स्थानीय प्रतिनिधियों सांसद और विधायक के खिलाफ गुस्सा, भूख हड़ताल करने के साथ गिरफ्तारी की भी चेतावनी
कोटद्वार। 93 दिनों से लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के लिए धरना दे रहे लोगो ने चिल्लरखाल से झंडाचौक तक आक्रोश रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान प्रतिनिधियों को भी जमकर कोसा और कहा कि एलिवेटेड रोड बनने तक आंदोलन जारी रहेगा।
रविवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भाबर व लालढांग के लोग बाइक व अन्य निजी वाहनों से देवी मंदिर तक पहुंचे। झंडाचौक तक प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए जनाक्रोश रैली निकाली। इसके बाद प्रदर्शनकारी धरना देकर बैठ गए और जाम लगा दिया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस मार्ग पर ब्रिटिशकाल से आवाजाही होती रही है। सरकार मार्ग का निर्माण न कर इसके अस्तित्व को खत्म करना चाहती है। सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधि उनकी मांग की सुध नही ले रहे हैं। क्षेत्रवासी आने वाली पीढी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस मार्ग के निर्माण से जहां सिडकुल में उद्योगों की स्थापना होने से स्थानीय लोगों के रोजगार के द्वार खुलेंगे।संघर्ष कर रहे प्रदर्शनकारी दिल्ली तक की पदयात्रा, सीएम आवास के घेराव जर चुके है, लेेकिन सरकार और प्रतिनिधि मूक बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियो ने कहा कि जब तक रोड नहीं बनेगी तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
राज्य आंदोलनकारी पंडित राजाराम अणथ्वाल ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह 2026 में पुन: अनशन पर बैठेंगे। देवेंद्र रावत की अध्यक्षता एवं नरेश धस्माना व रवींद्र सिंह सौंद के संचालन में आयोजित जनसभा में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रवीन थापा, दीपा अधिकारी, हेमा नेगी, मदन सिंह नेगी आदि ने विचार रखे। प्रदर्शनकारियों में नारायण सिंह रावत, ताजवर सिंह नेगी, कीर्ति मोहन द्विवेदी, उम्मेद सिंह भंडारी, पीतांबर कपटियाल, स्वयंवर सिंह बिष्ट, विकास रावत, जगदीश मेहरा, पुष्पा मेहरा, प्रकाश रावत, अमित अमोली आदि मौजूद रहे।
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पूर्वी झंडीचौड़ निवासी कृपाल सिंह रैली के दौरान खुद को जंजीर में बांधकर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि जिस तरह वह जंजीरों में बंधे हैं। उसी तरह लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग भी वन अधिनियम की बेड़ियों में बंधा है। जनहित में इस मार्ग का निर्माण जल्द होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की इस दौरान पुलिस से भी तनातनी हुई। उन्होंने पहले लालबत्ती चौराहे पर फिर झंडाचौक पर सभा के दौरान हाईवे जाम किया। पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति रैली निकाली गई है और एक घंटे से हाईवे बाधित हुआ है। पुलिस ने मार्ग को एक साइड से खुलवाया और काफी देर बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे तो उन्होंने माइक को बंद कराकर आंदोलनकारियों से सभा को समाप्त करने को कहा। हालांकि माइक बन्द तो नही हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारी भड़क गए। उन्होंने कहा कि पुलिस सत्ता के इशारे पर उनको धमका रही है। उन्होंने पुलिस और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कि। काफी देर बाद तनातनी संभल सकी, लेकिन लोग प्रतिनिधियों के खिलाफ काफी मुखर नजर आये। लोगों का कहना था कि स्थानीय विधायक को कार्यक्रम मे बुलावा भेजा गया था।
