भाजपा की सियासी पिच पर मन मुताबिक शॉट खेलते नजर आ रहे है धामी
संदेश साफ, धामी के नेतृत्व मे लड़ा जायेगा मिशन 2027 का चुनाव
देहरादून। मिशन 2027 और धामी सरकार के 4 साल के कार्यकाल को पूरा होने से ठीक पहले सीएम पुष्कर सिंह धामी अस्थिरता और नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों पर विराम लगाने मे सफल हो गए। मंत्रिमंडल मे पांच नये चेहरों को स्थान देकर आखिरकार धामी यह संदेश देने मे कामयाब हो गए कि 2027 का चुनाव उनके ही नेतृत्व मे लड़ा जायेगा। मंत्रिमंडल विस्तार मे जो चेहरे सामने आये उससे उन्हे मिले “फ्री हैंड” की झलक भी साफ दिख रही है।
भाजपा मंत्रिमंडल मे विस्तार के जरिये सियासी संतुलन साधने मे कुछ कामयाब भी नजर आ रही है, लेकिन इसमें भी सीएम धामी पिच पर अपने मुताबिक शॉट खेलते नजर आ रहे हैं। राजपुर विधायक खजानदास, रुड़की के प्रदीप बत्रा, भीमताल के राम सिंह कैड़ा तथा रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी सीएम धामी के करीबियों मे माने जाते हैं। त्रिवेंद्र सरकार मे नबर टू रहे हरिद्वार से मदन कौशिक को भी लम्बे अंतराल बाद मौका मिला है लेकिन उनकी पैरवी केंद्रीय स्तर पर मानी जा रही है। माना जा रहा है कि सियासी संतुलन को साधने के लिए हाई कमान ने भी धामी को निर्णय लेने के लिए पूरी छूट दी है। यह धामी को मिशन 2027 के लिए मजबूत नेटवर्क बनाने और नेतृत्व करने की हरी झंडी के रूप मे देखा जा रहा है।
वर्ष 2022 मे भाजपा को ऐतिहासिक रूप से दूसरी बार जीत दिलाने मे सीएम पुष्कर सिंह धामी को चुनाव हारने के बाद भी नायक के रूप मे उभरे तो हाईकमान ने उन्हे दोबारा सीएम के तौर पर मौका दिया। धामी रिकार्ड मतों से चंपावत उप चुनाव जीते और भाजपा के मुख्य चेहरे के रूप मे उभर कर आये।
हालांकि दोबारा कमान संभालने के बाद सीएम धामी के विरोधियों ने कोई कर कसर नही छोड़ी। राज्य मे नेतृत्व परिवर्तन की अफवाह इस दौरान आम बात रही। परंपरा को तोड़ते हुए धामी ने सभी अफवाहों को धूल धूसरित कर दिया। नेतृत्व परिवर्तन की जिन अफवाहों पर विराम लगाने मे धामी सफल हुए उनमे पूर्व की परंपरा को तोड़ने मे भी वह सफल हुए है। राज्य गठन के बाद अंतरिम सरकार से लेकर 2022 तक हर सरकार मे नेतृत्व मे हुए बदलाव ने इन आशंकाओं को प्रबलता से मजबूत किया कि भाजपा चुनाव से पहले कोई नया चेहरा मैदान मे उतार सकती है। लेकिन सीएम धामी हर बार इस सवाल को अनभिज्ञता जता कर टालते रहे।
सीएम धामी आज राज्य भाजपा के ही नही, बल्कि देश के अन्य राज्यों मे भी लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों की कतार मे शामिल हुए हैं। उनके कई फैसले देश मे नजीर बने हैं। समय समय पर देश के कई राज्यों मे हुए चुनाव अभियान का वह स्टार प्रचारक के तौर पर हिस्सा रहे है।
भाजपा संगठन विकास कार्यों के बूते चुनाव मे उतरने का दावा कर रहा है, लेकिन यह सच है कि उसकी नींव सीएम धामी ने ही रखी। नकल विरोधी कानून, लव जिहाद, लैंड जिहाद, यूसीसी, धर्मांन्तरण के खिलाफ कानून, महिलाओं को क्षेतिज आरक्षण, रोजगार और स्वरोजगार सहित कनेक्टिविटी तथा पर्यटन के क्षेत्र मे किये गए कार्यों को भाजपा धामी सरकार की उपलब्धि मानती है। राज्य मे केंद्र के सहयोग से चल रही करोड़ों की योजना को भाजपा मजबूत बैटल फील्ड मानती है।
सीएम धामी राज्य भाजपा के लिए अब तक शगुन ही साबित हुए हैं। यह भी संयोग है कि धामी अब तक जिन राज्यों मे चुनाव प्रचार के लिए गए वहाँ भाजपा के पक्ष मे निर्णय फलीभूत हुआ। कई मौकों पर अप्रत्याशित निर्णय से धामी विपक्ष को भी चौंका चुके हैं। नकल मामले मे हो या अंकिता के मुद्दे पर उन्होंने सीबीआई जांच की संस्तुति कर पारदर्शी और निष्पक्ष नायक की छवि अर्जित की। अब मिशन 2027 को लेकर जिस तरह से नेतृत्व परिवर्तन की आशंका को खारिज करने मे धामी सफल हुए उनके सामने अब पार्टी को हैट्रिक की उपलब्धि तक पहुंचाने की चुनौती है।