकर वन विभाग के मुख्यालय तक भी दस्तावेजों को खंगाल चुकी है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में यह पूरा प्रकरण अवैध रूप से पेड़ काटे जाने और अवैध रूप से निर्माण से जुड़ा है। आरोप रहा है कि बिना अंतिम स्वीकृति के ही कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कई निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए। यही नहीं जितने पेड़ों के लिए अनुमति मिली थी, उससे कहीं ज्यादा पेड़ भी कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में काट दिए गए। यह प्रकरण पूरे देश में चर्चाओं में रहा और सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला फिलहाल विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट में होने के बावजूद भी हाईकोर्ट ने इस प्रकरण का स्वत: संज्ञान लिया था। बाद में विजिलेंस से हटाते हुए इसकी जांच सीबीआई को देने के निर्देश दिए थे, तभी से मामले में सीबीआई जांच कर रही है और लंबी जांच के बाद अब इस पर कार्रवाई शुरू की जा रही है।
गौरतलब है कि पिछले साल मार्च में जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई थी तो नेताओं और अफसरों की मनमानी को आश्चर्यजनक बताते हुए तल्ख टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत और डीएफओ किशन चंद को जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर और पाखरौ में बाघ अभयारण्य की स्थापना के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई की अनुमति देकर “स्वयं कानून के अनुसार” काम करने के लिए कड़ी फटकार लगाई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने इसे “राजनेताओं और नौकरशाहों द्वारा सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत को कूड़ेदान में फेंकने का एक उत्कृष्ट मामला” कहा था। पीठ ने कहा था कि, “हम तत्कालीन वन मंत्री और वन अधिकारी किशनचंद की वैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह से दरकिनार करने की हिम्मत पर आश्चर्यचकित हैं।” पीठ ने कहा था कि तत्कालीन वन मंत्री के पद छोड़ने के बाद ही डीएफओ किशन चंद को निलंबित किया जा सका था. साथ ही पीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दे दी थी। पीठ ने कहा था, “यह ऐसा मामला है जो दर्शाता है कि किस तरह एक राजनेता और वन अधिकारी के बीच साठगांठ के कारण राजनीतिक और व्यावसायिक लाभ के लिए पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है।
