महापंचायत से पहले मस्जिद के 50 मीटर के दायरे मे निषेधाज्ञा के आदेश – News Debate

महापंचायत से पहले मस्जिद के 50 मीटर के दायरे मे निषेधाज्ञा के आदेश

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी के रामलीला मैदान में मस्जिद विवाद को लेकर देव भूमि विचार मंच द्वारा प्रस्तावित महापंचायत को देखते हुए शान्ति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उप जिला मजिस्ट्रेट भटवाड़ी मुकेश चन्द रमोला के द्वारा कल से मस्जिद मोहल्ले के 50 मीटर की परिधि मे निषेधाज्ञा लागू करने के आदेश जारी किये हैं।

जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दिनांक 30 नवंबर की प्रातः 07.00 बजे से अग्रिम आदेशों तक मौजा बाड़ाहाट में विवादित स्थल/विवादित ढांचा,/मस्जिद मौहल्ला के 50 मीटर परिधि के क्षेत्रान्तर्गत विभिन्न शर्तों एवं प्रतिबन्धों के तहत निषेधाज्ञा लागू करने के आदेश जारी किया गया है। निषेधाज्ञा का उल्लंघन धारा-223 बी०एन०एस०एस० के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध होगा।

मामले मे नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी के भटवाड़ी रोड पर स्थित मस्जिद के विवाद मामले में इसकी सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जिलाधिकारी और एसपी उत्तरकाशी को कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ कोर्ट को अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि एक दिसंबर को मस्जिद के खिलाफ महापंचायत होने जा रही है। इसलिए इस पर रोक लगाई जाए। इस पर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि एक दिसंबर को होने वाली महापंचायत के लिए प्रशासन ने कोई अनुमति नहीं दी है। वर्तमान में वहां पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस दिन-रात गश्त कर रही है और अभी स्थिति सामान्य है।

अल्पसंख्यक सेवा समिति की याचिका पर हो रही सुनवाई
उत्तरकाशी के अल्पसंख्यक सेवा समिति की याचिका पर कोर्ट मे सुनवाई चल रही है। समिति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 24 सितंबर से कुछ संगठनों की ओर से भटवाड़ी रोड स्थित सुन्नी समुदाय की मस्जिद को अवैध बताकर उसे ध्वस्त करने की धमकी दी जा रही है। इसकी वजह से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसलिए मस्जिद की सुरक्षा करने के आदेश राज्य सरकार को दिए जाएं। याचिका में कहा गया कि मस्जिद वैध है और 1969 में जमीन खरीदकर बनाई गई। 1986 में वक्फ कमिश्नर के निरीक्षण में भी इसे वैध पाया गया। कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अगर किसी जाति धर्म या समुदाय के लिए भड़काऊ बयान का सहारा लिया जाता है तो राज्य सरकार सीधे मुकदमा दर्ज करे, लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक इस मामले में किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया है।

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