देहरादून। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के तत्वाधान मे विश्व पुस्तक मेले मे ‘भारत में सड़क दुर्घटनाएँ’ का भव्य लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक भारत में सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति, उनके चिकित्सीय, सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों का विस्तृत और तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है तथा सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता और प्रभावी रोकथाम की आवश्यकता पर बल देती है। यह पुस्तक उनके 25 सालों के अथक परिश्रम एवं अनुभव का परिणाम है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. बी. के. एस. संजय ने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएँ चालक की लापरवाही के कारण होती हैं, जिनमें ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग, गलत ओवरटेकिंग, थकान, नींद की कमी और नशे का प्रभाव प्रमुख कारण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पुस्तक किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं से समाज को होने वाले भारी नुकसान को रोकने के उद्देश्य से लिखी गई है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाएँ देश की प्रगति में बाधा बन रही हैं और समाज को शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग कर रही हैं, इसलिए यह पुस्तक विशेष रूप से वाहन चालकों को समर्पित है। पुस्तक के सह-लेखक डॉ. गौरव संजय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएँ ऐसी घटनाएँ हैं जिन्हें रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य समाज में सड़क सुरक्षा के प्रति शिक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। उन्होंने सभी नागरिकों से जागरूक चालक और जागरूक पैदल यात्री बनने की अपील की।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि सड़क सुरक्षा की अनदेखी का दुष्प्रभाव केवल दुर्घटना पीड़ित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके परिवार, मित्रों और पूरे समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक विशेष रूप से युवाओं में सड़क सुरक्षा के प्रति चेतना विकसित करेगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माननीय श्री लोकपाल सिंह ने देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए युवाओं से सुरक्षित, जिम्मेदार और अनुशासित ड्राइविंग अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन ललित किशोर मंडोरा द्वारा किया गया।