प्रदेश भर मे फूंके गए असत्य के प्रतीक रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी विजयादशमी की शुभकामनाएं, सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलने का किया आह्वान
देहरादून। असत्य पर सत्य की विजय के पर्व विजयदशमी के पर्व को प्रदेश भर मे धूम धाम से मनाया गया। तमाम हिस्सों मे रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले फूंके गये।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में दशहरा पर्व कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जहां पर पहली बार 181 फिट लंबे रावण के पुतले का दहन किया गया. इसके साथ ही 70 फीट ऊंचा कुंभकरण और 70 फिट ऊंचा मेघनाथ के पुतले का दहन किया गया।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परेड ग्राउंड, देहरादून में बन्नू बिरादरी द्वारा आयोजित दशहरा महोत्सव में प्रतिभाग कर प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी का पर्व हमें सत्य की शक्ति और धर्म की महत्ता का स्मरण कराता है। भगवान श्रीराम और रावण के प्रसंग से यह सीख मिलती है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। रावण के पास अपार संपत्ति, सामर्थ्य और विशाल सेना थी, लेकिन अहंकार तथा मर्यादा का उल्लंघन उसके पतन का कारण बना। उन्होंने कहा कि धर्म और सदाचार ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत हैं। भगवान श्रीराम ने अपने आचरण से त्याग, संयम, कर्तव्यपालन और मर्यादा के ऐसे आदर्श स्थापित किए, जो आज भी प्रत्येक व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं। पिता के वचन की रक्षा के लिए राजसुख का त्याग कर चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना उनके कर्तव्यबोध और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा का उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का अवसर भी है। हमें अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक प्रवृत्तियों को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए। भ्रष्टाचार, अन्याय, नशे और महिलाओं के प्रति हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक सौहार्द की रक्षा करते हुए प्रदेश में शांति, सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया है, जिसके अंतर्गत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है। सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों से क्षतिपूर्ति वसूलने के उद्देश्य से सख्त दंगारोधी कानून लागू किया गया है। धर्म और आस्था के नाम पर लोगों को गुमराह करने तथा धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करना समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करते हुए प्रदेश में सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित रामराज्य की अवधारणा न्याय, सुशासन, समानता और जनकल्याण पर आधारित है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे विजयादशमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा सत्य, धर्म, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ऐसे उत्तराखंड का निर्माण किया जा सकता है, जहां प्रत्येक व्यक्ति को न्याय मिले, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों, महिलाओं को सुरक्षित वातावरण मिले और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यही भगवान श्रीराम के आदर्शों के प्रति सच्ची श्रद्धा और विजयादशमी के पर्व का वास्तविक संदेश है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, बन्नू बिरादरी के पदाधिकारी एवं सदस्य, आयोजन समिति के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।