देहरादून। कैनिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की आखिरकार बजट सत्र मे विवादित बोल के बाद कैबिनेट से विदाई का आधार बन गयी और उन्हे इस्तीफा देना पड़ा। अग्रवाल की सत्र के दौरान पहाड़ी समुदाय पर विवादित टिप्पणी से ऐसा वातावरण बना कि उसकी गूंज उत्तराखंड से लेकर देश की राजधानी तक पहुंची। सामाजिक तथा गैर राजनैतिक संगठनों ने जहाँ विरोध प्रदर्शन तेज किये तो मौके की नजाकत को भांप कर कांग्रेस और यूकेडी भी मैदान मे उतर गयी। पहाड़ी स्वाभिमान रैली निकली तो अग्रवाल के इस्तीफे दबाव पड़ा। भाजपा की ओर से बचाव को लेकर संयमित टिप्पणी आयी। बचाव करते करते अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी कुछ ऐसा बोल गए कि वह भी निशाने पर आ गए। वहीं स्पीकर ऋतु खंडूरी भी विरोधियों के निशाने पर आई।
हालांकि भाजपा के भीतर से भी अग्रवाल के विवादित बयान को लेकर कई लोग नाखुश थे। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस पर बेबाक राय रखते हुए कहा कि इस तरह कि भाषा जिम्मेदार व्यक्ति से अपेक्षित नही है। उन्हे माफी मांगनी चाहिए। वहीं कोटद्वार मे गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने प्रेमचंद के वक्तव्य को निंदनीय बताया और कहा कि आहत लोगों की पीड़ा को वह उचित फोरम पर रख चुके है।
प्रेमचंद अग्रवाल ने सदन और गंगा के समुख वक्तव्य पर खेद भी जताया, लेकिन अतीत की कई घटनाओं को लेकर भी उनके खिलाफ रोष था जो भभक उठा। पीएम मोदी की रैली के दिन ही गैरसैंण मे रैली निकालकर आंदोलनकारियों ने अपने तेवर स्पष्ट कर दिये। रही सही कसर होली के दिन होल्यारों की टोली मे बैठे नेगी दा के गीतों से भी झलकी और आखिरकार होली के दो दिन बाद प्रेमचंद ने कुर्सी को छोड़ना की बेहतर समझा।