रामनगर। बीते तीस साल से कार्बेट टाइगर रिजर्व में अपनी सेवाएं दे रही 80 वर्षीय मादा हथिनी ‘सोनाकली’ का बीमारी के चलते निधन हो गया। करीब नौ वर्ष पूर्व राजकीय सेवा से सेवानिवृत हथिनी उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रसित थी। सेवानिवृत्ति के बाद उससे किसी भी प्रकार का कार्य नहीं लिया जाता था। इस अवधि में हथिनी के स्वास्थ्य एवं शारीरिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए उसके रख-रखाव, उचित देखभाल तथा शारीरिक सक्रियता बनाए रखने हेतु नियमित व्यायाम (एक्सरसाइज) से संबंधित गतिविधियां कराई जाती थीं।
हथिनी के निधन की सूचना प्राप्त होने पर उच्चाधिकारियों एवं वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी द्वारा उसके शव का निरीक्षण किया गया। इसके बाद निर्धारित क्रिया के अनुरूप वनकर्मियों द्वारा सलामी देकर हथिनी सोनाकली का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मानव वन्यजीव संघर्ष एवं वन्यजीव संरक्षण में हथिनी सोनाकली का उल्लेखनीय योगदान रहा था। हथिनी सोनाकली वर्ष 1997 में कार्बेट टाइगर रिजर्व में लाई गई थी। इसने वर्ष 1997 से 2002 तक ढिकाला रेंज, वर्ष 2002 से 2016 तक हल्दूपड़ाव, कालागढ़ क्षेत्र तथा वर्ष 2016 से वर्तमान तक ढिकाला रेंज में अपनी सेवाएं दीं। अपने सेवाकाल के दौरान सोनाकली ने वन्यजीव संरक्षण एवं बाघ रेस्क्यू अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2011 में गर्जिया क्षेत्र में आदमखोर बाघ के रेस्क्यू अभियान में इसका विशेष योगदान रहा। वर्ष 2012 में सर्पदुली रेंज में बाघ के हमले में वनरक्षक दीवानी राम की मौत के बाद सोनाकली ने साहस एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए उनके शव को बाघ के मुंह से निकालकर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2023 में सर्पदुली क्षेत्र में बाघ रेस्क्यू अभियान में भी इसने उल्लेखनीय योगदान दिया।
अपने सेवाकाल के दौरान सोनाकली ने बाघ रेस्क्यू अभियानों एवं वन क्षेत्रों में गश्त के दौरान अनेक अवसरों पर महावतों एवं चारा काटने वाले श्रमिकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शांत एवं सरल स्वभाव की सोनाकली ने अपने जीवनकाल में कार्बेट टाइगर रिजर्व में महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कीं। उसके निधन को कार्बेट टाइगर रिजर्व के लिए एक अपूरणीय क्षति बताते हुए निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उसकी सेवाएं एवं योगदान सदैव स्मरणीय रहेंगे।
शव निस्तारण के मौके पर उपनिदेशक सुश्री पंडित शिरीन संजय, पार्क वार्डन बिन्दरपाल, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व कबवरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा, वन क्षेत्राधिकारी सर्पदुली संजय पाण्डे, रमेश ध्यानी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।