श्रीमद्भागवत में कुंती, द्रौपदी और उत्तरा का चरित्र नारी शक्ति की मिसाल: कृष्ण नयन महाराज – News Debate

श्रीमद्भागवत में कुंती, द्रौपदी और उत्तरा का चरित्र नारी शक्ति की मिसाल: कृष्ण नयन महाराज

कुंती सा धैर्य, द्रौपदी सा तेज और उत्तरा सी श्रद्धा से बनेगा हर घर स्वर्ग

नगाण गाँव मे श्रीमदभागवत का तीसरा दिन, द्रौपदी चीरहरण का किया मार्मिक वर्णन

उत्तरकाशी। पंडित आयुष कृष्ण नयन महराज ने कहा कि भागवत महापुराण केवल भगवान की लीलाओं का वर्णन नहीं, बल्कि नारी शक्ति के अद्भुत उदाहरणों का भी ग्रंथ है। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत में मुख्य रूप से तीन नारियों माता कुंती, द्रौपदी और उत्तरा का वर्णन आता है, जिनके चरित्र से आज भी समाज को प्रेरणा मिलती है।

 

बड़कोट के नगाण गाँव मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा मे कथा व्यास पण्डित आयुष कृष्ण नयन जी महाराज ने कहा कि माता कुंती विपत्ति में भी भक्ति की मिसाल है। कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख नहीं, बल्कि दु:ख मांगा था। उनका मानना था कि दुख में ही भगवान का स्मरण होता है। पांडवों की माता होते हुए भी उन्होंने पूरा जीवन संघर्ष में बिताया, पर धर्म और भक्ति का रास्ता नहीं छोड़ा। आज की नारी को कुंती से धैर्य और ईश्वर पर अटूट विश्वास सीखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि द्रौपदी धर्म और स्वाभिमान की प्रतीक है जो पांच पांडवों की पत्नी होते हुए भी अत्यंत तेजस्वी और धर्मपरायण थीं। भरी सभा में चीरहरण के समय उन्होंने श्रीकृष्ण को पुकारा और भगवान ने उनकी लाज बचाई। उन्होंने कहा कि “द्रौपदी “बताती हैं कि नारी अबला नहीं, शक्ति का रूप है। जब धर्म पर संकट आए तो नारी को द्रौपदी की तरह आवाज उठानी चाहिए।”

उत्तरा ममता और श्रद्धा की प्रतिमूर्ति है। अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने पति की मृत्यु के बाद भी गर्भ में पल रहे परीक्षित की रक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना की। अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से जब गर्भ नष्ट होने लगा, तो श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ की रक्षा कर कलियुग के प्रथम सम्राट परीक्षित को जीवन दिया। व्यास जी बोले, “उत्तरा का चरित्र बताता है कि माँ की प्रार्थना में कितनी शक्ति होती है।”

उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन का सार समझाते हुए कहा कि “संसार के भरोसे रहोगे तो धोखा ही मिलेगा, इसलिए केवल भगवान पर भरोसा करो।”

उन्होंने कहा कि भरी सभा में जब दुशासन द्रौपदी का चीर खींच रहा था, तब पितामह भीष्म, गुरु द्रोण, कृपाचार्य जैसे महारथी और पांचों पांडव पति भी सिर झुकाए बैठे थे। सब अपने-अपने बंधनों में बंधे थे। उस समय संसार का कोई भी रिश्ता, शक्ति या पद द्रौपदी के काम नहीं आया। द्रौपदी ने सब तरफ से निराश होकर दोनों हाथ उठाकर भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा, तभी उनकी लाज बची। यह प्रसंग सिखाता है कि पति, परिवार, समाज, धन-दौलत – सब समय पर धोखा दे सकते हैं। लेकिन जो एक बार सच्चे मन से भगवान को पुकार ले, भगवान पल में दौड़े चले आते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कलयुग में रिश्तों में स्वार्थ बढ़ गया है। बेटा बाप का, भाई भाई का, मित्र मित्र का भरोसा तोड़ देते हैं। इसलिए संत कहते हैं कि जग में धोखा ही धोखा है। बस एक केशव पर भरोसा है।

बड़कोट तहसील के नगाण गांव में भाजपा नेता मनवीर सिंह चौहान की धर्मपत्नी की वार्षिक एवं पितरों की सद्गति हेतु सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को राज्य सभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पहुंच कर कथा स्थल पर व्यास एवं जमदग्नि ऋषि मुनि महाराज का आशीर्वाद लिया।

कथा के दौरान पंडाल “नारी शक्ति जिंदाबाद” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।

कथा व्यास ने अंत में कहा कि कलियुग में भी यदि नारी कुंती सा धैर्य, द्रौपदी सा तेज और उत्तरा सी श्रद्धा रखे, तो हर घर स्वर्ग बन सकता है। कथा का विश्राम 3 मई को हवन यज्ञ और विशाल भंडारे के साथ होगा।

इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष राज्य सभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट , राज्यमंत्री रामसुंदर नौटियाल , बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता नवीन ठाकुर, मथुरा दत्त जोशी, जोत सिंह बिष्ट, परशुराम जगुरी कबुल सिंह पंवार, अतुल सिंह रावत पूर्व पालिका अध्यक्ष बड़कोट जसोदा राणा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, आनंदी राणा पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा, कबुल सिंह पवार जिला संघ चालक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, डॉक्टर मेजर बच्चन सिंह रावत, चिन्याली सोड ब्लॉक प्रमुख रणवीर महंत देवी दत्त उप्रेती आदि

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