देहरादून। उक्रांद की केंद्रीय महामंत्री मीनाक्षी घिल्डियाल ने पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की जीवन शैली को लेकर भाजपा विधायक विनोद चमोली के वक्तव्य को संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया है।
घिल्डियाल ने कहा कि विधायक विनोद चमोली का यह कहना कि पहाड़ के लोग उन परिस्थितियों में रहने के लिए कंडिशंड हैं अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन बयान है। यदि पहाड़ का आम नागरिक कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को विवश है, तो क्या यह मान लिया जाए कि उनके मूलभूत सुविधाओं का अधिकार ही नहीं है? उन्होंने कहा कि पहाड़ का नागरिक “कंडिशंड” नहीं, बल्कि उपेक्षा का शिकार है। कठोर जलवायु, सीमित संसाधन, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, रोजगार के अवसरों का अभाव और बुनियादी ढांचे की बदहाली ये सब प्रशासनिक असफलताओं का परिणाम हैं, न कि जनता की नियति।
उन्होंने कहा कि यदि विधायक स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि पहाड़ों पर ठंड इतनी कठोर है कि बुजुर्गों के लिए विशेष व्यवस्था आवश्यक है, तो फिर यही संवेदनशीलता आम ग्रामीण, किसान, महिला और बुजुर्ग नागरिकों के लिए क्यों नहीं? क्या जनप्रतिनिधियों के लिए सुविधाएं अनिवार्य और जनता के लिए “कंडीशनिंग” पर्याप्त है?
उत्तराखंड क्रांति दल स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता है कि पहाड़ों के लोगों को “आदत पड़ गई है” कहकर उनकी समस्याओं को सामान्य नहीं किया जा सकता। हर नागरिक को समान रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी और सुरक्षित आवास का अधिकार है। पहाड़ों में आधारभूत संरचना (हीटिंग व्यवस्था, सड़क, अस्पताल, आपदा प्रबंधन) को प्राथमिकता देना सरकार का दायित्व है।
सरकार पहाड़ी क्षेत्रों में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष शीतकालीन राहत नीति बनाई जाए तथा स्वास्थ्य केंद्रों को सशक्त किया जाए और ग्राम स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की गारंटी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता केवल भाषणों में नहीं, नीतियों और बजट आवंटन में दिखनी चाहिए। पहाड़ के लोगों को उनके हाल पर छोड़ देने की मानसिकता अब स्वीकार्य नहीं है।