राज्यपाल से मिला कांग्रेस का प्रतिनिधि मंडल, सौंपा 9 सूत्रीय ज्ञापन
देहरादून। राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने पौने दामों पर बेचने तथा कैबिनेट मंत्री के आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच सहित 8 विंदुओं पर कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर कार्यवाही की मांग की। राज्यपाल को दिये ज्ञापन में मांग की गयी कि सरकारी जमीने बेचने के निर्णयों को निरस्त कर संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाया जाय। मंत्री गणेश जोशी की आय से अधिक सम्पत्ति मामले में न्यायालय के निर्देशों का पालन करने, सहकारिता विभाग मे कोरोना काल में हुई नियुक्तियों की जांच तथा एमबीबीएस में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हुए एडमिशनों की जांच करायी जाए। कांग्रेस ने कहा कि जिन शासनादेशों से उत्तराखंड की सरकारी जमीनें और धरोहर भवन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं, वे भी राज्यपाल की स्वीकृति के नाम से जारी हुए हैं।
जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट कैबिनेट के इस निर्णय के बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद द्वारा हजारों करोड़ रुपये बाजार भाव वाली जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट, मसूरी की 142 एकड़ भूमि और राष्ट्रीय धरोहर 15 साल के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये सालाना किराये पर एक निजी कंपनी को दे दी गई। प्रकाशित कंपनी अभिलेखों के अनुसार टेंडर की तीनों बोलीदाता कंपनियाँ एक ही व्यक्ति से जुड़ी थीं। सरकारी संपत्ति को इस प्रकार लीज पर देने का अधिकार किसी को नहीं था। मुख्यमंत्री द्वारा भूमि संबंधी निर्णय लेने के अधिकारों को अपने स्तर पर केंद्रित करने तथा बाजार में प्रतिस्पर्धा का आभास उत्पन्न कर सरकारी संपत्तियों के निजी आवंटन की प्रक्रिया अपनाने को लेकर गंभीर संवैधानिक एवं प्रशासनिक सवाल उत्पन्न हुए हैं।
यूआईआईडीबी अधिनियम 2023 का उल्लंघनः सरकारी भूमियों और संपत्तियों के संबंध में बनाए गए यूआईआईडीबी अधिनियम, 2023 की धारा 28(3)(घ) के अनुसार हर परियोजना पर सरकार और संबंधित विभाग का अनुमोदन अनिवार्य है, और धारा 28(4) के अनुसार मुद्रीकरण राज्य सरकार के निर्देश पर ही हो सकता है। बाद में मूल विभाग की सहमति की शर्त यह कहकर हटा दी गई कि मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। सरकारी भूमियों और संपत्तियों को लीज हेतु यूआईआईडीबी को हस्तांतरित करने वाली फाइलों में किसी विभागीय मंत्री की सहमति दर्ज नहीं है।
15 जनवरी 2025 को पटवाडांगर की भूमि यूआईआईडीबी को हस्तांतरित करने के लिए जारी शासनादेश में इस भूमि को कृषि विभाग की बताया गया है, जबकि राजस्व विभाग ने अधिसूचना संख्या से गांव का सर्वेक्षण शुरू किया और राजस्व परिषद ने अपने पत्र में लिखा कि यह 108 एकड़ भूमि “वन विभाग एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं” है। डाकपत्थर की भूमि भी बंदोबस्त पूरा हुए बिना और बिना खसरा संख्या के दे दी गई। बिना राजस्व अभिलेखों और स्पष्ट मालिकाना हक के भूमि का हस्तांतरण राज्य में प्रचलित भू-राजस्व अधिनियम तथा जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम का उल्लंघन है। शासनादेशों की अपनी शर्तों और वन कानून का उल्लंघनः भूमि और संपत्ति हस्तांतरण के लिए निर्गत सभी शासनादेशों की शर्त है कि धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व की इमारत वाली भूमि नहीं दी जाएगी और भूमि केवल अनुमोदित परियोजना के लिए दी जाएगी। इनमें से कोई भी परियोजना अनुमोदित नहीं है। हर की पैड़ी का अलकनंदा होटल और ऋषिकेश सहित 25 निरीक्षण भवन (जिनमें 1866 से 1928 तक के ब्रिटिशकालीन भवन भी हैं) इस सूची में हैं। रामगढ़ के राजकीय उद्यान की 8 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 4 हेक्टेयर घना वन है, जिसका गैर-वन उपयोग वन संरक्षण कानून के विरुद्ध है। मूल्य तय किए बिना 90 साल की लीजः अनुशंसा समिति के 29 अगस्त 2025 के कार्यवृत्त के अनुसार भूमि के मूल्य और राजस्व साझेदारी पर चर्चा आगामी बैठक में होनी थी, फिर भी पटवाडांगर की 13.64 एकड़ भूमि 90 साल के लिए 37.80 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस पर टेंडर कर दी गई। नैनीताल शहर के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को होटल परियोजना के लिए वहां से हटाने के निर्देश दिए गए। प्रचलित बाजार भाव के अनुसार कम से कम 1,00,000 करोड़ रुपये की ये 40 सरकारी संपत्तियाँ राज्य के 13 में से 12 जिलों में हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्यपाल के संज्ञान मे यह भी लाते हुए कहा कि काबिना मंत्री रेखा आर्य के पति ने उनपर 210 करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगाया है जिसकी सीबीआई तथा ईडी के माध्यम से जांच कराई जानी आवश्यक है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्यपाल के संज्ञान मे यह भी लाते हुए कहा कि काबिना मंत्री रेखा आर्य के पति ने उनपर 210 करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगाया है जिसकी सीबीआई तथा ईडी के माध्यम से जाँच कराई जानी आवश्यक है।
प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह, राजीव महर्षि, प्र्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, महिला अध्यक्ष जयोति रौतेला, सुरेन्द्र सिंह रांगड, राजेश चमोली आदि शामिल थे।