मिलावटी मिठाईयों से रहें सावधान! आपकी सेहत को हो सकता है भारी नुकसान – News Debate

मिलावटी मिठाईयों से रहें सावधान! आपकी सेहत को हो सकता है भारी नुकसान

छैना रसगुल्ले, बर्फी व मिल्क केक के अलावा अन्य रेडीमेट मिठाईयों की खेप सीमांत जनपद से पहुँच रही बसों के जरिये

कोटद्वार(चन्द्रपाल सिंह चन्द)। यदि आप मिठाई खा रहें हैं तो सावधान हो जाएं। कहीं मिठाई खाने के बाद आपकी सेहत न बिगड़ जाए। क्योंकि मिलावटी मिठाईयों का सेवन आपकी सेहत के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।

दीपावली या अन्य त्यौहारों पर मिठाईयों की दुकानों में भीड़ होना लाजमी है। मिष्ठान विक्रेताओं के यहां मिठाई की डिमांड बढ़ने पर मुनाफाखोर बाजार में कैमिकल कलर वाली मिलावटी मिठाइयों की खेप बाजार में उतार देते हैं। कोटद्वार शहर भी मिलावटखोरों की जद में आ चुका है। यहां काफी मात्रा में मिलावटी मिठाईयां बिक रही हैं। जिनकी पहचान ग्राहक नहीं कर सकता है।
भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक कोटद्वार शहर में भी उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से छैना रसगुल्ले, बर्फी व मिल्क केक के अलावा अन्य रेडीमेट मिठाईयों की खेप बसों व ट्रकों के द्वारा काफी पहले से पहुंच रही है। मिठाईयों की यह खेप कोटद्वार ही नहीं बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में भी पहुंच रही है। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ मिष्ठान विक्रेता धड़ल्ले से इन मिलावटी मिठाईयों की भी बिक्री कर रहे हैं।
सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि कुछ कारीगर नामी गिरामी मिष्ठान विक्रेताओं की दुकानों से डिमांड लेकर उन्हें मिठाइयां सप्लाई करते हैं। मिष्ठान विक्रेता उन मिठाईयों को अपना ब्रांड बताकर ग्राहकों को बेचते हैं। यह मिठाईयां कितनी साफ सुथरी जगह पर बनती हैं यह सवाल अनुत्तरित है। मिलावटी मिठाईयों में मावे व दूध की जगह फर्टिलाइजर, आलू, आयोडीन, डिटर्जेंट, व्हाइटनर, चॉक, यूरिया तथा तरह तरह कैमिकल का उपयोग होता है। जिनके सेवन से कैंसर, ल्यूकेमिया, किडनी, लीवर संबंधी रोग, सांस संबंधी बीमारियां व त्वचा संबंधी अन्य रोग हो सकते हैं। कई जगह मिठाई में मिलावट करते वक्त उसमें स्टार्च और अनसैचुरेटेड फैट जैसी चीजें मिला दी जाती हैं। जिन्हें खाकर शरीर का कोलेस्ट्रोल लेवल एकदम हाई हो जाता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। मिठाई के ऊपर लगा एल्यूमिनियम वर्क काफी नुकसानदायक होता है।

शासन से जब मिलावटी खाद्य पदार्थो की बिक्री पर रोक लगाने का दबाब पड़ता है तब खाद्य सुरक्षा की टीम हरकत में आ जाती है। लेकिन छापेमारी की कार्यवाही से बड़े रसूखदार हमेशा बच जाते हैं। त्योहारी सीजन पर औपचारिक छापेमारी से इस लाइलाज बीमारी का समाधान होना संभव भी नही है।

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