परिसंपत्तियों को निवेश, रोजगार और सतत पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित होने से मिलेगा आर्थिक लाभ
देहरादून। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड इनवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) की समस्त भूमि का स्वामित्व सरकार के पास सुरक्षित रहेगा। सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को बेचना नहीं है, बल्कि इन परिसंपत्तियों को निवेश, रोजगार और सतत पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करते हुए, आर्थिक संभावनाओं का उच्चतम उपयोग कर उसे उत्पादक बनाना है। इस प्रक्रिया में राज्य का स्वामित्व, नियामक नियंत्रण तथा उनके उपयोग और निर्धारित अवधि पूरी होने पर पुनः राज्य को हस्तांतरित होने के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
नेता प्रतिपक्ष के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के तहत निजी निवेशक को केवल स्वीकृत परियोजना के विकास और संचालन का अधिकार दिया जाएगा। यह अधिकार भी निर्धारित निवेश प्रतिबद्धताओं, विकास के विभिन्न चरणों, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों तथा अन्य निर्धारित शर्तों के अधीन होगा। इससे केवल आतिथ्य सत्कार क्षेत्र में ही लगभग 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये के निवेश होने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 10,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही, राज्य को 200 से 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। इसके अलावा, राज्य के कर राजस्व में वृद्धि होगी, स्थानीय स्तर पर खरीद को बढ़ावा मिलेगा, पर्यटन को मजबूती मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार होगा।
चौहान ने कहा कि इस बारे मे शासन भी स्पष्ट कर चुका है कि परिसंपत्ति मुद्रीकरण भारत सरकार की एक स्थापित प्रक्रिया है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और रेल भूमि विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा समय -समय पर उपयोग में लाया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि परिसंपत्ति मुद्रीकरण न तो निजीकरण है और न ही इसमें परिसंपत्तियों की सीधे बिक्री की जाती है, बल्कि यह एक निजी पूंजी को आकर्षित करने की सुव्यवस्थित प्रयास है। यह दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक परिसंपत्तियों की क्षमता का उपयोग जनहित में किए जाने को लेकर अपनाए गए उत्तराखंड सरकार के सिद्धात के अनुरूप है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसलिए जन सामान्य को भ्रामक प्रचार अभियान के प्रति सतर्क करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कुछ पक्षों द्वारा किए गए भ्रामक दावों के विपरीत किसी भी सार्वजनिक भूमि की सीधे तौर पर बिक्री नहीं की गई है। भ्रामक प्रचार अभियान में एचएमटी (HMT), आईडीपीएल (IDPL) सहित लोक निर्माण विभाग के कुछ विश्राम गृहों और उद्यान विभाग के बगीचों का उल्लेख किया गया है, जबकि संबंधित परिसम्पत्तियां आज भी अपने मूल विभागों के पास सुरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त, आतिथ्य सत्कार के साथ ही अन्य विकास कार्यों के लिए चिह्नित भूमि के भूखंड अभी मास्टर प्लानिंग या फिर प्री-फिजिबिलिटी के चरण में ही हैं। इसलिए इस तरह के भ्रामक अभियान राज्य की विकास यात्रा को बाधित कर सकते हैं।