उच्च व तकनीकी शिक्षा में प्रतिनियुक्ति पर गये कार्मिकों की भी होगी वापसी

देहरादून। प्रदेश के उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सभी प्रकार की सम्बद्धताओं (अटैचमेंट) को समाप्त किया जाएगा। साथ ही विभिन्न संस्थानों एवं विभागों में प्रतिनियुक्ति पर गये कार्मिकों की भी वापसी सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को ठोस निर्देश दे दिए गए हैं।

उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि दोनों विभागों में बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी अपने मूल तैनाती स्थलों के बजाय अन्य महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं विभागों में सम्बद्ध अथवा प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इससे महाविद्यालयों व पॉलीटेक्निक संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि विद्यालयी शिक्षा विभाग की तर्ज पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में भी अटैचमेंट व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वार्षिक स्थानांतरण से पहले सभी प्रकार की सम्बद्धताओं को समाप्त करते हुए संबंधित शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल तैनाती स्थलों पर भेजा जाए। डॉ रावत ने प्रतिनियुक्ति पर गये कार्मिकों की समीक्षा कर विभागीय अधिकारियों को आवश्यकतानुसार उन्हें शीघ्र मूल तैनाती पर वापस भेजने की कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं।

शिक्षा विभाग में शिक्षकों व कार्मिकों के अटैचमेंट समाप्ति की अवधि 30 जून तक 

गौरतलब है कि विभिन्न विद्यालयों, विभागीय कार्यालयों व अन्य विभागों में सम्बद्ध सभी शिक्षकों को वापस अपने विद्यालयों मे जाने के लिए आगामी 30 जून तक सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अलावा उन शिक्षणेत्तर कार्मिकों के सम्बद्धीकरण आदेश भी निरस्त किये जायेंगे जो दूसरे कार्यालयों में तैनात हैं।

विभागीय मंत्री ने मिड-डे मील में हो रही फेराफेरी की शिकायतों का संज्ञान लेते हुये इसके जांच के आदेश दे दिये हैं। डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जनपद के साथ ही नैनीताल जिले के रामनगर, हल्द्वानी, पौड़ी में कोटद्वार, देहरादून में डोईवाला, रायपुर, विकासनगर व सहसपुर ब्लाॅक के विद्यालयों में मिल-डे मील में हो रही गड़बड़ी की जांच करने को कहा। डॉ. रावत ने कहा कि उन्हें पिछले कुछ समय से विभिन्न माध्यमों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों के माध्यम से मिड-डे मील योजना में गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं।

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