कई जिलों मे बादलों की ओट से निकली धूप, आसमान मे छाए रहे बादल

देहरादून। उत्तराखंड के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के दौर की संभावना जताई गई है। हालांकि देहरादून सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बुधवार सुबह धूप बादलों की ओट से निकली। आसमान में बादल छाए रहने से मौसम सुहावना बना रहा।

बुधवार जारी मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार आज उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। अन्य पर्वतीय जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश और हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने 13 अगस्त को देहरादून, टिहरी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई है। पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज से अति तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। 14 अगस्त को देहरादून, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग ने बारिश के दौरान संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और चट्टान गिरने, सड़क एवं राजमार्ग बाधित होने, निचले इलाकों में जलभराव तथा नदी-नालों के उफान पर आने की आशंका जताई है। लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

भारी बारिश के कारण चमोली में 18, पिथौरागढ़ में 15, उत्तरकाशी में 12, रुद्रप्रयाग में सात, बागेश्वर में छह, देहरादून में छह, नैनीताल में चार, टिहरी में तीन और पौड़ी में दो सड़कें बंद हैं। हालांकि चारधाम और सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात सुचारु है। ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-134), तवाघाट-गुंजी और धारचूला-तवाघाट मार्ग, मुनस्यारी-मिलम सीमा मार्ग और जोशीमठ-मलारी-नीती राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107बी) पर यातायात संचालित हो रहा है।

कई नदियों का जलस्तर बढ़ा
केंद्रीय जल आयोग की बुधवार सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। अलकनंदा नदी का जलस्तर 625.30 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका चेतावनी स्तर 626 मीटर और खतरे का स्तर 627 मीटर है। मंदाकिनी का जलस्तर 621.00 मीटर रहा। इसका चेतावनी स्तर 623.70 मीटर और खतरे का स्तर 624.70 मीटर है। इसके अलावा यमुना का जलस्तर 604.40 मीटर और टौंस का जलस्तर 769 मीटर दर्ज किया गया है।

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