देहरादून। मूल निवास और भू कानून की मांग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल ने आज को सीएम आवास कूच कर तांडव रैली निकाली। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद पुलिस ने दल दर्जनों लोगों को हिरासत मे ले लिया।
तय कार्यक्रम के अनुसार आज करीब 11 बजे, उक्रांद और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के सदस्य परेड ग्राउंड में भारी संख्या में एकत्रित हुए और राज्य मे भू कानून तथा मूल निवास के मुद्दे पर सरकारों की उदासीनता पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य में विशेष व्यवस्था के तहत सख्त भू कानून लागू होना चाहिए। उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्य गठन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन आज उत्तराखंड में जमीनों पर कब्जा करके भू माफियाओं ने यहां के जंगल और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने सरकार से भू माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाते हुए कहा कि हिमाचल की तर्ज पर यहां पर भी सशक्त भू कानून लागू होना चाहिए। उत्तराखंड क्रांति दल मूल निवास 1950 को लागू करने की मांग करती है। रैली में टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, विकासनगर, जौनसार, कुमांऊ समेत कई क्षेत्रों से सैकड़ों लोग शामिल हुए।
लोगों का हुजूम परेड ग्राउंड से एस्लेहॉल होते हुए हाथीबड़कला पहुंचा, जहां पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका। आक्रोशित भीड़ बैरिकेडिंग पर चढ़ गई, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मुख्यमंत्री स्वयं उनकी समस्याएं सुनने मौके पर आएं।
पुलिस ने उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी, और त्रिवेंद्र पंवार सहित अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया और बाद में कोर्ट के समीप छोड़ दिया गया।
रैली में उक्रांद के कार्यकारी अध्यक्ष आनंद प्रसाद जुयाल, शक्तिशैल कपरवाण, जय प्रकाश उपाध्याय, युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ नेता शांति प्रसाद भट्ट, प्रमिला रावत और किरण रावत कश्यप समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।
मुस्लिम समुदाय ने भी की भागीदारी, दिया समर्थन
उक्रांद द्वारा आयोजित रैली मे जहां कई संगठनों ने भागीदारी की वहीं हाल ही में गठित उत्तराखंड मुस्लिम मंच (मूलनिवासी) ने भी रैली को समर्थन दिया।
उत्तराखंड मुस्लिम मंच के संस्थापक मैक खान ने बताया कि लगभग 100 सालों से उत्तराखंड में रह रहे मुस्लिम गांवों की समस्या ठीक उसी तरह है जैसे पहाड़ में रह रहे आम लोगों की समस्याएं हैं। पैदल पगडंडी से गुजरते हुए अपने घर तक पहुंचना और सुअरों और बंदरों के बीच खेती करना, गुलदार के अचानक हमले में जान गंवाने के डर होना ये सब एक आम पहाड़ी का जीवन है। पहाड़ में रह रहे मुस्लिम लोगों की पूजा पद्धति अलग हो सकती है, परंतु उनकी संस्कृति एक आम पहाड़ निवासी जैसी ही है।
उन्होंने कहा कि शादी ब्याह के अलावा मंडाण लगाने और दैवीय नाच में रम जाने वाले पहाड़ी लोगों का ये आम जीवन है। उत्तराखंड के लगभग हर जिले में पहाड़ी मुस्लिम लगभग 100 सालों से निवासरत हैं। कुछ अस्थाई लोगों के आगमन के बाद और राजनीति की जहरीली हवाओं ने उत्तराखंड की सियासत को एक नया रूप दे दिया है। थूक जिहाद जैसी नई जिहाद की उत्पत्ति होना उत्तराखंड में एक मुस्लिम के लिए कलंक साबित करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे लोग जो यहां अस्थाई रूप से रह रहे हैं या कोई उनको राजनीतिक इस्तेमाल के लिए बाहर से इंपोर्ट कर लाया जा रहा हो जैसे सवाल यहां रह रहे मूलनिवासी मुस्लिमों के जहन में तैर रहे हैं । उत्तराखंड में मूलनिवास और भू कानून बनना हमारे उत्तराखंड के आम जनमानस के लिए अधिक जरूरी है।

