उत्तरकाशी। अक्षय तृतीया पर आज विधि विधान से माँ गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गए। अब श्रद्धालु यमुनोत्री और गंगोत्री के छह माह दर्शन कर पाएंगे।
रविवार सुबह ढोल दमाऊ के साथ मां यमुना जी की विग्रह डोली खरसाली से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। उनके भाई शनि महाराज हर वर्ष की भांति अपने बहन को छोड़ने यमुनोत्री धाम पहुंचे। रविवार को डोली प्रस्थान के दौरान खरशाली और आसपास के गांवों में भावुक माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने नम आंखों से अपनी आराध्य देवी मां यमुना को विदा किया।
गौरतलब है कि शीतकाल के दौरान मां यमुना की भोग मूर्ति खरशाली गद्दी स्थल में विराजमान रहती है, जहां पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और दर्शन होते हैं। अब ग्रीष्मकाल के आगमन के साथ ही अब मां यमुना की पूजा-अर्चना यमुनोत्री धाम में संपन्न होगी
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां यमुना यमुनोत्री धाम में भैया दूज (यम द्वितीया) तक विराजमान रहती हैं। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु धाम पहुंचकर दर्शन का लाभ उठाते हैं। परंपरा के अनुसार, खरशाली और आसपास के ग्रामीण मां यमुना की डोली के साथ पैदल यात्रा करते हुए यमुनोत्री धाम तक जाते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखती है।
कपाट खुलने पर सीएम भी रहे मौजूद,श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा
वैदिक मंत्रोचार, धार्मिक अनुष्ठान और जय मां गंगे के जयकारों के साथ आज 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पर्व पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ हेतु खोल दिए गए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद इस पल के साक्षी बने। गंगोत्री के कपाट खुलने के समय हजारों तीर्थयात्री मंदिर प्रांगण में मौजूद रहे। इस दौरान ‘हर-हर गंगे’ और ‘मां गंगा की जय’ के जयकारों से पूरा गंगोत्री धाम गूंज उठा. वहीं, तय मुहूर्त पर दोपहर 12.15 पर गंगोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। इस दौरान धाम में मौजूद भक्तों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की गई।
रविवार को मां गंगा की उत्सव डोली ने तड़के ही गंगोत्री धाम के कपाट खोलने के लिए भैरव घाटी से प्रस्थान किया। इससे पहले भैरव घाटी में मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना की गई। इसके बाद मां गंगा की डोली यात्रा गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुई, जिसके बाद विधि विधान के साथ गंगा पूजन, गंगा सहस्नाम पाठ एवं विशेष पूजा अर्चना करने के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ धाम के कपाट को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।