हिंदी को राष्ट्रभाषा और अंतराष्ट्रीय भाषा बनाने को हिमालय से शुरू होगा अभियान: निशंक
आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी हिंदी का राष्ट्रभाषा न बनाना संविधान का भी उल्लंघन
दुनिया के 250 विवि तथा 600 महा विधालयों मे पढाई जा रही हिंदी दुनिया को स्वीकार
देहरादून। हिंदी को राष्ट्रभाषा और संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाये जाने हेतु 10 जनवरी को हिमालयी विवि, एम एम जे एन पीजी कालेज तथा हिमालय विरासत ट्रस्ट और लेखक गाँव के संयुक्त तत्वाधान मे हरिद्वार के ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज सभागार में अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में 20 देशों के अलावा देश के नामचीन साहित्यकार, शिक्षाविद एवं हिंदी के विद्वान प्रतिभाग करेंगे।
मीडिया से वार्ता करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री तथा सांसद डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा दिलाने के लिए हिमालय से अभियान शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 343 से 50 तक में व्यवस्था की गई थी कि 10 साल के बाद हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिया जाएगा। इसके पीछे यह तर्क था कि दक्षिण के राज्य हिंदी मे सशक्त नही है और इस अवधि मे वह भी हिंदी मे बेहतर हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि लेकिन आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी हम लोग गुलामी के चिह्न के बोझ को ढो रहे हैं। हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिलने पर संविधान का भी उल्लंघन हुआ है।
डॉ निशंक ने कहा कि भारत के बाद इजरायल आजाद हुआ, लेकिन वहाँ की सरकार ने तीन साल के अंदर हिब्रू भाषा को राष्ट्र भाषा का दर्जा दे दिया गया। इजरायल ने आजादी मिलने के बाद एक दिन भी गुलामी के चिह्न को नहीं ढोया। उन्होंने कहा कि भारत ने आजादी की लडाई हिंदी भाषा मे लड़ी और और देश भक्ति के अनेक गीत इसके उदाहरण हैं। बापू ने भी वर्धा सम्मेलन में कहा था कि हिंदी देश की आत्मा बन कर काम करेगी। उन्होंने हिंदी के बिना देश की कल्पना को अधूरा बताया।
डॉ निशंक ने कहा कि हिंदी दुनिया की सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा है। दुनिया के 250 विवि तथा 600 महा विधालयों मे हिंदी पढाई जाती है। जब पूरी दुनिया हिंदी को स्वीकार कर रही है तो इसे राष्ट्रभाषा घोषित न करना तर्कहीन है। उन्होंने कहा कि 10 जनवरी 1975 को राष्ट्रभाषा समिति ने पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित किया। इसके बाद लगातार विश्व हिंदी सम्मेलन लगातार हो रहे हैं। लेकिन देश में हिंदी भाषा समय के साथ अपना स्थान नही बना पायी। जबकि मॉरीशस में हिंदी का सबसे बड़ा सचिवालय है। फिजी की राजभाषा हिंदी है।
उन्होंने कहा कि संविधान की 8वीं अनुसूची मे 22 भारतीय भाषाओं का उल्लेख है, लेकिन हिंदी नही। लॉर्ड मैकाले ने देश में अंग्रेजी का प्रचार कर भारतीय संस्कृति पर हमला भी किया। निशंक ने दावा किया कि अगर, हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा मिलता है तो 20 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार मे जुटे साहित्यकार और शिक्षाविद संकल्प लेने के बाद ऋषिकुल से हर की पैड़ी तक संकल्प यात्रा निकालेंगे। सम्मेलन के दूसरे दिन के कार्यक्रम मे हिमालयी विश्वविद्यालय, जीवनवाला देहरादून और लेखक गांव, थानो (देहरादून) में आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के आम जन की भाषा हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए सभी वर्गों को आगे आने की जरूरत है।